
Ranchi: लॉकडाउन में साइबर अपराधियों ने अपना दायरा बढ़ा दिया है. राजधानी रांची सहित राज्य के कई अन्य जिलों में साइबर अपराध के कई मामले सामने आ चुके हैं. कोई कोरोना राहत के नाम पर ठगी का प्रयास कर रहा है तो कोई कैश बैक के नाम पर.
तेजी से बढ़ रही घटनाओं में पुलिस से भी मदद नहीं मिल पा रही है, क्योंकि पुलिस लॉकडाउन का पालन कराने में लगी है. लॉकडाउन के बीच सामने आयी घटनाओं में सबसे आपदा राहत कोष में पैसे जमा करने और रिचार्ज के नाम पर ठगी के मामले सामने आये है.
इसे भी पढ़ें- सफूरा जरगर का अपराध क्या है? राजनीति की आड़ में क्या यह स्त्रीत्व पर हमला है!
प्रधानमंत्री राहत कोष के नाम पर हो रही ठगी
कोरोना की मार के बीच साइबर अपराधियों ने जेब पर वार करना शुरू कर दिया है. कोरोना की जंग लड़ रहे भारत को बचाने को लेकर पीएम के अपील करते ही बड़े-बड़े लोग दान देने लगे. इससे प्रोत्साहित होकर झारखंड से भी लोग अधिक संख्या में दान देने की कतार में आ गये.
यह साइबर अपराधियों के लिए अच्छा मौका था. वह सक्रिय हो गये और प्रधानमंत्री राहत कोष के नाम पर ठगी का जाल डालने लगे. गृह मंत्रालय ने भी ऐसी घटनाओं को लेकर अगाह किया, लेकिन इसके बाद भी असर नहीं पड़ा. इसी दौरान बीते 13 अप्रैल को हजारीबाग में तीन युवकों को पीएम राहत कोष के नाम पर ठगी करते हुए गिरफ्तार किया गया. इन युवकों द्वारा कोरोना पीड़ितों के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष (पीएम केयर्स) के नाम पर 200 से अधिक लोगों से 51 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया था.
सोशल मीडिया व अन्य वेबसाइटों से लोगों पर नजर रखते हैं अपराधी
साइबर अपराधी फेसबुक और सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म व वेबसाइटों से लोगों पर नजर रखते हैं. कोरोना के नाम पर गूगल पे-फोने, यूपीआइ, पीएम रिलीफ फंड और अन्य अप्रत्याशित और असाधारण शातिर तरीकों से ठगी की जा रही है. कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के दौरान ठगी करने वाले भी सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक सक्रिय हो गये हैं.
इसे भी पढ़ें- चीन से दुनिया नाराज है, कंपनियां भारत आना चाहेंगी, तो क्या हम तैयार हैं ?
ऐसे बरतें सावधानी
– पीएम केयर या अन्य किसी कोष में दान के लिए सरकार की वेबसाइट का इस्तेमाल करें.
– फंड ट्रांसफर करने से पहले जिसे पैसा देना है, उसके बारे में जान लें.
– किसी भी ई-कॉमर्स साइट पर अपने कार्ड की डिटेल कभी सेव नहीं करें.
– कोरोना के नाम पर आए किसी भी अनजाने ई-मेल पर अपना सेंसेटिव इंफॉर्मेशन नहीं शेयर करें.
– कोरोना वायरस से संबंधित किसी भी खबर पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें.
– हमेशा अपने विश्वसनीय स्रोत से तथ्य साझा करें.
– लगे कि आपके साथ किसी भी प्रकार की ठगी की कोशिश हुई तो तुरंत पुलिस को सूचना दें.
हाल के दिनों में हुए साइबर ठगी के मामले
5 मई: गुमला जिला ग्रामीण विकास अभिकरण कार्यालय में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के प्रशिक्षण समन्वयक चंद्रशेखर यादव के बैंक खाता से साइबर अपराधियों ने सोमवार की शाम 22 हजार रुपये उड़ा लिए. यादव के लिखित शिकायत पर गुमला थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
6 मई: रांची में साइबर अपराधियों ने रिम्स के डॉक्टर डॉ मनोज के फेसबुक अकाउंट को हैककर वहां से सारी सूचनाएं और फोटो ले ली. फिर डॉ मनोज के ही नाम से फेक फेसबुक अकाउंट बनाकर आर्थिक मदद के नाम पर 15 हजार रुपये की ठगी कर ली.
13 अप्रैल: 13 अप्रैल को हजारीबाग में तीन युवकों को पीएम राहत कोष के नाम पर ठगी करते हुए गिरफ्तार किया गया. इन युवकों द्वारा कोरोना पीड़ितों के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष (पीएम केयर्स) के नाम पर 200 से अधिक लोगों से 51 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया था.
15 अप्रैल: सरायकेला-खरसावां जिला के आदित्यपुर थाना क्षेत्र का है. जहां गम्हरिया आदर्श नगर निवासी अमर सिंह के खाते से साइबर अपराधियों ने 35 हजार रुपये की निकासी कर ली है. अमर सिंह का एसबीआइ में अकाउंट है. इस संबंध में अमर सिंह ने बताया कि जब वे पूरे मामले को लेकर बैंक पहुंचे, तो बैंक की ओर से उन्हें बताया गया कि आपके एटीएम का क्लोनिंग कर नोएडा से रुपया निकला है.
इसे भी पढ़ें- #Twitter पर क्यों ट्रेंड कर रहा #गद्दार_मोदी_लुटेरा_है और #पप्पू_तो_गद्दार_है




