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विभागों में निलंबित करने और निलंबन मुक्त करने के लिए काम करती है लॉबी

अधिकारियों, कर्मियों से वसूली जाती है मोटी रकम, वर्क्स, नन वर्क्स, सभी विभागों में धड़ल्ले से चल रहा है यह खेल

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आरोप सेक्शन के अधिकतर कर्मी इससे हो रहे हैं लाभांवित

Deepak

Ranchi : झारखंड में निलंबित करने और फिर निलंबन मुक्त करने की कार्रवाई एक सुनियोजित धंधे के रूप में विकसित हो रही है. राज्य के वर्क्स, नन वर्क्स डिपार्टमेंट में हो रहे इस कृत्य में कई सफेदपोश और उनकी पूरी लॉबी शामिल है. सूत्रों के अनुसार एक निलंबित अधिकारी, कर्मी से लॉबी की तरफ से मोटी रकम ली जाती है. वर्क्स डिपार्टमेंट में निलंबन मुक्त करने की कार्रवाई के लिए अधिक पैसे लिए जाते हैं. जबकि नन वर्क्स विभाग में यह रकम थोड़ी कम है. राज्य में आये दिन हल्का कर्मचारी, सीओ, बीडीओ, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता, अधीक्षण अभियंता, पुलिस कर्मी और अन्य पर आरोप लगते रहते हैं और उन पर कार्रवाई भी होती रहती है. बाद में एक नीयत अवधि के बाद इन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया जाता है.

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आवश्यक कार्रवाई करने के लिए आरोप सेक्शन है गठित

सभी विभागों में अधिकारियों, कर्मचारियों के उपर लगनेवाले गंभीर आरोप, वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से संबंधित मामलों की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए आरोप सेक्शन गठित है. विभाग में आरोप सेक्शन के मुखिया संबंधित विभाग के उप सचिव तथा संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी होते हैं. इनके अधीन सहायक, प्रशाखा पदाधिकारी, लिपिक स्तर की टीम होती है. उप सचिव और संयुक्त सचिव ही विभागीय सचिव का हस्ताक्षर लेकर अधिकारी अथवा कर्मचारी को निलंबित करने और विभागीय कार्यवाही संचालित करने और बाद में निलंबन मुक्त करने की अधिसूचना, कार्यालय आदेश जारी करते हैं.

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सात महीने में निलंबन मुक्त हो जाते हैं अधिकारी, कर्मी

अमूमन इस खेल में सात महीने के भीतर आरोपी अधिकारी और कर्मी निलंबन मुक्त हो जाते हैं. पहले किसी भी आवेदन के आधार पर अधिकारी से स्पष्टीकरण की मांग की जाती है. स्पष्टीकरण के आधार पर सरकारी सेवक आचार नियमावली, पीडब्ल्यूडी कोड और वित्त नियामावली का उल्लंघन करने का आरोप लगा कर प्रथम दृष्टया सभी तथ्यों को सही मान लिया जाता है. इसके एवज में विभाग के संयुक्त सचिव अधिकारी और कर्मी को निलंबित कर देते हैं और विभागीय कार्यवाही संचालित करते हुए प्रपत्र-क गठित कर देते हैं. इतना ही नहीं निलंबित अधिकारी, कर्मी को झारखंड सरकारी सेवक नियमावली 2016 के तहत किसी खास जगह पर योगदान देने को कहा जाता है.

इतना ही नहीं निलंबन की अवधि तक अधिकारी, कर्मी को जीवन निर्वाह भत्ता सरकार की तरफ से मिलता रहता है. विभागीय कार्यवाही और प्रपत्र ‘क’ गठित होने के बाद जांच अधिकारी की रिपोर्ट आने पर विभागीय मंत्री की सहमति लेते हुए अधिकारी या कर्मी को निलंबन मुक्त कर दिया जाता है.

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संयुक्त सचिव अभय नंदन अंबष्ठ  हैं सबसे मजबूत

उदाहरण के तौर पर पेयजल और स्वच्छता विभाग में दो दर्जन से अधिक अभियंताओं पर ऐसी कार्रवाई चल रही है. इसमें कनीय अभियंता से लेकर कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता स्तर के अधिकारी शामिल हैं. संयुक्त सचिव अभय नंदन अंबष्ठ की तरफ से सभी तरह के पत्राचार और अधिसूचना जारी की जाती है.

विभाग में इन्हें सबसे अधिक ताकतवर माना जाता है. ये पिछले छह साल से विभाग में जमे हैं. कमोबेश यही स्थिति जल संसाधन, पथ निर्माण विभाग, वन पर्यावरण और पारीस्थिकीय संतुलन, श्रम नियोजन और प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक-प्रशासनिक और राजभाषा सुधार विभाग, गृह विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, ग्रामीण विकास, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, भवन निर्माण, कृषि और पशुपालन, स्वास्थ्य विभाग की भी है. यहां पर भी यह धंधा काफी फल-फूल रहा है.

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