
Koderma: कोरोना महामारी के कारण हजारों मजदूर झारखंड लौटे हैं. राज्य में कई जिले ऐसे है जहां पर हजारों की संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों मे काम करने के लिए जाते है. इसमे कोडरमा भी एक है.
यहां हजारों की संख्या में लोग दिल्ली, मुंबई, सूरत, पुणे, हैदराबाद आदि शहरों से काम बंद होने के कारण और महामारी की चिन्ता से गांव लौटे है. इन मजदूरों को घर पर लौटने पर काम की चिंता सता रही है.
अभी प्रशासन रेड जोन से आये प्रवासी मजदूरों को इन्स्टीट्यूशनल क्वारेन्टाइन में रख रहा है. सभी को ससमय और गुणवत्तायुक्त खाना उपलब्ध कराने का निर्देश उपायुक्त ने सभी क्वारन्टाइन सेंटर के प्रभारी पदाधिकारियों को दिया है.
इसी के तहत एक पहल कोडरमा उपायुक्त रमेश घोलप द्वारा की गयी है. दूसरे राज्यों से लौटे होटल में काम करने का अनुभव रखने वाले लोगों को चिन्हित कर प्रशासन की तरफ से ‘श्रमिक सम्मान किचन’ की शुरुआत की गयी है.
पहले चरण में कुल 6 व्यक्तियों को इस कार्य में लगाया है. उनके द्वारा सुबह शाम 300-300 लोगों का खाना बनाया जा रहा है. बड़े होटलों में काम किये हुए कुशल कुक के द्वारा खाना बनाये जाने के कारण उसकी गुणवत्ता भी अच्छी है.
खाना प्रशासन के वाहनों द्वारा क्वारन्टाइन सेंटर तक पहुंचाया जायेगा. उपायुक्त ने इसकी गुणवत्ता देखी. काम मिलने के कारण जहां एक तरफ सभी लोगों के चेहरे पर मुस्कान थी, दूसरी तरफ प्रशासन के सभी पदाधिकारी भी इस पहल से संतुष्टि का अनुभव कर रहे थे.
ये सभी 6 लोग दिल्ली के होटलों मे काम करते थे. सभी ने वापस लौटने पर क्वारेन्टाइन अवधि पूरी की है. उपायुक्त ने सभी से बात कर उनकी जानकारी ली और हौसला बढ़ाया.
इसे भी पढ़ें – #FightAgainstCorona : झारखंड में सिर्फ 7 दिन में बढ़ गये 100 कोरोना पॉजिटिव, पहले एक सौ में लगे थे 29 दिन
ये है डीसी की योजना
उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के समय आपने कितने कष्ट झेले हैं, आपको इसका एहसास है. अभी मेरे जिले के जो श्रमिक बंधु क्वारेन्टाइन में रह रहे हैं वे कष्ट झेलकर यहां पहुंचे हैं.
उपायुक्त ने कहा कि यह शुरुआत की गयी है. अगले कुछ दिनों में और कुशल श्रमिकों को चिन्हित कर बाकी क्वारेन्टाइन सेंटर में भी श्रमिकों को रोजगार देकर ही खाना देने का प्रयास जिला प्रशासन करेगा.
राज्य सरकार के दिशानिर्देशानुसार कोडरमा जिला प्रशासन ऐसे सभी मजदूरों को उनके स्किल के अनुसार काम देने की तैयारी में जुटा है. गांव में बाहर से लौटे हर एक प्रवासी मजदूर का डाटा, वह कुशल है या अकुशल और यदि कुशल है तो उसकी कुशलता किस काम में है, इसका डाटा संकलित किया जा रहा है.
जेजे कॉलेज स्थित सेंटर में मनरेगा में कार्य करने के इच्छुक श्रमिकों के डाटा संकलन हेतु एक डेस्क भी अलग से स्थापित किया गया है.
इसे भी पढ़ें – #बोले_झारखंड: किसी ने कहा odd/even के तहत खुलें दुकानें, तो किसी ने की सोशल डिस्टेंसिंग की वकालत
अकुशल मजदूरों को गांव में रोजगार दिलाने की कोशिश
अकुशल मजदूरों को गांव में ही काम उपलब्ध कराने की दिशा में उपायुक्त द्वारा सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को मनरेगा के अंतर्गत पर्याप्त संख्या में हर एक गांव मे योजनाओं का चयन और शुरुआत करने के निर्देश दिये गये हैं. ताकि क्वारन्टाइन अवधि पूर्ण होने के पश्चात सबको उसी गांव में काम दिया जा सके.
इसी अवधि में काम करने के इच्छुक सभी के जॉब कार्ड बनाने का भी निर्देश दिया गया है. बुधवार को उपायुक्त ने जिले के व्यवसायी, चेम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स के पदाधिकारी, माइनिंग और क्रशर उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में बाहर से लौटे श्रमिकों को उनकी क्षमता एवं कुशलता के अनुसार काम देने का आवाहन किया था.
इसे भी पढ़ें – अच्छी खबर : स्टेट टिशू एंड ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन की होगी स्थापना, नहीं लगाने होंगे मरीजों को कार्यालयों के चक्कर




