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खुले रेस्टोरेंट्स: दस से पंद्रह प्रतिशत ही मिल रहे होम डिलीवरी के ऑर्डर, होटल मेंटेन करने में होगी परेशानी

Ranchi: राज्य सरकार ने रेस्टोरेंट्स खोलने की अनुमति दी है. जहां सिर्फ होम डिलिवरी किये जायेंगे. पिछले 60 दिनों के लॉकडाउन के बाद अब राज्य के रेस्टोरेंट्स खुल रहे हैं. शुरू से ही संभावनाएं व्यक्त की जा रही थी कि लॉकडाउन के बाद सबसे अधिक प्रभावित रेस्टोरेंट्स, होटल्स और टूरिज्म बिजनेस होंगे.

अब भले सरकार ने रेस्टोरेंट्स खोलने की अनुमति दे दी हो. लेकिन रेस्टोरेंट्स संचालकों के सामने सबसे अधिक परेशानी कस्टर्मस के रिस्पांस की है. इस मामले में कुछ रेस्टोरेंट संचालकों से बात की गयी. जानकारी हुई कि पहले जो रिस्पांस कस्टर्मस से मिल रहे थे, अब स्थिति वैसी नहीं है. पिछले दो दिनों में जो रेस्टोरेंट्स चालू रहे वहां दस से पंद्रह प्रतिशत ही होम डिलीवरी के ऑर्डर आयें. जो पहले से काफी कम है. ऐसे में रेस्टोरेंट्स चालू रखते हुए होम डिलीवरी कर, रेस्टोरेंट्स का मेंटेंनेस और स्टाफ खर्च निकालना मुश्किल है.

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सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करना सबसे मुश्किल

पर्ल रीजेंसी के संचालक मुकेश कुमार ने बताया कि रेस्टोरेंट्स बिजनेस में सबसे मुश्किल है सोशल डिसटेंसिंग मेंटेंन करना. होम डिलीवरी की भी जाती है तो स्टाफ की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाना है. वहीं कंटनमेंट जोन को ध्यान में रखते हुए भी यह सुविधा दी जा रही है. ऐसे में काफी मुश्किल है.

रेस्टोरेंट्स को वापस अपनी स्थिति में आने में काफी वक्त लगेगा. जो लगभग 6 महीने तक हो सकता है. उन्होंने बताया कि अगर सरकार रेस्टोरेंट्स में खाने की सुविधा देती भी है तो जहां 60 सीटों की व्यवस्था है. वहां सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखकर 30 से 40 सीट कर दी जायेगी. ऐसे में रेस्टोरेंट्स को नुकसान भी है. क्योंकि स्टाफ पेंमेट और मेंटेनेंस है ही.

बैंक्वेंट्स की सारे बुकिंग नवंबर और दिसंबर तक टली

मुकेश ने बताया कि बैंक्टवेंट्स की सुविधाएं पूरी तरह बंद है. रेस्टोरेंट्स संचालन में अधिक लाभ इसी से होता है. ऐसे में पहले जो भी बुकिंग्स किये गये थे, वो अब नंवबर-दिसंबर तक के लिये टल गये है. ऐसे में लगभग छह महीने बाद इससे लाभ होगा. जबकि मेंटनेंस में ही सिर्फ दो लाख तक का खर्च हो जाता है. जो मासिक है.

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फूडिंग और लॉजिंग पर काम कर रहे आर राजपाल ने बताया की स्टाफ की काफी कमी देखी जा रही है. जो स्किल्ड स्टाफ थे, लॉकडाउन के कारण वो चले गये. ऐसे में अब रेस्टोरेंट्स उन्हीं स्टाफ्स के भरोसे चल रहे है जो आसपास के है.

बाहर से लोग आयेंगे नहीं, कमरों का बिजनेस रहेगा बंद

टूर एंड ट्रैवल्स दिप्ती एजेंसी के शैलेश अग्रवाल ने बताया कि रेस्टोरेंट्स भले स्टार्ट हुए हैं. लेकिन कमरों का बिजनेस बंद रहेगा. जिससे नुकसान है. जबकि इनका मेंटनेंस जारी रहेगा. इन्होंने बताया कि राज्य में सबसे अधिक ऑफिशियल काम से ही लोग आते हैं. राज्य में टूरिज्म के लिए फैमिली के साथ बहुत कम ही लोग आते हैं. वो भी अब बंद है. संचालकों की मानें तो भले ही फूडिंग और लॉजिंग बिजनेस अब स्टार्ट किया गया है. लेकिन इन्हें पहले की तरह होने में कम से कम तीन महीने लगेंगे. बता दें पूर्व से ही राज्य के कारोबारियों की ओर से बिजली फिकस्ड चार्जेस में रियायत की मांग की जा रही थी. लेकिन अब तक राज्य सरकार ने इस पर कोई पहल नहीं की.

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