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JREDA : जिस अफसर के दस्तखत से हुआ टेंडर, उसी ने की टेंडर घोटाले की जांच

JREDA में भ्रष्टाचार और उसे ढंकने का खेल

Chhaya

Ranchi : JREDA यानी झारखंड रिन्यूएबल डेवलपमेंट एजेंसी में भ्रष्टाचार और उसकी जांच की कहानी भी बड़ी विचित्र है. JREDA के पूर्व निदेशक निरंजन कुमार के खिलाफ जांच चल रही है. आरोप टेंडर में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का है. ऊर्जा विभाग ने इन आरोपों की जांच के लिए जो कमेटी बनायी, उनमें एक ऐसे अफसर भी शामिल रहे जिनकी इन टेंडरों के निष्पादन में भूमिका रही. ये हैं जीएम कांट्रैक्ट एंड मैटेरियल अमर नायक. हैरानी की बात यह कि ओहदे में जूनियर होकर भी उन्होंने अपने सीनियर अफसर के खिलाफ टेंडर घोटाले की जांच कैसे की? और वह भी तब, जब वह खुद भी इन टेंडरों के डिपार्टमेंटल प्रोसेस में शामिल थे.

2019 में बनी थी जांच कमेटी, अब एसीबी कर रही जांच

निरंजन कुमार साल 2015 से फरवरी 2019 तक ज्रेडा के निदेशक रहे. इसी दौरान वह ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड में एमडी पद पर भी रहे. अमर नायक जीएम कांट्रैक्ट एंड मैटेरियल के रूप में उनके मातहत अफसर थे. अमर नायक आज भी इसी पद पर हैं. निरंजन कुमार के कार्यकाल में जो टेंडर निकाले गये, उनका प्रकाशन जीएम कांट्रैक्ट एंड मैटेरियल के पदनाम से किया गया. बाद में इन टेंडरों में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी के आरोप लगे तो ऊर्जा विभाग ने इसकी जांच के लिए 2019 में एक कमेटी बना दी. उस वक्त विभागीय सचिव एल. ख्यांग्ते थे. कमेटी को एमडी निरंजन कुमार समेत अन्य दो अधिकारियों पर जांच का निर्देश दिया गया. इस कमेटी में ऊर्जा विभाग की संयुक्त सचिव संगीता तिर्की, तत्कालीन ज्रेडा निदेशक विजय कुमार और ऊर्जा संचरण के जीएम कांट्रैक्ट एंड मैटेरियल अमर नायक रहें.कमेटी ने मामले की जांच भी कर ली. अब इसी कमिटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसीबी जांच कर रही है.

विभाग को बताया नहीं कि अपने ही सीनियर के खिलाफ कर रहे जांच

सबसे हैरत की बात यह कि जिन टेंडरों में गड़बड़ी की जांच ऊर्जा विभाग की कमेटी ने की, उन टेंडरों का निष्पादन करने में जीएम कांट्रेक्ट एंड मैटेरियल रहते हुए अमर नायक की भी भूमिका रही. यहां तक कि टेंडरों की नोटिस भी इनके नाम से निकाले जाते है. ऊर्जा  संचरण की टेंडर इवॉल्यूशन कमेटी में भी अमर नायक है. ऐसे में सारे टेंडरों को अमर नायक खुद देखते थे. फिर भी ऊर्जा विभाग ने इन्हें निरंजन कुमार के खिलाफ जांच कमेटी में शामिल किया. सरकारी नियमों की मानें तो अगर किसी वरीय अधिकारी पर जांच कमेटी गठित होती है, और अगर उनके अधीन कार्यरत अधिकारी को जांच कमेटी में शामिल किया जाता है, तो उक्त अधिकारी की ओर से विभाग को इसकी जानकारी दी जानी चाहिये. अमर नायक ने ये जानकारी ऊर्जा विभाग को नहीं दी और कमेटी में शामिल होते हुए रिपोर्ट बनायी.

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2018 में एसीबी में गया मामला

एसीबी की ओर से पूर्व निदेशक निरंजन कुमार, पूर्व ज्रेडा परियोजना निदेशक अरविंद कुमार बलदेव प्रसाद और पूर्व ज्रेडा एग्जीक्यूटिव इंजीनियर श्रीराम सिंह के खिलाफ जांच की जा रही है. बता दें ऊर्जा विभाग में साल 2018 में भी इस मामले पर शिकायत की गयी थी. तत्कालीन ऊर्जा सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने इस पर जांच की. इसके बाद मामला एसीबी पहुंचा. एसीबी ने ऊर्जा विभाग से मामला दर्ज करने के लिये विभागीय मंतव्य मांगा. साथ ही विभाग को जांच रिपोर्ट भेजी गयी, जिसके बाद ऊर्जा विभाग ने तीनों आरोपितों से पक्ष मांगा और कमेटी गठित की. कमेटी ने रिपोर्ट मंत्रिमंडल निगरानी को दी, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने कार्रवाई पर सहमति दी.

क्या हैं निरंजन कुमार पर आरोप

निरंजन कुमार पर 170 करोड़ रूपये के गड़बड़ी का आरोप है. जिसकी जांच एसीबी कर रही है. ज्रेडा निदेशक के पद पर होने के साथ ही निरंजन कुमार ऊर्जा संचरण निगम के एमडी भी थे. ऐसे में दोनों की कंपनियों में टेंडरों और फर्जी बैंक गारंटी वाली कंपनियों को काम देने का आरेाप है. इनके कार्यकाल में एजेंसियों की ओर से जमा किये गये बैंक गारंटियों की कभी जांच नहीं की गयी.

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