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जानिये क्यों बॉलीवुड एक्टर शशि कपूर को TAXI  कह कर बुलाते थे उनके परिवार के लोग

जन्मदिन पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : शशि कपूर बॉलीवुड के सबसे हैंडसम हीरो कहे जा सकते हैं. शशि को उनके बड़े भाई राजकपूर ने आग (1948) और आवारा (1951) में छोटी सी भूमिकाएं देकर फिल्मी सफर शुरू कराया था. आवारा में उन्होंने राजकपूर के बचपन का रोल किया था. 1950 के दशक मे पिता की सलाह पर वे गोद्फ्रे कैंडल के थियेटर ग्रुप शेक्स्पियाराना से जुड़ गए. इसके साथ उन्होंने दुनिया भर में यात्राएं कर नाटक किए. इसी दौरान गोद्फ्रे की बेटी और ब्रिटिश अभिनेत्री जेनिफर से उनको प्रेम हुआ. 20 वर्ष की उम्र में 1950 में उन्होंने विवाह कर लिया.

धर्मपुत्र से फिल्मी सफर हुआ शुरू

शशि कपूर ने गैर परम्परागत किस्म की भूमिकाओं के साथ सिनेमा के परदे पर आगाज किया था. उन्होंने सांप्रदायिक दंगों पर आधारित धर्मपुत्र (1961) में काम किया था. वे हिंदी सिनेमा के पहले ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने हाउसहोल्डर, हीट एंड डस्ट और शेक्सपियर वाला जैसी अंग्रेजी फि़ल्मो में मुख्य भूमिकाएं निभाई.

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जब जब फूल खिले से महका करियर

वर्ष 1965 उनकी फि़ल्म जब जब फूल खिले रिलीज हुई. इस फिल्म में उन्होंने एक कश्मीरी गाईड का रोल किया था. उसे एक अमीर टूरिस्ट युवती से प्रेम हो जाता है. इस फिल्म के गीत काफी लोकप्रिय हुए हुए थे जैसे एक था बुल और एक थी बुलबुल …यह उनकी पहली सिल्वर जुबली फिल्म थी. इसी फिल्म का रिमेक आमीर खान की राजा हिंदुस्तानी थी.

इसके बाद बीआर चोपड़ा द्वारा बनाई गई भारत की पहली मल्टी स्टारर फि़ल्म वक्त में उन्हें काम मिला. प्यार का मौसम ने उन्हें एक चॉकलेटी हीरो के रूप में स्थापित किया. वर्ष 1972 की फि़ल्म सिद्धार्थ के साथ उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय सिनेमा के मंच पर अपनी मौजूदगी कायम रखी.

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70 के दशक में सबसे व्यस्त एक्टर में थे शुमार

70 के दशक में शशि कपूर सबसे सफल अभिनेताओं में से एक थे. उनकी चोर मचाये शोर, दीवार, कभी – कभी, दूसरा आदमी और सत्यम शिवम् सुन्दरम जैसी हिट फि़ल्में रिलीज हुई. शशि इतने अधिक व्यस्त रहते थे कि राज कपूर उनको टैक्सी कहते थे. वे कहते थे कि शशि इतनी अधिक फिल्में करते हैं कि टैक्सी की तरह मेहनताना देकर उन्हें कोई भी अपनी फिल्म में साइन कर सकता है. यह बात ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला में लिखी है.

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अमिताभ बच्चन के सबसे हिट व फिट जोड़ीदार

कभी कभी से अमिताभ बच्चन के साथ शशि कपूर की जोड़ी शुरू हुई. यह काफी अच्छी और हिट फिल्म थी. शशि कपूर अपने चुलबुले रोल के लिए हमेशा याद किए जाएंगे. दीवार में अमिताभ और शशि की जोड़ी ने फिर से कमाल कर दिया.इसमें शशि का एक डायलॉग बहुत लोकप्रिय हुआ था मेरे पास मां…इसके बाद त्रिशूल,सुहाग, नमक हलाल,काला पत्थर शान व सिलसिला सहित कई फिल्मों में इस जोड़ी ने अपनी बेहतरीन केमेस्ट्री दिखाई.

शशि कपूर को उनकी फिल्म न्यू देलही टाइम्स, कलियुग, उत्सव और सत्यम शिवम सुंदर के लिए याद किया जाता है.

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पृथ्वी थियेटर को पुनर्जीवित किया

वर्ष 1971 में पिता पृथ्वीराज की मृत्यु के बाद शशि कपूर ने जेनिफर के साथ मिलकर पिता के स्वप्न को जारी रखने के लिए मुंबई में पृथ्वी थियेटर का पुनरूथान किया. उन्होंने अपनी फिल्म निर्माण कंपनी भी शुरू की. उसके बैनर तले भी कई यादगार फिल्में बनाई गईं जैसे 36 चौरंगी लेन, कलियुग, जुनून, विजेता, उत्सव . जुनून शशि कपूर की बेहतरीन फिल्म थी. जुनून को 1979 में बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवार्ड मिला था. 1986 में न्यू देल्ही टाइम्स के लिए शशि को बेस्ट एक्टर का नेशनल अवार्ड हासिल हुआ. 1994 में मुहाफिज फिल्म के लिए स्पेशल ज्यूरी अवार्ड मिला.

फिल्मों का सर्वोच्च दादा साहेब पुरस्कार मिला

शशि कपूर को फिल्मों के लिए दिया जानेवाला सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भी दिया गया. जब भी हिंदी सिनेमा के सुंदर और रोमांटिक हीरो का जिक्र होगा आएगा शशि जरूर याद आएंगे.

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