JharkhandRanchi

#Raghubar सरकार में ODF घोषित हुआ था झारखंड, केंद्र ने शौचालय निर्माण में धांधली की शिकायत पर मांगी रिपोर्ट

Ranchi : अक्टूबर, 2018 में झारखण्ड खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित हो गया था. 2014 से 2018 की अवधि में लगभग चालीस लाख शौचालय बना लिये गये थे. पर इस आंकड़े पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं.

भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) ने एक लोक शिकायत के आधार पर झारखंड के पेयजल स्वच्छता विभाग (ग्रामीण स्वच्छता) से 30 दिनों में रिपोर्ट मांगी है.

14 मई को जारी पत्र में गुमला और दूसरे जिलों में शौचालय निर्माण में हुई गड़बड़ियों, वित्तीय अनियमितताओं संबंधी शिकायतों के आरोपों की जांच करने को कहा गया है.

शहर से 5 किमी की दूरी पर भी नहीं है एक शौचालय

वाटर एंड सैनिटाइजेशन एक्सपर्ट कल्लोल साहा ने केंद्र सरकार से झारखण्ड में शौचालय निर्माण कार्यों में हुई लापरवाही के मामले में समुचित पड़ताल करने का आग्रह किया है.

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में कई जिलों में गड़बड़ियां हुई हैं. गुमला के अलावा गिरिडीह, पाकुड़ और अन्य जिलों में भी स्थिति ठीक नहीं.

पाकुड़ में शहर से 5 किमी दूर स्थित एक गांव को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है जबकि वहां एक भी शौचालय नहीं बनाया गया है.

साहा के अनुसार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पदाधिकारियों ने भी माना है कि राज्य भर से यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (यूसी) अब तक प्राप्त नहीं हो सके हैं.

यूसी मिलने से वास्तविकता सामने आ सकेगी कि गांवों में कितने घरों में शौचालय बनाये जा चुके हैं. कैग, सिविल सोसाइटी और इंडिपेंडेंट मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार को शौचालय निर्माण कार्यों की वास्तविकता को सामने लाना चाहिए.

इसे भी पढ़ें – खुले रेस्टोरेंट्स: दस से पंद्रह प्रतिशत ही मिल रहे होम डिलीवरी के ऑर्डर, होटल मेंटेन करने में होगी परेशानी

केंद्र को नहीं मिला है 88.36 करोड़ रुपये के खर्च का ब्योरा

लॉक डाउन से पूर्व फ़रवरी में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के सचिव परमेश्वरण अय्यर ने झारखण्ड में स्वच्छता मिशन के कामों को मिशन मोड में पूरा करने को कहा था.

स्वच्छता मिशन के तहत सॉलिड-लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट, ड्रेनेज, सेप्टिक टैंक, प्लास्टिक कचरा के निष्पादन का कार्य अगले चरण में यहां होना है.

उन्होंने उस दौरान कहा था कि अगले दो माह में हमें खुले में शौच को पूरी तरह से खत्म करने के लिए 6 लाख शौचालयों का निर्माण करना है.

इसके लिए प्रतिदिन अलग-अलग जिलों में 900 से 700 के बीच शौचालय निर्माण युद्ध स्तर पर करना होगा, ताकि मार्च तक टारगेट पूरा हो सके.

उन्होंने राज्य के सभी डीसी से कहा था कि वे पूर्ण हो चुके तथा चल रहे शौचालय निर्माण की भौतिक स्थिति को विभाग की साइट पर अपलोड करें, ताकि खर्च के उपयोगिता प्रमाण पत्र के आधार पर अगले साल की राशि केंद्र सरकार राज्य को दे सके.

उन्होंने उस दौरान इस मद के 88.36 करोड़ रुपये के खर्च का ब्योरा केंद्र सरकार को नहीं मिल पाने पर चिंता भी जतायी थी.

इसे भी पढ़ें – धनबाद: चासनाला कोलियरी में चाल धंसने से एक की मौत, बाल-बाल बचे 116 मजदूर

4 बरस में 40 लाख शौचालय निर्माण का दावा

2 अक्टूबर 2018 को गांधी जयंती के दिन रघुवर सरकार ने पूरे राज्य को ओडीएफ घोषित कर दिया था. हालांकि विभिन्न स्तरों पर हुई पड़ताल में सरकार का यह दावा गलत साबित हुआ है.

सरकार के आंकड़े ही उसके दावे को झुठलाते रहे हैं. उस समय केंद्र सरकार ने भी अपने रिकॉर्ड में झारखंड को खुले में शौच से मुक्त राज्य मान लिया था.

झारखंड ने केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित लक्ष्य को एक साल पहले ही पूरा करने की जानकारी दी थी. केंद्र ने शौचालय निर्माण पूरा करने का लक्ष्य अक्तूबर 2019 तक का दिया था.

झारखंड सरकार ने अक्तूबर, 2018 को ही लगभग 40 लाख शौचालय बनाकर शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने की घोषणा कर दी थी.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में केंद्र सरकार ने बेसलाइन सर्वे के तहत झारखंड को लक्ष्य दिया था. इस सर्वे में वैसे घरों की पहचान की गयी थी, जहां शौचालय नहीं थे.

समाज को खुले में शौच से मुक्त करने की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को हुई थी. झारखंड स्वच्छ भारत मिशन के आंकड़ों के मुताबिक तब 33.79 लाख शौचालय बनाने थे.

केंद्र सरकार ने अक्तूबर 2019 तक सभी राज्यों को शौचालय निर्माण का टारगेट दिया था, जबकि झारखंड के सीएम रघुवर दास ने दो अक्तूबर 2018 का लक्ष्य तय कर दिया था. हालांकि इस अवधि तक शत प्रतिशत शौचालय निर्माण नहीं हो पाया था.

इसे भी पढ़ें – #CoronaUpdate: देश में सवा लाख से ज्यादा संक्रमित, एक दिन में सामने आये रिकॉर्ड 6654 नये केस

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button