
Kolkata : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “आयुष्मान भारत” के मुकाबले ममता बनर्जी सरकार “स्वास्थ्य साथी” योजना पर फोकस करेगी. पार्टी इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लेने जा रही है. आंकड़ों के जरिए स्वास्थ्य साथी को आयुष्मान भारत से बेहतर बताने की कोशिश की जायेगी. इस बारे में पार्टी की ओर से एक बयान जारी किया गया है.
जिसमें दावा किया गया है कि केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत की तुलना में बंगाल सरकार की स्वास्थ साथी चिकित्सा बीमा योजना अधिक लोगों के अनुकूल है. स्वास्थ साथी योजना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सोच का परिणाम है. 30 दिसंबर 2016 को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा इसे लॉन्च किया गया था. जबकि आयुष्मान भारत को उसके बाद लागू किया गया है.
तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि आयुष्मान भारत के लिए केंद्र सरकार केवल 60 फीसदी धनराशि का आवंटन करती है. जबकि स्वास्थ्य साथी योजना राज्य सरकार की अपनी योजना है. और इसकी पूरी राशि राज्य सरकार वहन करती है.
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क्या है स्वास्थ्य साथी योजना
स्वास्थ्य साथी योजना के तहत राज्यभर में अब तक डेढ़ करोड़ लोगों को पंजीकृत किया जा चुका है. जबकि आयुष्मान भारत का लक्ष्य महज 1.12 करोड लोग थे. स्वास्थ्य साथी के तहत पंजीकृत लोगों को मुफ्त में स्मार्ट कार्ड दिया जाता है जिससे किसी भी अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया तत्काल शुरू हो जाती है.
लेकिन आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकृत लोगों के पास ऐसा कोई कार्ड नहीं होता जिससे इलाज प्रक्रिया काफी धीमी होती है. आयुष्मान भारत के तहत पंजीकृत लोगों को केंद्र सरकार की ओर से एक पोस्टकार्ड नुमा दस्तावेज दिया जाता है जिसके लिए प्रति व्यक्ति 30 रुपये वसूले जाते हैं. प्रत्येक परिवार में पांच लोगों को पंजीकृत किया जाना है.
इस तरह से एक परिवार से 150 रुपये लिये जाते हैं. जबकि स्वास्थ्य साथी में ऐसी कोई फीस नहीं ली जाती. इसके अलावा स्वास्थ्य साथी का कार्ड परिवार की महिला सदस्य के नाम पर रहता है जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है.
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