
Ranchi: राज्य कर उपायुक्त, दक्षिणी अंचल, रांची की ओर से एक लेटर जारी किया गया है. इसमें उद्यमियों के लिये एक सूचना जारी की गयी है. कहा गया है कि कारोबारियों, उद्यमियों को बिजली विभाग की ओर से 10 केवीए तक का कनेक्शन मुहैया कराया गया है. अगर कोई इससे अधिक का डीजी सेट का उपयोग करता है तो उसे झारखंड इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी (एमेंडमेंट) एक्ट 2011 का पालन करना होगा. विद्युत शुल्क अधिनियम 2011 की धारा 04 के अंतर्गत बिजली शुल्क चुकाने होंगे. 30 सितंबर, 2021 तक अंगीकृत बिहार विद्युत शुल्क एक्ट के अंतर्गत निबंधन प्राप्त कर शुल्क का भुगतान ब्याज सहित करें. अन्यथा नियमानुसार अर्थ दंड लगाया जायेगा. राजस्व हित में एकतरफा शुल्क निर्धारण भी किया जा सकता है.
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उद्योग,निवेश, रोजगार पर असर
सांसद महेश पोद्दार ने ऐसे फैसलों से असहमति जतायी है. कहा है कि इस तरह के निर्णय पर कहा जाता है- “जबरा मारे और रोने भी न दे.” एक तो राज्य सरकार उद्यमियों, कारोबारियों को निर्बाध और क्वालिटी बिजली नहीं दे रही. ऊपर से उद्यमी बेचारा प्रोडक्शन कंटिन्यू रखने के लिए डीजल जनरेटर चलाये तो शुल्क भी लेंगे. देरी होने पर ब्याज भी लिया जायेगा. राज्य सरकार एक और दावा करती है कि वह राज्य में उद्योग-निवेश-रोजगार बढ़ाएगी. पर दूसरी ओर सरकार के ऐसे फैसलों से उसके दावों की कलई खुल जाती है. ऐसी स्थितियों में न तो उद्यमी प्रोत्साहित होंगे और ना ही निवेश और रोजगार के मसले पर राज्य आगे बढ़ सकेगा.




