
Mumbai : महाराष्ट्र के लातूर में लॉकडाउन के बीच दिल्ली के मरकज जैसा जमावड़ा देखने को मिला है. यहां रोठोडा गांव में महानुभव पंथ पंथ के सत्संग में भाग लेने 1300 श्रद्धालु आये थे. जो लॉकडाउन के कारण यहां फंस गये थे. अब इनको बसों से वापस भेजा जा रहा है. ये श्रद्धालु पुणे के जाधववाडी के रहने वाले हैं. फरवरी महीने से ही यहां सत्संग चल रहा था.
इसके बाद लॉकडाउन की घोषणा होने पर ये लोग यहीं फंस गये. खबर मिली है कि चार दिन पहले यहां भारी बारिश हुई. जिसमें टेंट भी उखड़ गया. रहने और खाना बनाने का सामान भी खऱाब हो गया. तब से ये साधक मंदिरों और स्कूलों में सहारा लिये हुए थे.
महाराष्ट्र में घर-घर जाकर अखबार और पत्रिकाएं पहुंचाने से बचने को कहा गया
इधर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने शनिवार को कहा कि स्टॉलों और दुकानों पर अखबारों, पत्रिकाओं की बिक्री की अनुमति है लेकिन प्रिंट मीडिया क्षेत्र को घर-घर जाकर समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं पहुंचाने से बचने को कहा गया है.
सीएमओ ने सिलसिलेवार ट्वीट में शनिवार को यह कहा.
राज्य सरकार ने कहा कि वह मीडिया का पूरे हृदय से समर्थन करती है और कोरोना वायरस महामारी का मुकाबला करने में उसका सहयोग चाहती है.
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मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान में कहा गया है, ‘‘ हम मीडिया से घर-घर जाकर अखबार एवं पत्रिकाएं पहुंचाने से बचने का अनुरोध करते हैं. हम मीडिया का पूरे हृदय से स्वागत करते हैं और सुझावों एवं आपत्तियों की ओर उसकी ओर ताकते हैं. लेकिन ऐसी महामारी के समय में, जहां हमें वाकई लोगों की आवाजाही में कमी लाने और सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत है, ज्यादातर आर्थिक कामकाज मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं.’’
बयान में मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘ मीडिया समय की कसौटी पर खरा उतरा है. सच्चाई का गला नहीं घोंटा जा सकता है. हम उसके लिए आपके सहयोग का अनुरोध करते हैं.’’
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के सहयोगी हर्षल प्रधान द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि ठाकरे ने अखबारों के मालिकों और संपादकों से बातचीत की है और वे सहयोग के लिए जारी हुए हैं.
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