
Saurav Singh
Ranchi: झारखंड के दूसरे चरण के चुनाव में नक्सलियों से निपटना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होगी. दूसरे चरण में राज्य के सात जिलों की 20 सीटों पर वोटिंग होनी है. इनमें से छह अतिसंवेदनशील है.
दरअसल, झारखंड के 13 अतिसंवेदनशील जिलों में से छह अतिसंवेदनशील जिले और एक संवेदनशील जिला में 20 विधानसभा सीटों पर दूसरे चरण में 7 दिसंबर को चुनाव होना है. इन 20 विधानसभा सीटों में से 13 विधानसभा सीटें ऐसे जो अति नक्सल प्रभावित श्रेणी में आते है.
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छह अतिसंवेदनशील जिले सरायकेला, चाईबासा, गुमला, सिमडेगा, खूंटी और रांची जिले के 12 विधानसभा सीट और एक संवेदनशील जमशेदपुर जिला के एक विधानसभा सीट पर दूसरे चरण के चुनाव में सुरक्षाबलों के सामने नक्सलियों से निपटने की चुनौती होगी.
छह अतिसंवेदनशील जिले में पिछले 10 महीने के दौरान 75 नक्सली मामले आए सामने
छह अतिसंवेदनशील जिले में पिछले 10 महीने के दौरान 75 छोटे-बड़े नक्सली मामले सामने आये हैं. जिनमें रांची 17, सरायकेला 6, चाईबासा 16,गुमला 10,खूंटी 25 और सिमडेगा में 1 नक्सली मामले सामने आए है.
6 अति संवेदनशील और एक संवेदनशील जिले के दूसरे चरण में वोटिंग
झारखंड विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में संवेदनशील जिला जमशेदपुर के बहरागोड़ा, घाटशिला, पोटका, जुगसलाई जमशेदपुर पूर्वी और जमशेदपुर पश्चिमी विधानसभा सीट पर वोटिंग होगी.
वहीं अति संवेदनशील जिला चाईबासा जिले के चाईबासा, मझगांव, जगरनाथपुर, चक्रधरपुर और मनोहरपुर विधानसभा सीट. सरायकेला जिला के सरायकेला और खरसावां विधानसभा सीट.
गुमला जिला के सिसई विधानसभा सीट, रांची जिला के तमाड़ और मांडर सीट, खूंटी के तोरपा और खूंटी और सिमडेगा जिले के सिमडेगा और कोलिबिरा विधानसभा सीट पर 7 दिसंबर को मतदान होना है.
दूसरे चरण के 13 विधानसभा सीट अति नक्सल प्रभावित
दूसरे चरण में राज्य के सात जिलों की 20 सीटों में से 13 विधानसभा सीट अति नक्सल प्रभावित है.
इनमें जमशेदपुर की घाटशिला विधानसभा सीट और अति संवेदनशील जिलों में से रांची का तमाड़, सरायकेला का सरायकेला और खरसावां, चाईबासा का चाईबासा, मझगांव, जगन्नाथपुर, मनोहरपुर और चक्रधरपुर, सिमडेगा जिला का सिमडेगा और कोलीबिरा और खूंटी जिले में से खूंटी और तोरपा विधानसभा सीट अति नक्सल प्रभावित है.
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गुमला जिला भी अतिनक्सल प्रभावित जिले की श्रेणी में आता है. लेकिन सिसई विधानसभा नक्सल प्रभावित नहीं माना जाता है.
किस जिले में कौन-सा दस्ता सक्रिय
सरायकेला-खरसावां जिले के नक्सल प्रभावित इलाके में अनल उर्फ पातिराम, महाराजा प्रमाणिक, चाईबासा में प्रशांत बोस और दलमा क्षेत्र में रामनाथ मार्डी उर्फ सचिन, जीवन कंडूलना और जमशेदपुर जिले बंगाल सीमा,घाटशिला, पटमद में असीम मंडल उर्फ आकाश दस्ते की सक्रियता है.
सभी दस्तों का आपस में तालमेल है.एक-दूसरे के प्रभावित क्षेत्र में आना-जाना होता है. रांची जिले के तमाड़ क्षेत्र में महाराजा प्रमाणिक और बोयदा पाहन का दस्ता सक्रिय है.
खूंटी में पीएलएफआइ उग्रवादी संगठन की सक्रियता है हालांकि हाल के दिनों में नक्सली बोयदा पाहन के दस्ते की सक्रियता बढ़ी है. सिमडेगा जिले में पीएलएफआइ उग्रवादी सक्रिय है.
कोल्हान और तमाड़ में शांतिपूर्ण चुनाव कराना होगा चुनौती
कोल्हान और रांची के तमाड़ में शांतिपूर्ण चुनाव कराना प्रशासन के लिए चुनौती होगी. बता दें कि इस साल कोल्हान के सरायकेला जिले में दो बड़े नक्सली हमले हुए हैं. जिनमें मई महीने में आइईडी ब्लास्ट में 26 से सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे.
वहीं जून में हुए नक्सली हमले में 5 पुलिसकर्मी शहीद हो गए. इसके अलावा अक्टूबर महीने में रांची के दशम फॉल इलाके में 2 जवान नक्सलियों की कथित फायरिंग में शहीद हो गए थे. इसके अलावा कोल्हान के चाईबासा और जमशेदपुर में भी नक्सलियों ने चुनाव को नजदीक आते ही अपनी धमक बढ़ा दी है.
लगातार पोस्टरबाजी कर नक्सलियों के द्वारा वोट बहिष्कार का ऐलान किया जा रहा है. बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान सरायकेला-खरसांवा जिले के खरसांवा में भाजपा के चुनावी कार्यालय को उड़ाया था और रांची में लोकसभा चुनाव के दिन तमाड़ में माओवादियों ने एक ट्रैक्टर को आग के हवाले किया था.
सुरक्षा के हैं व्यापक इंतजाम
झारखंड के दूसरे चरण के चुनाव में नक्सलियों से निपटना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होगी. लेकिन दूसरे चरण की वोटिंग को लेकर बड़े पैमाने पर सुरक्षाबलों की तैनाती भी की गई है. चुनाव प्रचार में वीआईपी सुरक्षा से लेकर पार्टी कार्यालयों की सुरक्षा व नक्सल विरोधी अभियान भी शुरू कर दिया गया है.
चुनाव प्रक्रिया में नक्सली खलल नहीं डालें, साथ ही पड़ोस के राज्यों से नक्सलियों की गतिविधि नहीं हो इसके लिए इंटर स्टेट को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठकें संबंधित रेंज के डीआइजी,एसपी और पड़ोसी सीमावर्ती राज्य के जिलों के पुलिस अफसरों के साथ हो चुकी है.
दूसरे चरण के चुनाव में राज्य पुलिस मुख्यालय ने 1 हजार 844 मतदान केंद्रों को अतिसंवेदनशील की श्रेणी में रखा है. सर्वाधिक अतिसंवेदनशील सीटें चाईबासा और सरायकेला खरसांवा जिले में हैं.
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