
Ranchi: राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में व्यवस्था लंबे समय से बेपटरी है. मैन पावर की कमी से जूझ रहे इस हॉस्पिटल में बहाली के लिए कई बार घोषणा हुई, विज्ञापन भी निकाले गये, लेकिन हर बार किसी ना किसी वजह से बहाली प्रक्रिया को टाल दिया गया. रिम्स में इलाज के लिए बिहार-झारखंड के अलावा अन्य राज्यों से भी मरीज आते हैं. कोरोना के बीच मरीजों के आने का सिलसिला और तेज हुआ है, लेकिन नर्सेज और पारा मेडिकल स्टाफ की कमी की वजह से वार्ड में एडमिट मरीजों को प्रॉपर केयर नहीं मिल पा रही है. रिम्स में तीन शिफ्ट की ड्यूटी में कम से कम 2700 नर्स की जरूरत है तभी मरीजों को प्रॉपर केयर मिल सकती है, लेकिन यह मात्र 450 नर्सेज के भरोसे चल रहा है.
इसे भी पढ़ें :Good News: सभी एथलीटों को नि:शुल्क कोरोना वैक्सीन दिलायेगा झारखंड एथलेटिक्स संघ
900 नर्सों की होनी थी बहाली, टल गयी.
हॉस्पिटल में मरीजों का पहले से ही लोड काफी है. 1500 बेड के इस हॉस्पिटल में 450 नर्स है. कई नर्सेज रिटायर भी हो चुकी हैं. यह देखते हुए 800 नर्सों की बहाली करने का निर्णय लिया गया था. तत्कालीन डायरेक्टर डॉ डीके सिंह ने फाइल को आगे बढ़ा दिया था. इसमें 10 साल के अनुभव वाले अभ्यर्थियों का प्राथमिकता देने की बात कही गई थी ताकि मरीजों की बेहतर ढंग से देखभाल की जा सके. लेकिन उनके रिम्स से जाते ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया. फोर्थ ग्रेड के स्टाफ की भी बहाली अटक गई.
जनवरी 2021 में रिम्स जीबी की बैठक में 370 नए सिरे से नर्सों की नियुक्ति को हरी झंडी दी गयी थी, जिसके तहत 80 फीसदी महिला और 20 फीसदी पुरुष नर्स की नियुक्ति करने की बात कही गयी. लेकिन विवाद के बाद यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया.
सर्जरी वार्ड में दर्जनों परसेंट कोरोना संक्रमण के बाद एडमिट है. इतनी संख्या में मरीजों को देखभाल के लिए नर्स चाहिए. लेकिन पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण वार्ड में नर्स मरीजों को टाइम नहीं दे पा रही है. इस वजह से कई बार मरीजों की स्थिति खराब हो रही है. डॉ बी कुमार के यूनिट में रंजीत कुमार नाम का एक पेशेंट एडमिट है. कोरोना संक्रमित होने के कारण उसकी स्थिति गंभीर है लेकिन वार्ड में उसे देखने वाला कोई नहीं है. इतनी गुहार लगा रही है कि कोई उनके पति को देख ले.
इसे भी पढ़ें :कोरोना से मृत व्यक्ति का शव 10 घंटे बाद घर से उठाया गया




