
Naveen Sharma
Ranchi : पश्चिम बंगाल में होनेवाले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपना पूरा जोर लगा रही है. मोदी-शाह की जोड़ी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने के लिए हर तरह का दांवपेंच आजमा रही है. इसका ताजा उदाहरण आज नजर आया जब बॉलीवुड एक्टर मिथुन चक्रवर्ती ने कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में हुई रैली में भाजपा का भगवा झंडा थाम लिया. दरअसल भाजपा को बंगाल के चुनाव में जिस बड़े बंगाली चेहरे की तलाश थी आज वो कुछ हद तक पूरी हो गई है.
भाजपा के दिग्गज नेताओं ने तो भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को भी अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए काफी मशक्कत की थी. इसके बाद भी बीसीसीआइ अध्यक्ष सौरव सक्रिय राजनीति के मैदान में खुलमखुला उतरने औऱ भगवा खेमे का हिस्सा बनने से हिचकिचा रहे हैं.
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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने की थी पहल
खैर, सौरव भले ही ना तैयार हुए हों लेकिन भाजपा को कभी ममता दीदी की पार्टी से राज्यसभा में इंट्री मारनेवाले मिथुन चक्रवर्ती को अपनी पार्टी में शामिल कराने में सफलता मिली है. दरअसल मिथुन चक्रवर्ती को भाजपा में शामिल कराने में RSS प्रमुख मोहन भागवत की अहम भूमिका रही है. भागवत ने बकायदा कुछ दिनों पहले मिथुन से उनके घर पर जाकर मुलाकात की थी. इसी के बाद से मिथुन के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गयी थीं. आज उन अटकलों पर विराम लग गया और मिथुन आखिरकार भगवा रंग में रंग गये.
बंगाल के लिए मिथुन दा की अहमियत हर कोई जानता है. वे एक बड़े क्राउड पुलर हैं. 90 के दशक में उनकी दर्जनों फिल्में सुपरहिट रही थीं. अपनी फिल्मों में करप्शन, शोषण और अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले नायक का किरदार निभाने वाले मिथुन चक्रवर्ती अब एक बार फिर असल जिंदगी में सक्रिय राजनीति में आ रहे हैं.
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जवानी के दिनों में वामपंथी विचारों से थे प्रभावित
कभी वामपंथ के मंच पर दिखने वाले मिथुन का भगवा खेमे में आना सबसे बड़ा यू टर्न है. गौरांग चक्रवर्ती नाम के बच्चे का जन्म 16 जून 1952 को हुआ था. यही गौरांग बाद में मिथुन चक्रवर्ती के नाम से मशहूर हुआ. यह बात अब कम लोग जानते हैं कि मिथुन फिल्म उद्योग में प्रवेश करने से पहले वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे. वे नक्सल आंदोलन में शामिल भी रहे थे. इसी दौर में इनके भाई की मौत करंट लगने से हो गयी थी. इसके बाद मिथुन अपने परिवार में लौट आये और नक्सली आन्दोलन से खुद को अलग कर लिया.
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पहली फिल्म मृगया में जीता था नेशनल अवार्ड

मिथुन उन रेयर अभिनेताओं में शुमार हैं जिनको पहली ही फिल्म में ही नेशनल अवार्ड मिला. 1976 में निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म में मिथुन को लीड रोल करने का मौका मिला था. इत्तेफाक देखिये की इस फिल्म में मिथुन को एक नक्सली का ही रोल मिला था. इस फिल्म के लिए इनका अभिनय सराहा गया और मिथुन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का नेशनल अवार्ड दिया गया.
80 और 90 के दशक में मिथुन का था जलवा

