
Rahul Guru
Ranchi : अपने स्थापना काल से अब तक जिस झारखंड लोकसेवा आयोग को 21 सिविल सेवा परीक्षा ले लेनी चाहिए थी, उसने अब तक मात्र 6 सिविल सेवा परीक्षा ली है. लेकिन छह सिविल सेवा परीक्षा में एक भी ऐसी परीक्षा नहीं है जो विवादों में न आयी हो.
आयोग की ओर से ली गयी परीक्षाओं की विडंबना रही है कि परीक्षाओं का जारी परिणाम कुछ न कुछ वजहों से विवादों में रहा है. पीटी हो या मेन्स, हर सिविल सेवा परीक्षा में कुछ न कुछ गड़बड़ी हुई.
ऐसी गड़बडि़यों से एक तरफ जेपीएससी की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं तो दूसरी तरफ कई कैंडिडेट्स के अरमानों को भी गहरा झटका लगा है. विवादों में रही सिविल सेवा परीक्षाओं पर एक नज़र …..
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पहली सिविल सेवा परीक्षा
जेपीएससी की ओर से पहली सिविल सेवा परीक्षा के लिए साल 2002 के दिसंबर महीने में विज्ञापन निकाला गया था. विज्ञापन 64 पदों के लिए निकाला गया था. इसकी प्रारंभिक परीक्षा 17 अगस्त 2003 को हुई.
परीक्षा में करीब 80 हजार कैंडिडेट्स शामिल हुए. पीटी के परिणाम में 5245 उम्मीदवार सफल घोषित किये गये. पीटी रिजल्ट घोषित होने के साथ ही विवाद गहरा गया. इस वजह से पीटी को रद्द कर दिया गया.
दूसरी बार पीटी 18 जनवरी 2004 को ली गयी. जिसका रिजल्ट 27 अप्रैल 2004 को जारी हुआ. इसमें सफल उम्मीदवारों की संख्या बढ़ कर 9488 हो गयी. इसी परीक्षा के मेन्स एग्जाम के रिजल्ट पर भी सवाल उठा.
नियम के हिसाब से 92 उम्मीदवारों को लिए इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना था, पर मेन्स में 246 सफल उम्मीदवारों की लिस्ट आयोग ने जारी कर दी. इस परीक्षा प्रक्रिया की जांच सीबीआइ कर रही है.
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दूसरी सिविल सेवा परीक्षा
यह परीक्षा 175 पदों के लिए ली गयी थी. दूसरी सिविल सेवा परीक्षा के मेन्स एग्जाम का रिजल्ट 9 अक्टूबर 2007 को जारी किया गया.
मेन्स में क्वालिफाई करनेवाले कैंडिडेट्स तैयारियों में जुटे थे कि आयोग ने मेन्स का एडिशनल रिजल्ट जारी कर दिया. इस परीक्षा में उत्तर पुस्तिका में हेरफेर का आरोप लगा.
एडिशनल रिजल्ट जारी होने से करीब 250 और कैंडिडेट्स को इंटरव्यू के लिए कॉल लेटर भेजा गया. इस तरह इंटरव्यू देनेवाले कैंडिडेट्स की संख्या काफी बढ़ गयी. आयोग द्वारा मेन्स का एडिशनल रिजल्ट जारी करना भी विवादों को जन्म दे गया.
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तीसरी सिविल सेवा
तीसरी सिविल सेवा का विवाद संशोधित मेरिट का है. आयोग ने 23 सितंबर 2012 को अंतिम परिणाम जारी किया. यह परिणाम विवादों में आ गया. जिसके बाद आयोग ने संशोधित मेरिट लिस्ट निकाल दी.
पहली मेरिट लिस्ट में शामिल सात कैंडिडेट्स दूसरी बार असफल घोषित कर दिये गये. सात नये अभ्यर्थियों को मेरिट लिस्ट में जगह मिल गयी. इस तरह सात कैंडिडेट्स के हाथों में आयी नौकरी छिन गयी.
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चौथी सिविल सेवा परीक्षा
30 जनवरी 2011 को चौथी सिविल सेवा परीक्षा की पीटी का रिजल्ट जारी करते ही हंगामा शुरू हो गया. पीटी में 2194 कैंडिडेट्स सफल हुए थे, लेकिन स्केलिंग सिस्टम से जारी रिजल्ट में गड़बड़ी के मद्देनजर आयोग ने रिवाइज्ड रिजल्ट निकाला. सफल कैंडिडेट्स की संख्या बढ़ कर 3285 हो गयी.
फिर भी विवाद होता रहा. ऐसे में जेपीएससी को तीसरी दफा रिजल्ट जारी करना पड़ा. इस बार 3513 सफल उम्मीदवारों में जहां 239 नये उम्मीदवार थे तो जो 80 कैंडिडेट्स पहले पास हुए थे, इस बार फेल कर गये.
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पांचवी सिविल सेवा परीक्षा
5 दिसंबर 2013 को हुई पीटी में 3898 कैंडिडेट्स सफल घोषित हुए. ये कैंडिडेट्स तैयारी कर ही रहे थे कि रिजल्ट में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किये जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया.
तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अगले आदेश तक मेन्स एग्जाम पर रोक लगा दी. पीटी कैंसिल होगा या रिवाइज्ड रिजल्ट निकलेगा, इस पर एक साल तक सस्पेंस बना रहा.
आखिरकार रघुवर सरकार ने जब कमान संभाली तो मेन्स एग्जाम पर लगी रोक हटा ली गयी. इसके बाद परीक्षा की प्रक्रिया पूरी की गयी.
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