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JSACS निदेशक राजीव रंजन पर वित्तीय अनियमितता का आरोप, दो सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

पैसों के लेनदेन से संबंधित कई ऑडियो क्लिप्स सामने आए, जांच के लिए मुख्य सचिव ने बनायी कमिटी

Ranchi :  झारखंड राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी के परियोजना निदेशक राजीव रंजन पर एड्स कंट्रोल सोसाइटी में वित्तीय अनियमितताओं, नियुक्तियों में मनमानी तथा एनजीओ चयन में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं. इन आरोपों के मद्देनजर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने जांच के आदेश दे दिए. मुख्य सचिव के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग के सचिव केके सोन ने दो सदस्यीय उच्चस्तरीय कमिटी बनायी है. कमिटी में स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव विद्यानंद झा पंकज और उप सचिव राजेश कुमार शामिल हैं.

 

कमेटी के सदस्यों को आदेश दिया गया है कि वे झारखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति की उन सभी फाइलों की जांच करें, जब से राजीव रंजन ने यहां पदभार संभाला है. एड्स कंट्रोल सोसाइटी में बड़ी संख्या में गैर सरकारी संगठनों का चयन किया जाता है और उन्हें पैसे दिए जाते हैं ताकि वे राज्य में एड्स के प्रचार प्रसार और एड्स मरीजों के हित में कार्य करें.

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पता चला है कि पिछले 12-13 वर्षों से कार्यरत एनजीओ को इस बार राजीव रंजन ने हटाते हुए नए एनजीओ का चयन कर लिया है. इन पर आरोप है कि उन्होंने इस एनजीओ के चयन में मनमानी की और जिन लोगों ने पैसे ऑफर किए उन्हें काम मिला और जिन्होंने पैसे देने से मना कर दिया उन्हें हटा दिया गया. इस संबंध में पैसों के लेनदेन वाले कई ऑडियो क्लिप्स भी सामने आए हैं.

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NACO के गाइडलाइंस का उल्लंघन कर की गई नियुक्तियां

इन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने हाल ही में हुई नियुक्तियों में भी भारी गड़बड़ी की है. ऐसे लोगों को रख लिया गया है जिनके पास विज्ञापन के अनुसार ना तो पूरी डिग्री है ना ही पद के लिए जरूरी अनुभव. नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) की सभी गाइडलाइंस का उल्लंघन कर ये नियुक्तियां की गई हैं.

 

बगैर अनुमोदन खर्च की राशि

यह सोसाइटी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा दिए गए फंड से पूरी तरह से संचालित होती है. यहां दस लाख रुपए से अधिक खर्च करने के लिए विभागीय सचिव का अनुमोदन आवश्यक है. यह भी आरोप है कि इन्होंने बिना अनुमोदन लिए ही सारे खर्चे किये हैं. आरोप यह भी है कि नियमों का उल्लंघन कर TRY नामक एक एनजीओ को एक करोड़ से अधिक रुपये प्रचार-प्रसार के लिए आवंटित किया गया है. साथ ही सोशल मीडिया एजेंसी का चयन कर उसे भी लाखों रुपए का भुगतान कर दिया गया है.

 

सोसाइटी में तीन  डॉक्टरों को छोड़ कर सभी कार्यरत कर्मी अनुबंध पर नियुक्त होते हैं. इनका सभी कर्मियों से व्यवहार बेहद बुरा रहता है. हमेशा कर्मियों को भला-बुरा कहना, सेवा से मुक्त करने की धमकी देते हैं और इसी धमकी की आड़ में सारे गलत काम करने का दवाब बनाते हैं. इसके अलावा ऑफिस की लड़कियों पर भी इनकी गलत नजर रहती है, लेकिन नौकरी खोने के डर से इनके खिलाफ कोई शिकायत करने की हिम्मत नहीं करता.

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