1980 के दशक में मिथुन का बॉलीवुड में जलवा था. इस सुनहरे दौर में वे एक डांसिंग स्टार के रूप में काफी फेमस हुए थे. 1982 में रीलीज हुई फिल्म डिस्को डांसर के बाद से तो मिथुन छा गये.उस दौर में इस फिल्म के गीतों आई एम ए डिस्को डांसर देश के करोड़ों युवा डांस करते थे. मिथुन ने 350 से अधिक हिंदी फिल्मों में अभिनय किया है. इसके अलावा उन्होंने बांगला, भोजपुरी और ओड़िया फिल्मों में भी काम किया था. मिथुन अभी मोनार्क ग्रुप के मालिक भी हैं जो होस्पिटालिटी सेक्टर में काम करती है.
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जासूसी और एक्शन फिल्मों के स्टार
मिथुन की पहचान जासूसी और एक्शन फिल्मों से बनी थी. इन फिल्मों में सुरक्षा (1979), हम पांच (1980) और वारदात (1981) कसम पैदा करनेवाले की (1984) और डांस डांस (1987) आदि थीं. वांटेड (1983), बॉक्सर (1984), जागीर (1984), जाल (1986), वतन के रखवाले (1987), कमांडो (1988), वक्त की आवाज़ (1988), गुरु (1989), मुजरिम (1989) और दुश्मन (1990) जैसी फिल्मों में उन्हें एक एक्शन हीरो के रूप में मान्यता प्राप्त हुई.
1980 के दशक के मध्य में मिथुन इतने लोकप्रिय हो गये थे कि उन्हें अमिताभ बच्चन के एक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाने लगा, क्योंकि उन्होंने दर्जनों एक्शन और ड्रामा से भरपूर फिल्में की जिससे उनकी छवि एंग्री यंगमैन की बनी जो समाज की बुराइयों और भ्रष्टाचार से लड़ता है.
रोमांटिक और पारिवारिक ड्रामा फिल्में भी हिट हुईं

मिथुन को रोमांटिक और पारिवारिक ड्रामा फिल्मों में भी सफलता मिली थी. मुझे इन्साफ चाहिए (1983), प्यार झुकता नहीं (1985), स्वर्ग से सुन्दर (1986), प्यार का मंदिर (1988) आदि फिल्मों की गिनती आज भी उनकी सबसे सफल व्यावसायिक फिल्मों में होती है.
प्रेम संबंधों की कहानी
मिथुन चक्रवर्ती का 1986 से 1987 तक बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी के साथ नाम जुड़ा था. इन दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया था. ऐसा कहा जाता है कि श्रीदेवी ने मिथुन से अपना संबंध तब ख़त्म कर दिया जब उन्हें पता चला कि उनका अपनी पहली पत्नी और पूर्व अभिनेत्री योगिता बाली से तलाक नहीं हुआ है. मिथुन के योगिता से चार बच्चे हैं. बड़ा बेटा मिमो चक्रवर्ती है जिसने 2008 में बॉलीवुड फिल्म जिमी से अपने अभिनय जीवन की शुरुआत की थी. दूसरा बेटा रिमो चक्रवर्ती ने भी एक फिल्म फिर कभी में छोटे मिथुन की भूमिका में अभिनय किया था. अन्य दो बच्चे नमाशी चक्रवर्ती और दिशानी चक्रवर्ती अभी पढाई कर रहे हैं.
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TMC की टिकट पर बने थे राज्यसभा सदस्य बने
मिथुन फरवरी, 2014 में राज्यसभा सदस्य बने थे. राज्यसभा में मिथुन की बेहद कम उपस्थिति पर भी लगातार सवाल उठते रहे थे. फरवरी, 2014 में सदस्यता ग्रहण करने के बाद मिथुन ने सिर्फ 3 दिन ही राज्यसभा में उपस्थिति दर्ज कराई है. इसके बाद इन्होंने अपना स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था.

शारदा चिटफंड घोटाले में आया था नाम
इससे पहले जब मिथुन का नाम करोड़ों रुपये के शारदा चिटफंड घोटाले में आया था, तब भी उनकी राज्यसभा छोड़ने की खबरें सामने आई थीं. हालांकि, तब मिथुन ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया, बल्कि उन्होंने फर्म से मिले पैसों को ईडी के हवाले कर दिया था.
पुरस्कार और सम्मान
1976 – सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मृगया के लिए
1993 – सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार ताहादेर कथा के लिए
1996 – सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार स्वामी विवेकानंद के लिए
फिल्मफेयर पुरस्कार
1990 – सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार अग्निपथ के लिए
1995 – सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जल्लाद के लिए.




