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भाजपा, जेएमएम और झाविमो के अध्यक्षों की डूबी नैया, गिलुआ, शिबू और बाबूलाल हुये चित

Ranchi : जनता जब अपना फैसला सुनाती है तो बड़ी से बड़ी हस्तियों की भी नहीं चलती. वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते. झारखंड में इसी तरह का फैसला जनता ने दो क्षेत्रीय दलों के केंद्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय पार्टी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ सुनाया है.

जनता के इस फैसले से झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन और झाविमो के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की नैया अब डूबती नजर आ रही है.

संताल में कभी शिबू सोरेन की एक आवाज पर लोग खड़े हो जाते थे, लेकिन आज परिस्थिति बदल गई. शिबू सोरेन किसी भी राउंड में अपने निकटम प्रतिद्वंदी भाजपा उम्मीदवार सुनील सोरेन के खिलाफ बढ़त नहीं बना पाये. हर राउंड में वे पिछड़ते ही रहे. अब तो कयास यह भी लगाया जा रहा है कि संताल में शिबू युग अब समाप्ति की ओर है.

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प्रदेश के पहले सीएम बाबूलाल भी चारों खाने चित

झाविमो के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का भी इस चुनाव में चारों खाने चित होता नजर आया. राजद से भाजपा में शामिल हुई अन्नपूर्णा देवी ने कोडरमा में पासा ही पलट दिया. कोडरमा का यह चुनाव परिणाम कई मामलों में बाबूलाल के राजनीतिक भविष्य को भी तय करेगा. वे लगातार चुनाव हारने का भी रिकॉर्ड बनाते चले जा रहे हैं.

इस चुनाव में भी बाबूलाल किसी भी राउंड में बढ़त नहीं बना पाये. अंतर भी बढ़कर चार लाख से उपर हो गया. जहां भाजपा उम्मीदवार को सात लाख से अधिक वोट मिले, वहीं बाबूलाल मरांडी लगभग तीन लाख वोट में ही थम गये. यह प्रदर्शन उनके राजनीतिक भविष्य में क्या असर डालेगा, यह आने वाला समय ही बतायेगा.

अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ का भी रहा यही हाल

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ का भी यही हाल रहा. वे अपने निकटम प्रतिद्वंदी कांग्रेस की गीता कोड़ा के खिलाफ किसी भी राउंड में बढ़त नहीं बना सके.

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लगातार वे पिछड़ते ही चले गये. कभी वे 50 हजार वोट से पिछड़े तो कभी अंतर बढ़कर 60 हजार तक पहुंचा. गिलुआ का यह प्रदर्शन उनके राजनीतिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उन पर सभी की नजरें टिकी हुई थीं.

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