
Ranchi: राजधानी के कांटाटोली में 1260 मीटर का फ्लाईओवर बनना था. जुलाई 2016 में अप्रुव हुए इस प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा कर लिया जाना था. पर चार साल हो जाने के बाद भी यह डीपीआर के खेल में ही फंसा हुआ है.
इस पूरे प्रोजेक्ट का मूल डीपीआर मेकॉन ने तैयार किया था जिसका बजट 192 करोड़ था. उसके बाद इसमें दो बार संशोधित डीपीआर तैयार किया गया. दोनों संशोधित डीपीआर को अप्रूवल भी मिल गया. इसका रिवाइज्ड एस्टिमेट 257. 49 करोड़ रुपये का तैयार हुआ था, जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली थी.
इसके बाद तीसरी बार भी डीपीआर तैयार किया जा रहा था, पर वर्तमान की सरकार ने इस परियोजना को विस्तार देने की बात कर दी है. मतलब फिर से इस पूरी परियोजना का नया डीपीआर तैयार किया जायेगा.
अब इस परियोजना को 1260 मीटर से बढ़ाकर 2300 मीटर किया जायेगा. वर्तमान की इस परियोजना का मूल बजट 192 करोड़ का था जिसे अब बढ़ाया जायेगा. मतलब जहां इस पूरे प्रोजेक्ट को 2018 में पूरा कर लिया जाना था, वह अब भी डीपीआर तक ही सिमटा है. वर्तमान की सरकार ने कहा कि यह परियोजना अब दूसरे संवेदक से नये सिरे से पूरी करायी जायेगी.
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2017 में किया गया था कार्य आवंटित
कांटाटोली फ्लाईओवर के लिये कैबिनेट ने 2016 में अप्रूवल दिया था. 2017 में इसके लिए काम आवंटित किया गया. पर भूअर्जन के कारण काम चालू नहीं हो सका था. मई 2018 में भूअर्जन का काम पूरा हो गया.
जून 2018 में भूअर्जन से क्लीयरेंस दे दिया गया. इस हिसाब से जून 2020 तक कांटाटोली फ्लाईओवर बनकर तैयार हो जाना चाहिए था. अब इस परियोजना में विस्तार होना है जिसके बाद इसके मूल बजट में भी बदलाव होगा.
19 खंभों में दो पाइल कैप और एक पीयर की हो चुकी है कास्टिंग
वर्तमान में कांटाटोली फ्लाईओवर का निर्माण बहुबाजार की ओर वाईएमसीए से लेकर कोकर की ओर शांतिनगर तक हो रहा था. जिसकी लंबाई 1260 मीटर थी. अब तक 132 पाइल की कास्टिंग हो चुकी है. 19 खंभों में दो पाइल कैप और एक पीयर की कास्टिंग हो चुकी है.
योगदा सत्संग से फ्लाईओवर का निर्माण कराये जाने से फ्लाईओवर की लंबाई लगभग 2300 मीटर हो जायेगी. कांटाटोली फ्लाई ओवर का निर्माण अब नये सिरे से होगा. फ्लाई ओवर कांटाटोली मार्ग पर योगदा सत्संग के सामने से शांतिनगर तक बनाया जाएगा.
नये सिरे से फ्लाईओवर निर्माण के लिए संशोधित डीपीआर बनाया जायेगा. इसके लिए विस्तृत कार्य प्रतिवेदन (डीपीआर) एवं परियोजना प्रबंधन परामर्शी (पीएमसी) बहाल करने के लिए टेंडर निकाला गया था, जिसमें दो कंपनियां शामिल हुई हैं. दोनों कंपनियों के कागजात का तकनीकी मूल्यांकन कराया जा रहा है. जल्द ही वित्तीय बीड का भी मूल्यांकन करा कर निविदा में योग्य आने वाली को कार्य आवंटित कर दिया जायेगा.
दो से तीन महीने का समय डीपीआर बनाने के लिए दिया जायेगा. डीपीआर बन जाने के बाद फ्लाई ओवर बनाने के लिए नए सिरे से संवेदक कंपनी का चयन करने के लिए निविदा निकाली जायेगी. इसमें चयनित कंपनी को फ्लाईओवर बनाने का ठेका दिया जायेगा.
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मॉडर्न टेक्नोलॉजी से बनेगा फ्लाईओवर
फ्लाईओवर का निर्माण आधुनिक तकनीक सेगमेंटल बॉक्स गरडर सिस्टम से कराया जायेगा. नयी तकनीकी के आधार पर संशोधित डिजाइन और डीपीआर भी बनेगा.
वर्तमान में कांटाटोली फ्लाईओवर का निर्माण पीएससीआइ गरडर प्रणाली से हो रहा था. पीएससी प्रणाली में गरडर को प्रीकास्ट कर क्रेन के सहयोग से खंभे पर रखा जाता है. अमूमन इस प्रणाली में रात में काम होता. डेक स्लैब की कास्टिंग कार्य स्थल पर ही होती है. यातायात भी प्रभावित होती रहती है. जबकि सेगमेंटल बॉक्स प्रणाली में प्रस्तावित फ्लाईओवर के मध्य लाइन पर विशेष लांचर के जरिये छोटे प्रीकास्ट सेगमेंट कर आगे बढ़ाया जाता है.
इस आधुनिक प्रणाली का इस्तेमाल बड़े शहरों में हो रहा है. इस सिस्टम में काम तेज होता है. हालांकि यह कुछ महंगा पड़ता है. इस प्रणाली में यातायात बाधित नहीं होती है.
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