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जियाडा ने कारखाना खोलने के लिए रामगढ़ में दे दी विवादित जमीन, प्रशासन के लिए खाली कराना मुश्किल

Chhaya

Ranchi : ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से सरकार ने राज्य में व्यापार सरलीकरण की बात की. सिंगल विंडो सिस्टम व्यवस्था लागू की गयी. सिर्फ राज्य के ही नहीं देशभर से सिंगल विंडो के तहत आवेदन आये. लेकिन अब राज्य सरकार इन आवेदनों का निबटारा नहीं कर पा रही.

पतरातु इंडस्ट्रीयल एरिया में साल 2015-17 के बीच कई व्यापारियों को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत जमीन दी गयी. लेकिन अब तक इस जमीन पर कारखानें नहीं लगाये गये. इनमें से छह जमीन विवादित हैं और यहां के स्थानीय निवासी इस जमीन की मापी तक नहीं करने देते. ऐसे में कारखाना बनाना तो दूर की ही बात है.

छह जमीन जिन कारखानों के नाम से जियाडा से ली गयी, उसमें रांची की कपंनी मेसर्स तिरूमाला इंडस्ट्रीज, नागपुर की कंपनी ट्रांस फ्लाइएश, कोलकाता की अम्बाश्री इन्भायरो केयर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, असम की कांटीनेटल मीलकोज इंडिया लिमिटेड और कोलकाता की रोशिना उद्योग लिमिटेड सिक्किम हाउस है.

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 11 लाख 50 हजार देने पर भी जमीन हाथ नहीं आयी

जियाडा ने कारखाना खोलने के लिए रामगढ़ में दे दी विवादित जमीन, प्रशासन के लिए खाली कराना मुश्किल
जमीन से संबंधित पेपर

नागपुर की कंपनी ट्रांस फ्लाइएश के श्याम सुदंर ने बताया कि उन्होंने साल 2016 में सिंगल विंडो के तहत आवेदन किया. जियाडा की ओर से श्याम सुंदर के प्रोजेक्ट को देखने के बाद 50 डिसमिल जमीन पतरातु इंडस्ट्रीयल एरिया में दी गयी. श्याम ने इसके लिए एक ही किस्त में 11 लाख 50 हजार रूपये भी दे दिये. लेकिन जमीन लिये तीन साल हो गये अब तक जमीन की मापी कर चिन्हित तक नहीं किया गया.

साथ ही श्याम ने बताया कि जमीन के लिए कई बार जियाडा के सर्वेयर के साथ जमीन चिन्हित करने की कोशिश की गयी, जियाडा की ओर से खुद पुलिस और दण्डाधिकारी भी दिये गये. लेकिन अब तक जमीन हाथ नहीं आयी. अब जब श्याम जियाडा से जमीन के पैसे वापस मांग रहे हैं, तो जियाडा पचास प्रतिशत पैसे देने की बात कर रही है.

प्रशासन पहुंची तो स्थानीय लोगों ने किया विरोध

झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार जियाडा के रांची क्षेत्रीय निदेशक की ओर से इस संबध में 28 अगस्त 2018 को रामगढ़ उपायुक्त से पुलिस बल और दण्डाधिकारी की मांग की गयी थी. जिसमें 6 सिंतबर 2018 को जमीन पर चारदीवारी बनाने के लिए चिन्हित करने की बात की गयी.

लेकिन इसके बाद भी इन जमीनों को कारखाना मालिकों को नहीं दिया गया. कुछ कारखाना संचालकों ने बताया कि प्रशासन और दण्डाधिकारी जमीन जब्त करने पहुंचे, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया. हालांकि इसके पहले भी जियाडा की ओर से 19 जून 2018 को भी पत्र लिखा गया था, लेकिन तब रामगढ़ डीसी ने इसमें रूचि नहीं दिखायी.

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जियाडा के सर्वेयर ने कहा कई बार गये, लेकिन जमीन नहीं मिल रही

जियाडा की ओर से जारी पत्र में रामगढ़ प्रशासन के साथ जियाडा की ओर से सर्वेयर राम नगिना साहू और उद्योग विस्तार पदाधिकारी को भेजा गया. सर्वेयर राम नगिना साहू ने जानकारी दी की कई बार पतरातु में उक्त जमीन को मुक्त कराने की कोशिश की गयी.

लेकिन स्थानीय लोगों के कारण ये संभव नहीं हो पा रहा. जियाडा के पत्र के बाद भी रामगढ़ पुलिस बल के साथ जमीन चिन्हित करने टीम गयी, लेकिन जमीन तब भी नहीं मिली. अभी फिलहाल मामला रूका है.

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