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लापरवाहीः राज्य बनने के 16 साल बाद भी नहीं बन पाया झारखंड पुलिस एक्ट, अब बनाया जा रहा है ड्राफ्ट  

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Ranchi: झारखंड पुलिस का अपना कोई एक्ट नहीं है. अभी भी यह अंग्रेजों द्वारा 1861 में बनाये गये दंडात्मक पुलिस एक्ट पर चल रहा है. झारखंड बनने के 16 वर्ष बाद 2016 में झारखंड पुलिस ने खुद का एक्ट बनाने की कवायद शुरू की थी. लेकिन को तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है.

अब एक बार फिर से पुलिस एक्ट का अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है. झारखंड पुलिस एक्ट का पूरा ड्राफ्ट तैयार करने के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनायी गयी है. बताया जा रहा है कि इस नये एक्ट को दंडात्मक की जगह मानवीय स्वरूप दिया जायेगा. इसमें शहरी क्षेत्र में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था पर जोर दिया जायेगा.

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विस के अगले सत्र में पुलिस एक्ट का प्रस्ताव सरकार पेश कर सकती है  

मिली जानकारी के अनुसार कमेटी में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, विधि विभाग के प्रधान सचिव और डीजीपी कमलनयन चौबे सदस्य हैं. तीन स्तरीय कमेटी को ही झारखंड पुलिस एक्ट का फाइनल ड्राफ्ट सरकार को सौंपना है. बताया जा रहा है. विधानसभा के अगले सत्र में पुलिस एक्ट के प्रस्ताव को सरकार पेश कर सकती है.

झारखंड पुलिस एक्ट बनाने के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा समेत कई राज्यों के पुलिस एक्ट का अध्ययन राज्य पुलिस के अधिकारियों ने किया है. डीजी मुख्यालय पीआरके नायडू, एडीजी रेजी डुंगडुंग, एडीजी आरके मल्लिक ने पुलिस मुख्यालय के स्तर पर झारखंड पुलिस एक्ट के लिए रिसर्च किया है.जिसके बाद इस संबंध में एक ड्राफ्ट तैयार किया गया.

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

मिली जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में अंग्रेजों के पुलिस कानून की जगह हर राज्य को अपना पुलिस एक्ट खुद बनाने का निर्देश दिया था. इस संबंध में यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह सुप्रीम कोर्ट गये थे. उन्होंने नया पुलिस एक्ट बनाया था.

इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया था. अदालत ने ऐसा एक्ट बनाने को कहा था जिसमें पुलिस पब्लिक के बीच की खाई को खत्म करने का प्रावधान हो. एससी-एसटी सहित दबे-कुचले वर्ग के हित को ध्यान रखा जाये. जनता के साथ सहयोग और वार्तालाप हो.

पुलिसिंग में कई तरह के बड़े बदलाव की हो सकती है कवायद

मिली जानकारी के अनुसार झारखंड पुलिस एक्ट बनने के बाद राज्य पुलिस में संरचनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव हो सकते हैं. राजधानी रांची समेत बड़े शहरों में कमिश्नरी व्यवस्था, कई थानों के अपडेशन, अधिकारियों के कार्यक्षेत्र व अधिकार में वर्तमान दौर के आधार पर फेरबदल किया जा सकता है. इसके अलावा एक्ट में ग्राम गार्ड का भी प्रावधान होगा.

इसके तहत एसपी पर 21 वर्ष से लेकर 60 वर्ष के लोगों को ग्राम गार्ड के तौर पर सूचीबद्ध करने की जवाबदेही होगी. स्पेशल आ‌र्म्स बटालिन, पुलिस स्ट्रक्चर, बहाली- प्रोन्नति और अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी विस्तृत उल्लेख होगा.

इन प्रावधानों को नये एक्ट में मिल सकती है जगह-

  • स्टेट सिक्यूरिटी कमीशन का गठन : 31-12 2006 को अधिसूचना जारी
  • संघ लोक सेवा आयोग द्वारा तैयार पैनल से डीजीपी का चयन : 19 फरवरी 2007 और 31 फरवरी 2007 को अधिसूचना जारी.
  • पुलिस पदाधिकारियों के पदस्थापन की न्यूनतम अवधि निर्धारित करना : 27 फरवरी 2007 को अधिसूचना जार.
  • पुलिस के विधि व्यवस्था एवं अनुसंधान कार्यो का बंटवारा – 31-12-2006 को संकल्प जारी.
  • पुलिस पदाधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापन के साथ अन्य मामलों के लिए गठित पुलिस स्थापना पर्षद.

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