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18 साल बाद भी अधर में झारखंड-बिहार के बीच 2584 करोड़ की पेंशन देनदारी, कई राउंड बैठकों के बाद भी नतीजा सिफर

दोनों सरकार अपने कैडर के कर्मियों के पेंशन का भुगतान तो कर रही हैं, पर 2584 करोड़ की देनदारी अब तक नहीं सुलझी

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Ravi Aditya

Ranchi: तेनुघाट मामले की तरह झारखंड-बिहार के बीच पेंशन की देनदारी अब तक नहीं सुलझ पायी है. कुल 2584 करोड़ की देनदारी का मामला लंबित है. राज्य गठन के 18 साल बाद भी इस मसले पर कोई हल नहीं निकल पाया है. दोनों राज्यों के मुख्य सचिव व वित्त सचिव के बीच इस मसले को लेकर कई राउंड की बैठकें भी हो चुकी हैं, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा.

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अफसरों सहित 1000 कर्मियों का मामला भी शामिल

इसमें 25 आईएएस 265 राज्य प्रशासनिक सेवा सहित 1000 कर्मियों का मामला भी शामिल है. इसमें झारखंड सरकार का तर्क है कि पेंशन का बंटवारा कर्मचारियों की संख्या के आधार पर किया जाना चाहिये ना कि जनसंख्या के आधार पर. हालांकि दोनों सरकारे अपने-अपने तकरार पर अड़ी हुई हैं.

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कहां फंसा है पेंच, भारत सरकार का क्या है फॉर्मूला

भारत सरकार ने पेंशन देनदारी के लिये जो फॉर्मूला बताया है, उसके अनुसार 15 नवंबर 2011 के पहले जो कर्मचारी बिहार में थे, वे बिहार से ही पेंशन लेंगे. जो झारखंड में आ गये, वे झारखंड से ही पेंशन लेंगे. झारखंड सरकार भारत सरकार के फॉर्मूले पर अड़ी है, जबकि बिहार सरकार का कहना है कि इसमें शेयर का बंटवारा होना चाहिये.

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राज्य पुनर्गठन के समय क्या बना था नियम

राज्य पुनर्गठन के समय नियम बना था कि दोनों राज्यों के बीच पेंशन का जो बंटवारा होगा, वह जनसंख्या के आधार पर होगा. लेकिन भारत सरकार के फॉर्मूले के बाद झारखंड सरकार इस नियम को मानने के लिये तैयार नहीं है. हालांकि बिहार सरकार ने इसपर अब तक कोई पहल नहीं की है.

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