
Ranchi: कोरोना महामारी ने शिक्षा पर गहरा असर डाला है. खासकर गरीब तबके के 44.4 फीसदी से अधिक ऐसे बच्चे हैं जिन्हें मोबाइल पर पढ़ाई के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है. ज्ञान विज्ञान समिति, झारखंड ने राज्य के 17 जिलों के 115 प्रखंडों की 602 पंचायतों के 877 गांवों में फरवरी-मार्च के दौरान बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा पर प्रभाव के अध्ययन के लिये एक सर्वे कराया था.
समिति के राष्ट्रीय महासचिव डॉ काशीनाथ चटर्जी ने आज रांची स्थित कार्यालय में सर्वे रिपोर्ट को जारी किया. साथ ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 800 से अधिक गांवों में 662 वोलेंटियर 5118 घरों तक गये थे. सर्वे के दौरान पाया गया कि राज्य के 93.6 फीसदी बच्चों के पास मोबाइल फोन ही नहीं है. इनमें से 35.1% अपने माता-पिता के मोबाइल से, 4.5 फीसदी भाई के फोन से, 5 फीसदी रिश्तेदारों के मोबाइल से और 44.8 फीसदी को तो मोबाइल पर पढ़ाई की सुविधा होने के बारे में कुछ पता तक नहीं था. कॉन्फ्रेंस में समिति के राज्य महासचिव विश्वनाथ सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष शिव शंकर प्रसाद सहित अन्य भी उपस्थित थे.

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काशीनाथ चटर्जी के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकार कोविड पीरियड में बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने को ऑनलाइन शिक्षा पर जोर देती रही. मोबाइल इंटरनेट और दूरदर्शन के माध्यम से पढ़ाई को प्रोत्साहित किये जाने की खूब बातं् हुईं. पर हकीकत कड़वी है. इसकी सच्चाई जानने को सर्वे किया गया. सर्वे के क्रम में खूंटी, गिरिडीह, चतरा, दुमका, धनबाद, पलामू, बोकारो, रांची, रामगढ़, लातेहार, लोहरदगा, साहेबगंज, गढ़वा, जामताड़ा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, गोड्डा, देवघर और सरायकेला खरसावां के गांवों में डिजिटल शिक्षा की हकीकत को परखा गया.
5000 से अधिक घरों में किये गये सर्वे में 85.9 अभिभावकों को पता ही नहीं कि टीवी के माध्यम से पढ़ाई भी होती है. 84 फीसदी के घरों में डीटीएच या केबल कनेक्शन चालू हालत में नहीं था. 97.1 फीसदी अभिभावक मानते हैं कि उनके बच्चे टीवी पर पढ़ाई नहीं करते. टीवी के जरिये पढ़ाई करने वाले बच्चों में से 72.5 फीसदी के अभिभावकों ने माना कि वे बच्चे की निगरानी नहीं कर पाते. 25.1 फीसदी के मुताबिक बच्चे पढ़ते समय इंटरटेनमेंट चैनल देखने लगते हैं. काशीनाथ ने कहा कि वे रिपोर्ट और जरूरी सुझावों के साथ सरकार से मिलेंगे.
लर्निंग सेंटरों से लाभ
विश्वनाथ सिंह ने बताया कि खेत खलिहानों में सामुदायिक शिक्षण केंद्र की शुरूआत समिति की ओर से की गयी थी. समुदाय के सहयोग से 5 सितंबर 2021 को फिर स्कूल चलें अभियान की शुरूआत की गयी. इसमें यूनिसेफ की भी मदद मिली. खोले गये सामुदायिक लर्निंग सेंटरों में 91 फीसदी से अधिक बच्चे उपस्थित हो रहे हैं. पिछले 7 माह में इन सेंटरों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. बच्चों में सीखने, जानने, पढ़ने की ललक दिखी है. शिव शंकर प्रसाद ने कहा कि डिजिटल शिक्षा फिजिकल शिक्षा की जगह नहीं ले सकती. बगैर शिक्षकों, मेंटर के बिना लाख कोशिश कर ली जाये, ऑनलाईन पढ़ाई से शिक्षा की बुनियाद खड़ी करना चैलेंज है.
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