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लातेहार : सदर हस्पताल में 2018 में 23 एड्स पीड़ित पाये गये, 2015 से अब तक रोगियों की संख्या 52

Manoj  Dutt Dev

Latehar : लातेहार सदर हस्पताल में 2015 से अब तक इलाज करने पहुंचे कुल 21158 रोगियों में 52 रोगी एड्स रोग से पीड़ित पाये गये हैं. हालांकि लातेहार में सबसे कम एड्स के रोगी की पहचान हुई है, मगर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. पीड़ित व्यक्ति सामाजिक लज्जा के कारण बीमारी को छुपा रहे हैं और समुचित सुविधा नहीं ले रहे हैं .

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 2018 में रोगियों की संख्या बढ़ी

ज्ञात हो कि वर्ष 2015 में कुल 4246 लोगों ने एड्स का जांच करवायी, जिसमें 8 व्यक्ति एड्स रोगी पाये गाये. वर्ष 2016 में 3897 लोगों ने एड्स की जांच करवायी जिसमें मात्र एक व्यक्ति ही एड्स पीड़ित पाया गया. वर्ष 2017 में कुल 4897 लोगों ने जांच करवायी, जिसमो कुल चार एड्स पीड़ित पाये गाये. 2018 में कुल 5937 लोगों ने जांच करवायी, जिसमे कुल 23 रोगी एड्स पीड़ित पाये गाये. 2019 में अब तक 2181 लोगों ने एड्स की जांच करवायी, जिसमो दो रोगी एड्स रोग से पीड़ित पाये गाये.

सामाजिक लज्जा के कारण पीड़ित नहीं लेते सरकारी सुविधा

सदर एड्स विभाग के मुकेश प्रसाद ने बताया कि एड्स पीड़ित को प्रति माह एक हज़ार रुपया खाते में भेजा जाता है. दवा सदर से मुफ्त में दी जाती है. प्रधान मंत्री आवास योजना में प्राथमिकता दी जाती है. सरकारी राशन दिया जाता है. यदि पीड़ित का राशन कार्ड नहीं है, तो उसका राशन कार्ड बनवा कर उसे राशन मुहैया कराया जाता है. पीड़ित की बीमारी का इलाज निशुल्क है. कई सुविधाएं दिये जाने का प्रावधान है मगर वे सामाजिक लज्जा के कारण लाभ नहीं लेते हैं .

 सिविल सर्जन से फोन काटा!

जब लातेहार सिविल सर्जन एसपी शर्मा से फोन पर पूछा गया कि सर एड्स जागरूकता के लिए किस तरह का प्रयास किया जा रहा है, सवाल सुनते ही उन्होंने फोन काट दिया. उसके बाद उनका मोबाईल नेटवर्क क्षेत्र से बाहर बताने लगा. ज्ञात हो कि जिले में हर वर्ष मात्र एक दिन एक दिसंबर एड्स दिवस पर ही एड्स जागरूकता का प्रचार प्रसार पूरे तामझाम के साथ किया जाता है. अन्य दिनोंमें  कभी जागरूकता अभियान नहीं चलाया जाता. जिसका नतीजा है कि पीड़ित अपनी बीमारी को छुपाता है. सरकारी सुविधा नहीं लेता है और असमय इलाज के अभाव में उसकी मृत्यु हो जाती है.

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