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13 रुपये 69 पैसे प्रतिदिन का बेरोजगारी भत्ता दे सरकार ने बेरोजगारों के साथ किया भद्दा मजाकः आशा लकड़ा

Ranchi : हेमंत सरकार ने राज्य के बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देकर उनके मनोबल को नीचा दिखाने का काम किया है. महज 13 रुपये 69 पैसे प्रतिदिन के हिसाब से बेरोजगारी भत्ता देकर राज्य सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है.

शनिवार को ये बातें मेयर आशा लकड़ा ने कहीं. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की इस घोषणा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्य के बेरोजगार युवाओं के साथ भद्दा मजाक किया है. 13 रुपये 69 पैसे में एक बेरोजगार युवा क्या कर सकता है.

वर्तमान में एक श्रमिक भी प्रतिदिन न्यूनतम 500 रुपये काम रहा है. मनरेगा के तहत संचालित योजनाओं में भी मजदूरों को प्रतिदिन मिलने वालीवाली मजदूरी हेमंत सरकार के बेरोजगारी भत्ते से कई गुना अधिक है. राज्य के बेरोजगार युवाओं, जिनके वोट से आज हेमंत सरकार सत्ता पर काबिज है, उन्हीं के साथ राज्य के मुख्यमंत्री इस प्रकार का भद्दा मजाक कर रहे हैं.

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उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार में दिये गये बेरोजगारी भत्ता पर राज्य के बेरोजगार युवक भी स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. नियोजनालयों में निबंधित बेरोजगार युवक भी यही कह रहे हैं कि प्रतिदिन 13 रुपये 69 पैसे के हिसाब से दिये जानेवाले बेरोजगारी भत्ता की राशि मुख्यमंत्री उनसे ले लें.

इस पैसे से उनका भविष्य तो नहीं सुधर सकता. शायद राज्य सरकार इस पैसे से अपना भविष्य जरूर सुधार लेगी. राज्य सरकार ने बेरोजगारी भत्ता देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि जेएमएम-कांग्रेस की सरकार की कथनी व करनी में कितना अंतर है.

मेयर ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि आदिवासी हिन्दू नहीं हैं. मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि मुख्यमंत्री स्वयं किस धर्म को मानते हैं. चुनाव के दौरान नामांकन पत्र में उन्होंने किस धर्म के होने की जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज शिव-पार्वती के पूजक थे.

आदि काल से आदिवासी प्रभु श्रीराम को मानने वाले हैं. झारखंड की धरती रामभक्त हनुमान की जन्मस्थली है, जो अंजन धाम के रूप में विख्यात है. सिमडेगा के रामरेखा धाम में प्रभु श्रीराम के पदचिन्ह हैं.

क्या मुख्यमंत्री इन ऐतिहासिक तथ्यों को भी झूठ साबित कर सकते हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री को लगता है कि वे हिन्दू नहीं हैं तो स्पष्ट करें कि हलफनामा में उन्होंने किस जाति व धर्म के नाम का जिक्र किया है.

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