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जनता का रुख देख झामुमो विधायक विरोध नहीं कर सके, कोल्हान में जमीन लूट के विरोध में गीता को मिला वोट

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Pravin kumar

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Ranchi:  मोदी लहर में विपक्षी दलों के दिग्गज नेता अपनी सीट नही बचा पाये. राज्य में जहां दो पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, शिबू सोरेन जैसे नेता को लोकसभा चुनाव में हार का समना करना पड़ा वहीं सिंहभूम सीट से गीता कोड़ा की जीत ने प्रदेश भाजपा को भी सोचने पर विवश कर दिया है.

मोदी लहर को दरकिनर कर गीता कोड़ा ने सिंहभूम सीट पर जीत दर्ज कर यहां से पहली महिला सांसद बनने का रिकॉर्ड कायम किया है. गीता ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा को 72155 मतों से हराया है. इस जीत के साथ गीता ने कोल्हान की पहली महिला आदिवासी सांसद बनने का भी श्रेय हासिल कर लिया है.

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 सिंहभूम में क्यों मोदी और अमित शाह की रणनीति फेल हो गयी 

झारखंड की 14 सीट जीतने का दावा करने वाले सीएम रघुवार दास का समीकारण भी नहीं चला. गौरतलब है कि सिंहभूम लोकसभा सीट पर 12 मई को छठे चरण में मतदान हुआ था. इस चरण में लोगों ने बंपर वोटिंग की. यहां 68.66 फीसदी मत पड़े. कुल 9 प्रत्याशी मैदान में थे. मतदान के पूर्व भाजपा को हराने के लिए वैसे लोग भी सामने आये जो न कभी गीता कोड़ा और न ही उनके पति मधु कोड़ा से कभी मिले हैं.

और न ही वह किस पार्टी विशेष के कार्यकता हैं. ऐस लोगों की भूमिका ने ही गीता कोड़ा को जीत दिलायी. चुनाव प्रचार के दैरान भाजपा कार्यकर्ता का मनोबल इस कदर गिर गया कि वे अपने घर और गावं में भाजपा को वोट देने की बात कहने का हिम्मत नही जुटा सके.

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भाजपा की जमीन लूटने वाली सरकार की बन गयी है छवि

नाम न लिखने की शर्त पर सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र के एक प्रखंड अध्यक्ष कहते हैं मोदी और रघुवर सरकार के बारे में चाईबासा और मझियांव विधानसभा में हो समुदाय के बीच यह भावना घर कर गयी थी कि यह जमीन लूटने वाली सरकार है. ऐसे में गीता कोड़ा को जिताने के लिए नहीं बल्कि भाजपा को हराने के लिए हो समुदाय खड़ा हो गया.

भाजपा को जो वोट मिले वह महतो, गोप, एवं ताती समुदाय के अधिक रहे. साथ ही जिन इलाकों में गैर आदिवासी आबादी है वहां पर भाजपा को एकमुश्त वोट मिला.

नहीं काम आये आर्थिक संसाधन

हो भाषा आंदोलन से जुड़े डोंबरो करते हैं सिंहभूम लोकसभा सीट पर गीता कोड़ा की जीत नहीं बल्कि भाजपा की हार हुई है. पूरे लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस का संगठन का ढांचा बहुत ही कमजोर है. इसके बाद भी लोगों ने  खुलकर भाजपा को शिकस्त दिलाने के लिए वोट किया.

इस चुनाव में एक ओर जहां भाजपा आर्थिक संसाधनों के बल पर जीतने  का इरादा रख रही थी वह काम नहीं आया. जनता का रुख भाफ कर झारखंड मुक्ति मोर्चा विधायक भी गीता कोड़ा का विरोध नहीं कर सके. चुप रहने में ही अपनी भलाई समझी. झामुमो विधायकों ने गीता के पक्ष में खुलकर प्रचार भी नही किया. इसके बाद भी गीता की जीत हुई.

