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रांची के कोचिंग संस्थानों की लूट कथा- 5: न मानते हैं कोई गाइडलाइन, न सार्वजनिक करते हैं जरूरी जानकारी

Rahul Guru

Jharkhand Rai

Ranchi: रांची के कोचिंग संस्थान पैसे के लिए अभिभावकों, स्टूडेंट्स व सरकारी सिस्टम को गुमराह भी करते हैं. एक साल में करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाले कोचिंग संस्थान हर तरह की जानकारी को छुपाते हैं. स्टूडेंट्स को सुविधा देने से भी इन्हें भरपूर परहेज है. ऐसा लगता है कोचिंग इंस्टीट्यूट खुद को हर सिस्टम से ऊपर समझते हैं. तभी तो ये किसी गाइडलाइन को नहीं मानते.

कोचिंग संस्थानों को अपनी स्थापना, फैकल्टी (टीचर) और छात्रों को दी जानेवाली हर तरह की सुविधा की जानकारी सार्वजनिक करनी है. पर ये ऐसा करते नहीं. जिला प्रशसान, शिक्षा विभाग समेत अन्य सरकारी एजेंसियां भी चुप ही रहती है.
कोचिंग संस्थानों की लूट कथा की 5वीं कड़ी में हम आपको कोचिंग संस्थानों की उन बातों की जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें आप नहीं जानते हैं.

रांची के कोचिंग संस्थानों से पूछेंगे भी तो वे उन बातों को नहीं बतायेंगे. इस कड़ी में आप यह भी जानेंगे कि कैसे एक कोचिंग इंस्टीट्यूट की शुरुआत होती है. कैसे ये आगे बढ़ते हैं. और किन बातों की जानकारी कोचिंग संस्थानों को सार्वजनिक करनी चाहिए, जो ये नहीं करते हैं.

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ऐसे शुरू होता है कोचिंग का बाजार

कोई भी कोचिंग संस्थान दो तरह से रजिस्ट्रेशन कराता है. पहला होता है प्रॉफिट के लिए. और दूसरा होता है नॉन प्रोफिट के लिए. प्रॉफिट के लिए रजिस्ट्रेशन कराने का सीधा सा मतलब है कि संस्थान केवल बिजनेस करना चाहता है. जो कोचिंग संस्थान प्रॉफिट के नाम पर रजिस्ट्रेशन कराता है, वह फर्म के रूप में या फिर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में रजिस्ट्रेशन करायेगा. जिसका जिक्र वेबसाइट पर करना होता है.

रजिस्ट्रेशन नियमावली के मुताबिक किसी भी संस्थान को अपने वेबसाइट पर कंपनी का नाम, एस्टेब्लिशमेंट डेट, जीएसटी नंबर, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर और वर्क प्रोफाइल आदि की पूरी जानकारी देनी होती है. इतना ही नहीं कंपनी को यह बताना होता है कि वह प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है. कंपनी की ओर से हर साल रजिस्ट्रेशन से संबंधित शपथपत्र सार्वजनिक करना होता है. रांची के सभी कोचिंग संस्थान लिमिटेड कंपनी ही है. पर, वह किसी भी नियम को नहीं मानते हैं.

रजिस्ट्रेशन का दूसरा तरीका सोसाइटी एक्ट के तहत सोसाइटी या ट्रस्ट के रूप में होता है. इस प्रक्रिया से रजिस्टर्ड कोचिंग खुद को बतौर एनजीओ दिखाते हैं. ऐसे कोचिंग संस्थान दिखाते हैं कि वे किसी तरह का लाभ नहीं कमाते हैं. ऐसे कोचिंग संस्थानों को भी पूरी जानकारी वेबसाइट पर देनी होती है. रांची के 80 फीसदी कोचिंग इंस्टीट्यूट उतनी ही जानकारी साझा करते हैं, जिससे छात्र व अभिभावक को गुमराह करने में कामयाबी मिल सके.

कोचिंग संस्थान का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ट्रेड मार्क रजिस्ट्रार ऑफिस, कोलकाता से ट्रेड मार्क लाइसेंस लेने का प्रावधान है. इसके बाद नगर निगम से ऑफिस एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत प्रमाण पत्र हासिल करने के साथ ही कोचिंग का बाजार शुरू हो जाता है.

