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#Jharkhand: बिजली के इंतजार में 2500 से ज्यादा पंचायतें, बीस सालों में भी नहीं पहुंची रोशनी

Amit Jha

Ranchi: झारखंड गठन के बीस बरस हो चुके हैं. बीस सालों बाद भी राज्यभर के सभी पंचायत भवनों में अब भी बिजली नहीं पहुंचायी जा सकी है. 4367 पंचायतों में आधे से भी अधिक पंचायत भवन अंधेरे में डूबे पड़े हैं.

जितने पंचायत भवन तैयार हैं, उनमें भी सबों में विद्युतीकरण अब तक नहीं हो सका है. गांव की सरकार अंधेरे में ही पंचायत सचिवालयों में दायित्व निर्वाहन कर रही है.

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अब तक बने हैं 4220 पंचायत भवन

नवंबर, 2000 में झारखंड प्रांत का गठन हुआ. 32 वर्षों बाद 2010 में पहली बार पंचायत चुनाव हुए. 2015 में दूसरी दफा पंचायत चुनाव के जरिये गांव की सरकार चुनी गयी. इस साल तीसरी बार इसके लिए चुनाव होंगे.

इतनी अवधि में अब तक राज्य के 263 प्रखंडों के कुल 4367 पंचायतों के बनिस्पत 4220 पंचायतों में ही पंचायत भवन बनाये जा सके हैं. 147 पंचायत भवनों का निर्माण कार्य अधूरा या लंबित पड़ा है. कुल निर्मित पंचायत भवनों में से 4145 में ही पंचायत सचिवालय कार्यरत हैं.

222 पंचायत सचिवालय को अन्य वैकल्पिक भवनों के जरिये संचालित किया जा रहा है. तैयार पंचायत भवनों में से मात्र 2844 में ही अब तक विद्युतीकरण की सुविधा उपलब्ध करायी जा सकी है.

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2876 पंचायत भवनों में ही है जेनरेटर की सुविधा

पूर्ण निर्मित 4220 पंचायत भवनों में 1376 भवनों में बिजली की मुकम्मल सुविधा का अभाव है. पंचायती राज विभाग के अनुसार, बिजली सुविधा के लिए राज्य के 2876 पंचायत भवनों में जनरेटर की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है. इसके अलावा 2467 पंचायत भवनों में सोलर पॉवर की व्यवस्था सुनिश्चित की जा चुकी है.

राजधानी रांची की पंचायतें भी कर रहीं बिजली का इंतजार

राज्य में सबसे अधिक पंचायतें गिरिडीह जिले में हैं जहां इनकी संख्या 352 है. दूसरे स्थान पर रांची है जहां 305 पंचायत है. 272 पंचायत के साथ पलामू तीसरे स्थान पर है. सबसे कम 66 पंचायत लोहरदगा जिले में है. दूसरे स्थान पर खूंटी (86) और तीसरे पर सिमडेगा (94) पंचायत है.

राजधानी रांची के 305 पंचायतों में से तकरीबन सभी पंचायतों में (303) पंचायत भवन तैयार हो चुके हैं, लेकिन अब भी 92 भवनों में बिजली कनेक्शन नहीं किया जा सका है. कोई भी जिला ऐसा नहीं है जहां सभी निर्मित पंचायत भवनों में विद्युतीकरण कर लिया गया हो. गांव की सरकार अंधेरे में बैठकर ही पंचायत सचिवालय संभाल रही हैं.

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