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प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना: 4 सालों में 66,68,917 ने लिया नामांकन, 1,75,146 को मिली ट्रेनिंग महज 18567 को मिला जॉब 

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Rahul Guru

Ranchi: झारखंड, देश का एक ऐसा राज्य जो खनिज संपदा से भहरा पड़ा है, लेकिन रोजगार अवसरों के मामलों में फिसड्डी है. जी हां, आश्चर्य की बात जरूर है, लेकिन कड़वी हकीकत यही है.

झारखंड में भाजपा शासित पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बाद भी आज भी यहां 39.1 फीसदी जनता गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर कर रही है. जबकि इसी राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्लैगशिप योजना साल 2015 से ही काम कर रही है. जिसका उद्देश्य ही है युवाओं को हुनरमंद बनाकर नौकरी देना.

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आंकडे बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्लैगशिप योजना के तहत 2016-17 से 2019-20 तक राज्य में 66,68,917 ने प्रशिक्षण के लिए नामांकन लिया, जिसमें से मात्र 18567 प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को ही नौकरी मिली है.

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न प्रशिक्षण देने का लक्ष्य पूरा हुआ, न ही नौकरी दे पाये

प्रधानमंत्री कौशल विकास मिशन की जब 2015 में शुरूआत की गयी थी, तब साल 2020 तक एक करोड लोगों को प्रशिक्षण देने लक्ष्य रखा गया था. साल 2020 आने को है, लेकिन बहुमत वाली डबल इंजन की सरकार जब प्रशिक्षण देने के लक्ष्य को भी पूरा नहीं कर पायी तो नौकरी दे पाने का सवाल ही नहीं उठता है.

बता दें कि इस योजना को शुरू करने के पीछे का उद्देश्य कम पढ़े-लिखे या बीच में ही स्कूली पढ़ाई छोड़ चुके युवाओं को रोजगार मुहैया कराना भी है.

राजधानी रांची से 10 हजार में से मात्र 2500 को मिला जॉब

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के आंकडों के अनुसार, प्रशिक्षण लेने के लिए नामांकन लेने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी ही हुई है. आंकड़ों के अनुसार 2016-17 में 10,920, 2017-18 में 51,383, 2018-19 में 1,06, 841, 2019-20 में 64,99,773 लोगों ने प्रशिक्षण के लिए नामांकन लिया है.

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जिसमें से मात्र 1,75,146 को ही प्रशिक्षण मिल सका है. प्रशिक्षित हुए ट्रेनी में से 1,28,926 को ही प्रमाणित किया गया और इसमें से नियुक्त होने वाले युवाओं की संख्या महज 18,567 ही है. दाखिला लेने वालों और चयनित हुए लोगों की संख्या में बड़ा फर्क है.

अगर जिलों की बात करें तो, सबसे ज्यादा राजधानी रांची में 10,305 दाखिले हुए, जबकि नियुक्ति महज 2564 युवाओं की हो पायी है. सबसे कम पाकुड़ जिले से जहां दाखिला 16,557 ने लिया था और नियुक्ति 113 लोगों की ही हो पाई. दूसरा सिमडेगा जिला है जहां 17, 407 दाखिलों में केवल 178 नियुक्तियां ही हो पाई हैं.

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