रांची के कोचिंग सेंटर लूट कथा – इन खबरों को भी पढ़ें-

रांची के कोचिंग सेंटर लूट कथा-01: पढ़ा रहे हैं ऑनलाईन, फीस वसूल रहे ऑफलाईन क्लास के

रांची के कोचिंग सेंटर लूट कथा-02 : जानिये फीस के मामले में किस तरह लूट रहे हैं रांची के कोचिंग संस्थान

रांची के कोचिंग सेंटर लूट कथा-03 : Online पढ़ाने के लिये अनट्रेंड हैं स्थानीय कोचिंग संस्थानों के टीचर

रांची के कोचिंग सेंटर लूट कथा-4 : ऊपर से टिपटॉप, अंदर से मोकामा घाट

वेबसाइट पर ना फैकल्टी की सूचना ना फीस की जानकारी

अब आपको बताते हैं कि कोचिंग संस्थान आपको किन-किन बातों की जानकारी नहीं देते हैं. कंपनी एक्ट के तहत इन्हें यह बताना चाहिये कि उनकी टीम में कौन-कौन हैं. कौन-कौन फैकल्टी उनके यहां बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं. आदर्श स्थिति तो यह होती कि कोचिंग संस्थान फैकल्टी की संख्या, उनकी डिग्री, उनका एक्सपीरिएंस, स्टूडेंट को दी जाने वाली सुविधा, फीस समेत अन्य जानकारी सार्वजनिक करते. पर संस्थान ऐसा नहीं करते. इसकी वजह को समझा जा सकता है.

सीबीएसई की भी गाइडलाइन है कि शैक्षणिक संस्थान अपने वेबसाइट पर फैकल्टी की संख्या, उनकी डिग्री, उनका एक्सपीरिएंस, स्टूडेंट्स को दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी और स्टूडेंट्स की संख्या की जानकारी सार्वजनिक करें.

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ऐसे गुमराह करते हैं रांची के कोचिंग संस्थानों के वेबसाइट

रांची के कोचिंग संस्थान जिन इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं, उनका पैटर्न और सिलेबस सीबीएसई के सिलेबस के अनुसार होता है. मतलब इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्न सीबीएसई 12वीं स्तर के होते हैं. इस कारण रांची के कोचिंग सीबीएसई के मुताबिक पढ़ाई कराते हैं.

लेकिन रांची के कोचिंग संस्थान सीबीएसई के सिलेबस के अलावा सीबीएसई के किसी और गाइडलाइन का पालन नहीं करते हैं. सीबीएसई के मुताबिक शैक्षणिक संस्थानों में साइकोलॉजिकल काउंसलर रखना अनिवार्य है. पर रांची के कोचिंग संस्थानों में साइकोलॉजिकल काउंसलर नहीं होते हैं. इनके यहां जो काउंसलर होते हैं, उनका काम पूछताछ के लिए आये अभिभावकों और स्टूडेंट्स को एडमिशन ले लेने के लिए प्रेरित करना भर है.

रांची के कोचिंग संस्थानों की वेबसाइट पर स्टूडेंट-टिचर रेश्यो नहीं दिया होता है. कोचिंग संस्थान इस बात की भी जानकारी अपने वेबसाइट पर साझा नहीं करते हैं कि उनके यहां से कितने स्टूडेंट्स किस परीक्षा में शामिल हुए. और कितने स्टूडेंट्स का रिजल्ट हुआ है. हां, जब रिजल्ट निकलता है, तो जरूर अखबारों में खबर छपवाते हैं कि उनके यहां से कितने स्टूडेंट किस रैंक में पास हुए. जो फेल कर गये या जिनका रैंक बेहतर नहीं आया, उसकी चर्चा तक नहीं करते.

आप चाहेंगे कि वेबसाइट से कोर्स और कोर्स फीस की जानकारी लें, तो यह भी आपको किसी कोचिंग संस्थान की वेबसाइट पर नहीं मिलेगा. कोचिंग संस्थानों के नैतिक पतन का अंदाजा ऐसे लगा सकते हैं कि ये नामांकन के समय अभिभावक के साथ फीस की बारगेनिंग ऐसे करते हैं जैसे सब्जी विक्रेता करता है.

अभिभावकों को फीस जमा करने में एकमुश्त और इंस्टॉलमेंट का विकल्प देते हैं. जब इंस्टॉलमेंट में फीस जमा की जाती है, तब तो अभिभावकों को पक्की रसीद दी जाती है. स्टॉलमेंट की फीस में किसी तरह की छूट नहीं मिलती है. जब कोई एकमुश्त फीस देने की बात करता है, तब फीस में कई बार पांच से सात हजार रुपये तक कम कर दिया जाता है. लेकिन यह स्पष्ट कह दिया जाता है कि फीस में छूट देने पर पक्की रसीद नहीं मिलेगी.

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