
Ranchi: 6ठी जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के फाइनल रिजल्ट में हुए विवाद की मूल वजह जेपीएससी का अपने ही सिलेबस और विज्ञापन को नहीं मानना है.
विवाद की मूल वजह के संबंध में विरोध कर रहे उम्मीदवारों ने बताया कि जेपीएससी ने मुख्य परीक्षा के पेपर एक (क्वालिफाइंग पेपर) के प्राप्तांक को मुख्य एवं अंतिम परीक्षाफल में शामिल कर अंतिम मेधा सूची प्रकाशित किया गया है. जो विज्ञापन और सिलेबस की नियमावली के विरुद्ध है.
मुख्य परीक्षा के पेपर 1 में 50 अंक का हिंदी और 50 अंक कर अंग्रेजी शामिल है. विज्ञापन में इस बात का उल्लेख है कि पेपर एक क्वालिफाइंग है जिसमें हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों को मिलाकर 30 अंक लाना है.
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क्या है विज्ञापन में
विज्ञापन में इसे जिस तरह से लिखा गया है वह This paper is qualifying which 30 marks is mandatory है. विज्ञापन में भी इसी बात का जिक्र है. विज्ञापन में लिखा गया है कि सिलेबस के सभी पेपर की विस्तृत जानकारी अलग से जेपीएससी की वेबसाइट https://www.jpsc.gov.in पर उपलब्ध है.
जेपीएससी की वेबसाइट पर जो सिलेबस दिया गया है उसमें साफ-साफ उल्लेखित है कि मुख्य परीक्षा का पेपर 1 सिर्फ क्वालिफाइंग है और इसमें प्रत्येक उम्मीदवार को केवल 30 अंक लाना है.
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस पेपर में अंग्रेजी के 50 अंक शामिल किये जाने से हिंदी एवं क्षेत्रीय भाषा की पृष्ठभूमि के छात्रों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा.
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पहली से पांचवीं परीक्षा तक क्वालिफाइंग पेपर को नहीं किया है शामिल
विज्ञापन और सिलेबस की यह व्याख्या स्पष्ट करती है कि पेपर 1 का प्राप्तांक मेधासूची में शामिल नहीं किया जायेगा. अर्थात सिलेबस में यह व्याख्या इस बात के लिए पर्याप्त है कि पेपर 1 केवल क्वालिफाइंग है.
पहली जेपीएससी से लेकर पांचवीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तक में क्वालिफाइंग पेपर को शामिल नहीं किया गया है. इसके अलावा इस रिजल्ट में सेवा के आवंटन में अनेक अनियमितताएं बरती गयी. साथ ही प्रत्येक सेवा के लिए अलग-अलग कटऑफ भी जारी नहीं किया गया.
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