गीता के पक्ष में खुलकर नहीं आये झामुमो विधायक भी

गीता कोड़ा के पक्ष में झामुमो विधायको के खुल कर सामने नहीं आने पर भी कांग्रेस की गीता कोड़ के जीत पर सामाजिक कार्यकता मुकेश बिरूआ कहते हैं कि 2014 का विधानसभा चुनाव याद करें. कैसे झामुमो पक्ष में हवा थी. पिछला विधानसभा चुनाव जब मधु कोड़ा मझियांव से लड़ रहे थे, उस दौरान अंतिम समय में इंडियन एक्सप्रेस दिल्ली में एक खबर छपी. जिसमें मधु कोड़ा को भाजपा में शामिल होने की बात थी.

इस खबर में मधु कोड़ा का भी बयान था कि भाजपा में शामिल होंगे. इसके बाद उस खबर का जेरोक्स कर पूरे कोल्हान में बांटा गया. विधानसभा चुनाव में मधु कोड़ा की हार हुई. वहीं दूसरी ओर मझगांव विधानसभा में जहां अपने प्रत्याशी के प्रचार के लिए तातनगर में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरने आये थे, वहीं मात्र 200 लोग की सभा हुई थी.

इसके बाद विधानसभा चुनाव में कोल्हान में हो समुदाय भाजपा कैडर छोड़ कर झारखंड मुक्ति मोर्चा के पक्ष में गोलबंद हुए. और पांच सीट पर झामुमो की जीत हुई. इसी तरह कोल्हान में भाजपा को हराने का मूड जनता ने बना लिया था. इसमें कांग्रेस का संगठन कमजोर था फिर भी कोई फर्क नही पड़ा.

ये जनता की जीत है, किसी पार्टी की नहीं

पूर्व विधायक बहादुर उरांव कहते है, सिंहभूम में 6 विधानसभा सीट पर महागठबंधन का कब्जा रहने के बाद भी जनता की बदैलत भाजपा की हार हुई. गीता कोड़ा के पक्ष में झामुमो विधायक खुलकर समाने नही आये. लेकिन जनता का रुख देख कर उनको विरोध करने की हिम्मत नहीं हुई. यह जीत कोल्हान की जनता की है. न कि किसी राजनीतिक दल की.

 कहां किसे कितने वोट मिले

चाईबासा विधानसभा सीट पर झामुमो के दीपक बिरूवा, सरायकेला विधानसभा सीट पर, मझगांव विधानसभा सीट पर झामुमो के नियल पूर्ति, मनोहरपुर विधानसभा सीट पर झामुमो की जोबा मांझी, चक्रधरपुर विधानसभा सीट पर झामुमो के शशिभूषण सामद और जगन्नाथपुर विधानसभा सीट पर गीता कोड़ा का कब्जा था.

सरायकेलाभाजपा ( 1,40,603)कांग्रेस (77,644)
चाईबरसाभाजपा ( 37,982)कांग्रेस (91,678)
मझियांवभाजपा ( 29,092)कांग्रेस (88,418)
जगरनाथपुरभाजपा ( 44,148)कांग्रेस (57,056)
मनोहरपुरभाजपा ( 52,152)कांग्रेस (58,264)
चक्रधरपुरभाजपा ( 55,182)कांग्रेस (58,485)

 

गीता की जीत के अन्य कारण

गीता के चुनाव जीतने के पीछे और भी कई कारण हैं. इसमें अखिल भारतीय आदिवासी महासभा, कोल्हान मुंडा मनकी संघ एवं अन्य स्थानीय संगठनो का भाजपा को हराने में काम किया जाना शामिल है.

वहीं दूसरी ओर कुजू डैम का विज्ञापन चुनाव के चार पांच महीना पहले निकलने के कारण सरकार की प्रति नराजगी पैदा हुई. साथ ही राशन, पेंशन जैसी योजना भी डबल इंजन वाली सरकार सही रूप में लागू नही करा पायी. यह भी हार का एक कारण बना.

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