
Ranchi: मांडर विधानसभा उपचुनाव को लेकर झारखंड में सियासत तेज हो चुकी है. महागठबंधन की तरफ से जहां शिल्पी नेहा तिर्की नामांकन कर चुकी हैं, वहीं बीजेपी ने गंगोत्री कुजूर को इस सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का कमल लंबे अर्से के बाद गंगोत्री कुजूर ने ही बंधु तिर्की को हराकर खिलाया था. इस बार मांडर उपचुनाव में बीजेपी इस क्षेत्र से 2014 में चुनाव जीतने वाली गंगोत्री कुजूर को चुनाव मैदान में उतारकर दांव खेला है. इस बार चुनाव मैदान में गंगोत्री कुजूर के सामने मांडर के तीन बार के विधायक बंधु तिर्की की बेटी शिल्पी नेहा तिर्की हैं. ऐसे में क्या भाजपा अपनी खोयी सीट बचा पाने में सफल हो पायेगी? वहीं, दूसरी ओर बंधु तिर्की अपनी बेटी शिल्पी नेहा तिर्की के जरिये अपनी सीट को बरकरार रख पायेंगे?
23 हजार 127 वोटों से जीते थे चुनाव:
2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक से बंधु तिर्की ने भारतीय जनता पार्टी के देव कुमार धान को 23127 वोटों के मार्जिन से हराया था. बंधु तिर्की को इस चुनाव में 93 हजार 491 वोट आया था. वहीं देव कुमार धान जो भाजपा प्रत्याशी थे उन्हें 69364 वोट आया था. बाद में बंधु तिर्की ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था. वहीं 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के गंगोत्री कुजूर से बंधु तिर्की चुनाव हार गए थे. 2009 में बंधु तिर्की ने देव कुमार धान को हराकर इस सीट पर कब्जा जमाया था.
2019 में बंधु तिर्की ने जीती थी सीट
2019 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत यह सीट कांग्रेस के खाते में थी. मगर इस सीट पर जेवीएम प्रत्याशी के रूप में खड़े बंधु तिर्की ने जीत हासिल की थी. वर्तमान में बंधु तिर्की कांग्रेस में हैं और आय से अधिक संपत्ति मामले में उनकी सदस्यता रद्द होने के बाद उपचुनाव में कांग्रेस ने बंधु तिर्की की बेटी शिल्पी नेहा तिर्की को अपना उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस जहां बंधु तिर्की के नाम पर चुनावी जीतने की जुगत में है तो बीजेपी इस सीट को 2019 में गंवाने के बाद फिर से लेने की कोशिश में है.
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वर्ष 2014 में गंगोत्री कुजूर ने बंधु को हराकर जमाया था कब्जा
गंगोत्री कुजूर मांडर विधानसभा से विधायक रह चुकी हैं. 2014 में वो बंधु तिर्की को हराकर पहली बार विधायक बनी थीं. गंगोत्री कुजूर ने वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी तब के टीएमसी उम्मीदवार बंधु तिर्की को 7605 वोटों से पराजित किया था. लेकिन वर्ष 2019 में उन्हें मौका नहीं मिला था. पार्टी ने उनका टिकट काट कर, देव कुमार धान को टिकट दिया था. लेकिन इस बार से भाजपा ने गंगोत्री कुजूर को टिकट देकर भरोसा जताया है.
23 जून को मतदान:
मांडर विधानसभा उपचुनाव के लिये 23 जून को मतदान होंगे. 9 जून तक नामांकन वापस लिया जा सकता है. जबकि, 26 जून को वोटों की गिनती होगी.
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कांग्रेस ने पहली बार 1972 में जीता था मांडर
मांडर विधानसभा सीट पर कांग्रेस शुरू से ही मजबूत स्थिति में रही है. कांग्रेस ने पहली बार 1972 में चुनाव मांडर जीता था. उस वक्त श्रीकृष्ण भगत कांग्रेस की तरफ से चुनाव मैदान में थे. तब लेकर अब तक 5 बार कांग्रेस के प्रत्याशियों ने चुनाव जीता है, जबकि भाजपा ने सिर्फ एक बार चुनाव जीता है.
मांडर विधानसभा से अब तक रहे विधायकों की सूची
वर्ष विधायक पार्टी
1957 राम विलास प्रसाद जेएचपी
1962 पॉल दयाल झापा
1967 करमचंद भगत स्वतंत्र
1972 श्रीकृष्ण भगत कांग्रेस
1977 करमचंद भगत कांग्रेस
1980 करमचंद भगत कांग्रेस
1985 गंगा भगत कांग्रेस
1990 करमचंद भगत जद
1995 विश्वनाथ भगत झामुमो
2000 देव कुमार धान कांग्रेस
2005 बंधु तिर्की यूजीडीपी
2009 बंधु तिर्की जेएचजेएएम
2014 गंगोत्री कुजूर भाजपा
2019 बंधु तिर्की झाविमो




