
Ranchi: आज झारखंड हाईकोर्ट में दो अहम मामलों की सुनवाई होने की उम्मीद है. इसमें पहला जेपीएससी की छठी सिविल सेवा परीक्षा का मामला है. वहीं दूसरा मामला आवास खाली कराने के आदेश के खिलाफ विधायक नवीन जयसवाल की ओर से दाखिल याचिका का है.
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छठी सिविल सेवा परीक्षा की विसंगतियां का है मामला
जेपीएससी की छठी सिविल सेवा परीक्षा की विसंगतियां पर कोर्ट को ध्यान आकृष्ट कराया गया है. मिनिमम क्वालिफाइंग पेपर और प्रत्येक पेपर में 40 प्रतिशत अंक का पालन नहीं करने के साथ-साथ विज्ञापन के विरुद्ध मेधा सूची जारी करने इत्यादि को लेकर बरती गई अनियमितता की जानकारी न्यायालय को दी है. इस मामले को लेकर सफल 326 अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाया गया है. जिसमें पीड़ित छात्र नियुक्ति रद्द करने की मांग लगातार कर रहे है.
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नवीन जायसवाल की याचिका पर सरकार से पूछा था आवास आवंटित करने का क्या है आधार
नवीन जायसवाल ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ में याचिका दाखिल की है. यह याचिका चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा था कि राज्य में विधायक और मंत्रियों को आवास आवंटित करने का आधार क्या है? इन लोगों को किस आधार पर आवास आवंटित किये जाते है? इसकी रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाए.
नवीन का आरोप वरियता का नहीं रखा गया ध्यान
दरअसल नवीन जायसवाल ने अपनी याचिका में कहा है कि सरकार ने आवास आवंटन करने में वरीयता का ख्याल नहीं रखा है. मनमाने ढंग से आवास का आवंटन किया गया है. इसी मामले में एकल पीठ ने यह स्पष्ट किया था कि राज्य में विधायक व मंत्रियों को आवास आवंटित करने के लिए नियमावली नहीं होने के चलते आवास आवंटन में पारदर्शिता नहीं है.
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