
Ranchi. झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा है कि ये दोनों संस्थाएं कुंभकरण की तरह ना बने. 3 महीने में पूरी रिक्तियां भरें, अन्यथा कठोर आदेश पारित किया जायेगा. कोर्ट ने यह टिप्पणी धनबाद के जज उत्तम आनंद की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कही. दरअसल, इस मामले में पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान यह बात सामने आयी थी कि झारखंड की फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में रिक्तियों की वजह से जांच बाधित हो रही है. एफएसएल में नियुक्तियां न किये जाने पर कोर्ट ने जेपीएससी की भूमिका पर पहले भी कड़ी नाराजगी जतायी है.
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जज उत्तम आनंद मौत मामला: प्रगति रिपोर्ट पेश कर सीबीआई ने कहा- जिस दिशा में जांच चल रही है, उसमें कुछ सुराग मिले हैं
राज्य सरकार ने अगले 6 महीने में एफएसएल को पूरी तरह से अपग्रेड करने की बात करते हुए प्रति शपथ पत्र दायर किया था.इसमें कहा गया था कि 6 महीने में फंड रिलीज कर दिया जाएगा. इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और सरकार द्वारा दायर प्रति शपथ पत्र को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि हमें कंक्रीट रिजल्ट चाहिए सारे मोबाइल लेबोरेटरी पुराने हो गए हैं. कोई भी कार्य नहीं कर रहा है. ऐसे में एफएसएल सही तरीके से नहीं चल पा रहा है . कोर्ट ने कहा है कि अगली तारीख को सेक्रेटरी कंक्रीट प्लान बनाकर एफिडेविट फाइल करें और सुनवाई के दौरान प्रिंसिपल सेक्रेटरी और एफएसएल डायरेक्टर भी मौजूद रहेंगे.
इसके लिए यदि आवश्यक हो तो वे रात भर जागे और प्लान बनाएं. जेपीएससी और जेएसएससी पर भी नाराजगी जाहिर करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि कुंभकरण की तरह ना बने. हाईकोर्ट के आदेश को गंभीरता से लें और 3 महीने में पूरी रिक्ति भरे अन्यथा कठोर आदेश पारित किया जाएगा. धनबाद के जज उत्तम आनंद मौत के मामले को लेकर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.इस दौरान सीबीआई ने प्रगति रिपोर्ट दायर कर बताया कि उन्हें कुछ सुराग मिले है, जिस दिशा में जांच चल रही है.
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