
Ranchi: लॉक डाउन की चुनौती से जूझ रहे गढ़वा के 21 मजदूर ओडिशा से जगन्नाथपुर (पश्चिमी सिंहभूम) पैदल ही पहुंचे थे.
गढ़वा विधायक सह राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर को जैसे ही खबर मिली, उन्होंने जगन्नाथपुर एसडीओ के माध्यम से मजदूरों के लिए समुचित व्यवस्था करने को कहा.
मंत्री की पहल पर उनके खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था की गयी. साथ ही मेडिकल जांच के बाद उनके गांव वापस भेजने की भी योजना बनायी गयी है.
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रेलवे लाइन के सहारे ओड़िशा से जगन्नाथपुर का सफ़र किया पूरा
गढ़वा के नगरउंटारी के रहने वाले सभी 21 श्रमिक डेढ़ सालों से ओड़िशा में जोड़ा के खड़बंध माइंस (टिस्को) टीपीएल के अंदर काम करते हैं.
ये सभी कारपेंटर, पेंटर, हैंडलूम का काम करके जीवन यापन कर रहे हैं. मजदूरों के अनुसार वे लोग ठेकेदार बबलू पाल के यहां काम करते थे. मैनेजर ने मजदूरों को कह दिया कि कंपनी घाटे में चल रही है.
ऐसे में उनके अभी घर वापसी की व्यवस्था उसके स्तर से संभव भी नहीं. आप लोगों को जैसे भी जाना है, अपने तरीके से वापस जायें. पैसे का भी संकट उनके सामने खड़ा हो गया था.
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पैसे नहीं थे, पैदल चल पड़े
ख़त्म होते पैसे और ठहरने की कोई सुरक्षित गुंजाइश ना देखकर वे सभी लोग पैदल ही गढ़वा स्थित अपने घरों को लौटने को पैदल ही निकल पड़े.
रेलवे लाइन के किनारे-किनारे होते हुए वे सभी जगन्नाथपुर (पश्चिम सिंहभूम) तक पहुंच गये. श्रमिकों के मुताबिक वे सभी 27 मार्च को शाम 5 बजे वहां से निकले थे. रात भर पैदल चलकर करीब 12 बजे रात में जगन्नाथपुर पहुंचे.
डागुवापोसी में मालगाड़ी में बैठकर आने की योजना थी लेकिन आरपीएफ ने उन्हें उतार दिया था. मंत्री मिथिलेश ठाकुर की पहल पर जगन्नाथपुर में राहत मिल सकी. अब वे अपने घरों को गाड़ी से वापस जा सकेंगे.
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