
Anuj Tiwary
Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य के नौ लाख किसानों की कर्ज माफी का एलान किया है, मगर मुसीबत यह है कि इनमें से आधे करीब 4.5 लाख किसान मिल ही नहीं रहे हैं. माना जा रहा है कि ये वैसे किसान हैं, जिन्होंने कर्ज लेकर झारखंड में खेती की. फिर कमाने के लिए दूसरे राज्य चले गये. इनके नहीं मिलने से कृषि विभाग की बेचैनी बढ़ गयी है. विभाग ऐसे किसानों का पता लगाने में जुटा है.
बता दें कि कर्ज माफी की प्रक्रिया की गति धीमी रहने के कारण पहले ही एक हजार करोड़ रुपए की राशि दूसरे विभागों में ट्रांसफर कर दी गयी है. इससे विभाग के कार्य पर भी सवाल उठ रहा है. किसानों को ढूंढ़ने निकले बैंक व प्रज्ञा केंद्र के कर्मी जब उनके घरों तक पहुंचते हैं तो पता चलता है कि वे दूसरे राज्य कमाने के लिए गए हुए हैं. ये अब खरीफ फसल की खेती के वक्त ही लौटेंगे.
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कृषि निदेशक निशा उरांव बताती हैं कि जब आधे किसान राज्य में है ही नहीं, तो उनसे आवेदन कैसे भरवाया जाए. वे इतने दक्ष भी नहीं है कि दूसरी जगह रहकर ऑनलाइन आवेदन भर सकें. हालांकि, विभाग ने ऑनलाइन आवेदन भरवाने के लिए विभिन्न स्तर पर कर्मचारियों को लगा रखा है, लेकिन जो फीडबैक आ रहे हैं वो निराशाजनक है. अब उनके वापस लौटने का इंतजार करना होगा. उन्होंने बताया कि फिलहाल 25 करोड़ रुपए कर्जमाफी का काम 4400 किसानों के बीच किया जा रहा है. यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है.
मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि अब कर्ज माफी का आधा काम जून तक हो सकेगा. यानी अगले वित्तीय वर्ष में जून तक आधे किसानों का कर्ज माफ हो पाएगा. मानसून तक जब दूसरे राज्यों से किसान लौटेंगे, तब उनसे औपचारिकताएं पूरी कराकर उनके ऋण माप किये जायेंगे. पता चला है कि विभाग की ओर से सरकार को नौ लाख किसानों की सूची उपलब्ध करा दी गई है.
इसके अतिरिक्त भी राज्य में चार लाख ऋणधारी किसान हैं, जिनके ऋण की कर्ज माफी नहीं की जा रही है. ये वैसे किसान हैं जो कहीं न कहीं डिफाल्टर पाये गये हैं. बताया जा रहा है कि इन किसानों के कर्ज माफ करने पर मंथन के बाद इस पर फैसला लिया जायेगा.
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