
Ranchi: कोरोना वायरस ने देश-दुनिया पर हर तरीके से प्रभाव डाला है. एक ओर जहां इस बीमारी के कारण विश्व संकट के दौर से गुजर रहा है. हजारों लोगों की जान चली गयी है. देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था संकट में आ गयी है. वहीं इस जानलेवा वायरस ने लोगों के मन पर भी असर डाला है.

कोरोना वायरस के कारण देश में लॉकडाउन है और लोग घरों में रहने को मजबूर है. इस कारण से लोगों में फ्रस्ट्रेशन बढ़ रहा है.
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राज्य में मौजूद दो मनोचिकित्सा संस्थान रिनपास और सीआइपी ने लोगों की मदद के लिए हेल्प लाइन नंबर जारी किये हैं. 27 मार्च से जारी हेल्पलाइन नंबर का लाभ लोग उठा भी रहे हैं. लॉकडाउन के एक सप्ताह हो जाने के बाद से हेल्पलाइन नंबर पर कॉल की संख्या बढ़ गयी है. दोनों जगह लगभग 60 से 70 कॉल हरदिन आ रहे हैं.
लोगों में बढ़ रहा फ्रस्ट्रेशन!
ऑनलाइन काउंसलिंग कर रहे चिकित्सकों के मुताबिक, अभी जितने भी कॉल आ रहे हैं उनमें अधिकांश कॉल फ्रस्ट्रेशन और फोबिया से जुड़े हैं. रिनपास के चिकित्सक डॉ मनीषा किरण के मुताबिक, जीवनचर्या में जो बदलाव आया है उसका असर विशेषकर बुजुर्गों में देखा जा रहा है. कॉल करने वाले अधिकांश कॉलर की उम्र 50 वर्ष या इससे ऊपर होता है. वहीं सीआइपी में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है.
चिकित्सकों की मानें तो कॉलर की बातचीत से यह स्पष्ट पता चलता है कि कॉलर की उम्र या तो अधिक है या फिर वे घर में अकेले रहते हैं. यही वजह है कि फ्रस्ट्रेशन वाले कॉल ज्यादा आ रहे हैं. जहां तक संभव हो रहा है दोनों ही मनोचिकित्सा संस्थान के हेल्पलाइन नंबर से लोगों की मदद की जा रही है.
सीआइपी में दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक लोगों की काउंसलिंग की जा रही है. सीआइपी की ओर से 0651-2451115, 2451119 नंबर जारी किये गये हैं.
ज्यादा सोचने से लोग हो रहे परेशान
रिनपास निदेशक डॉ सुभाष सोरेन कहते हैं कि लोग कोरोना को लेकर ज्यादा सोचने की वजह से परेशान हो रहे हैं. लोगों को इसे सोचने की बिलकुल जरूरत नहीं है. यह परेशानी अस्थायी है, कुछ दिनों में टल जायेगी. उन्होंने यह भी कहा कि एमएनसी के लिए घरों से काम करने वाले लोगों को खुद पर थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है.
ऐसे में परिवार की भूमिका काफी अहम है. सभी को एक-दूसरे की मदद करनी होगी और मिलजुल कर न केवल काम करना होगा, बल्कि एक-दूसरे का मनोरंजन भी करना होगा.
इन बातों का रखें ख्याल
– भर्मित करने वाली सूचनाओं से बचें.
– घबराने की जरूरत नहीं, यह परिस्थिति अस्थायी है.
– ज्यादा सोचने से बचें, यह हमेशा हानिकारक होता है.
– परिवार का सहयोग करें, जिम्मेदारियों का बंटवारा करें.
– घर में रहने की दिनचर्या को रूटीन में ढालें.
– कुछ घंटे मेडिटेशन व एक्सरसाइज जरूर करें.
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