
Khunti: हनुख कंडुलना ने अपने विक्षिप्त भाई के इलाज के लिए अपनी सारी जमीनें बंधक रखकर पैसे कमाने उत्तराखंड के चमोली गया था. दिवंगत हनुख का लक्ष्य था कि वह अच्छे पैसे कमाकर घर लौटेगा, तो उन पैसों से अपने भाई नीरेन की इलाज करायेगा. लेकिन अब हनुख कंडुलना ही नहीं रहा.
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हिमस्खलन से मौत के आगोश में समाये बलंगकेल निवासी मृतक हनुख कंडुलना की मौत के बाद पूरा गांव इस चिंता में डुबा है कि अब उसके एकलौते विक्षिप्त भाई का क्या होगा. बता दें कि हनुख का भाई नीरेन कंडुलना विक्षिप्त है.
बक्से के अंदर सोता है नीरेनः
उसने अपने ही घर के छप्पर को उजाड़ दिया है. उसने घर के छप्पर के खपड़ों को फेंकना शुरू किया. गांव के लोगों ने मना किया, तो उसने कहा कि वह काम कर रहा है. वह खपड़ों को फेंकता रहा. जब लोगों ने खाना खाने को कहा तो उसने कहा कि अभी काम कर रहा है, उसे फुर्सत नहीं है. रात को नीरेन बेड पर नहीं घर के अंदर रखे बक्से के अंदर सोता है.
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गांव की महिलाऐं खाना दे देतीं हैं, तो खाता है, अन्यथा भूखा रह जाता है. नीरेन की एक बहन भी है, जिसे देखते ही वह मारने दौड़ता है, जिसके कारण वह उसके सामने नहीं आती.
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