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#JharkhandElection : पार्टी की जीत से ज्यादा अपने टिकट की लॉबिंग में जुटे हैं सीनियर कांग्रेसी!

जानिये क्या हुआ कांग्रेस कमिटी की राज्य चुनाव समिति की बैठक में.

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Nitesh Ojha

Ranchi : झारखंड प्रदेश कांग्रेस विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रत्याशी उतारकर पार्टी की मजबूती को दोबारा पाने की उम्मीद पाले हुए है, पर दूसरी ओर कई सीनियर कांग्रेसी नेता पार्टी हित से ज्यादा अपने टिकट की लॉबिंग करते दिख रहे हैं.

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ऐसे सीनियर नेताओं का एक गुट अपने समर्थकों के सहयोग से अपने नाम प्रमोट कराता दिख रहा है. ऐसे गुट में सुबोधकांत, ददई दूबे, प्रदीप बलमुचू और फुरकान अंसारी जैसे नेताओं के नाम प्रमुखता से शामिल हैं.

इसकी बानगी सोमवार को झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी की राज्य चुनाव समिति की बैठक में देखी गयी.

सबसे बड़ी बात यह कि बैठक में उपरोक्त चार नेताओं में तीन ही (सुबोधकांत, फुरकान और प्रदीप बलमुचू) ही उपस्थित थे. इस दौरान 81 विधानसभा सीटों (दुमका, हटिया, रांची आदि) पर चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों के नामों पर विशेष तौर पर चर्चा हुई.

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  1. विश्रामपुर और बोकारो सीट से ददई दूबे पर हुई राजनीति

#JharkhandElection पार्टी की जीत से ज्यादा अपने टिकट की लॉबिंग में जुटे हैं सीनियर कांग्रेसी!बैठक में बोकारो और विश्रामपुर सीट पर सीनियर कांग्रेसी नेता ददई दूबे के नाम को लेकर जमकर राजनीति देखी गयी. जब बोकारो सीट के लिए प्रत्याशियों पर बात शुरू हुई, तो एक सीनियर नेता ने ददई दूबे के नाम को लिस्ट में शामिल कराने को तरजीह दी.

कुछ ने इसका विरोध कर कहा कि उन्होंने बोकारो से चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं जतायी है. इसपर सीनियर नेता ने कहा कि उनके पास किसी भी प्रत्याशी का नाम लिस्ट में शामिल कराने का अधिकार है.

इसी तरह जब विश्रामपुर सीट पर बात हुई, तो किसी नेता ने वहां से ददई दूबे के नाम का प्रस्ताव रखा. एक ने विरोध जताते हुए कहा कि वहां पर उनके बेटे अजय दुबे पहली प्राथमिकता हैं. ददई दूबे ने चुनाव लड़ने से इनकार नहीं किया है.

इसपर ददई दूबे का नाम शामिल कराने वाले नेता ने कहा कि उन्होंने तो इच्छा बोकारो सीट पर भी नहीं दिखायी है, तो वहां पर उनका नाम क्यों शामिल हो रहा है.

सीएम के खिलाफ प्रदीप बलमुचू के नाम पर हुई राजनीति

पूर्वी जमशेदुपर सीट से सीनियर नेता प्रदीप बलमुचू को उतारने के नाम का प्रस्ताव एक नेता ने किया. वे सीएम रघुवर दास के खिलाफ प्रदीप को चुनाव लड़ाना चाह रहे थे.

इस पर बलमुचू ने कहा कि दो साल पहले ही उन्होंने आलाकमान के समक्ष यह बात रखी थी. अगर उस समय ही संकेत मिलता, तो वे आज तैयारी के साथ सीएम के खिलाफ चुनाव लड़ते.

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गोड्डा संसदीय सीट के मधुपुर विधानसभा की बात आयी, तो प्रदीप बलमुचू ने फुरकान अंसारी का नाम प्रमोट किया. इस तरह से जब हटिया सीट के प्रत्याशियों की बात हुई, तो किसी नेता ने सुबोधकांत सहाय के नाम को तरजीह दी.

वहीं हटिया सीट पर अजय लाल नाथ शाहदेव और रविंद्र सिंह के नाम पर ज्यादा चर्चा हुई. रांची सीट को लेकर बात बनी कि महागठबंधन बनने से यह सीट जेएमएम के पाले में जायेगी, वहीं हटिया सीट कांग्रेस के पाले में.

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प्रदेश अध्य़क्ष का नाम हटते ही गुमला सीट पर हुई लॉबिंग

गुमला सीट पर रामेश्वर उरांव के नाम पर विधायक दल के नेता आलमगीर आलम सहित सभी नेताओं ने सहमति जतायी. इसपर एक नेता ने जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष राजनील तिग्गा का नाम प्रमुखता से रखा.

इसपर रामेश्वर उरांव ने कहा कि उन्हें गुमला सीट से चुनाव नहीं लड़ना है. काफी गरमागर्मी के बीच एक नेता ने कहा कि गुमला सीट पर जिस रामेश्वर उरांव का नाम पर चर्चा हुई है वे कोई और नेता है. जबकि प्रदेश अध्य़क्ष का नाम डॉ रामेश्वर उरांव है.

इसपर सभी नेता गुमला सीट पर अपने-अपने प्रत्याशियों के नाम को शामिल करने पर जोर देने लगे.

दुमका सीट को लेकर युवा कांग्रेस नेता पर हुई राजनीति

दुमका सीट पर यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष विलियम टुडू का नाम सबसे उपर था. इसपर कुछ नेता ने विरोध किया. विरोध का कारण बताया गया कि विलियम ने कभी भी संगठन के कार्यों को तरजीह नहीं दी है.

ऐसे में पार्टी हित देख रामेश्वर उरांव और आलमगीर आलम ने नाम हटाने का समर्थन किया. इसपर सीनियर नेता प्रदीप बलमुचू ने नाराजगी जतायी. कहा कि बैठक में नाम हटाने को लेकर किसी तरह की कोई चर्चा नहीं हुई है.

इसके तुरंत बाद फुरकान अंसारी और जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी प्रदीप बलमुचू के समर्थन में खड़े हो गये. विलियम का विरोध करने वाले नेता ने कहा कि वे अभी संस्पेडेड हैं. ऐसे में उनका नाम शामिल करना कतई सही नहीं है.

आखिरकार आलमगीर आलम और फुरकान अंसारी ने विलियम टुडू के नाम काटे जाने पर सहमति दी.

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