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झारखंड कांग्रेसः आखिर क्यों दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं विधायक, पसोपेश में प्रदेश नेतृत्व

Gyan Ranjan

Ranchi : झारखंड कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. कोरोना की लहर भले ही कम हो गयी हो लेकिन कांग्रेस के भीतर चल रहा झकझूमर थमने का नाम नहीं ले रहा है. रांची से लेकर दिल्ली तक पार्टी नेताओं की धमक राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बनी हुई है. राज्य की राजधानी से लेकर देश की राजधानी तक यह चर्चा शुरू हो गयी है कि आखिर क्यों झारखंड कांग्रेस में कोहराम मचा है? इस बात को लेकर कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व भी पसोपेश में है.

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झारखंड कांग्रेस के छह विधायकों का दिल्ली दौरा प्रदेश नेतृत्व की परेशानी बढ़ाये हुए है. जिस तरह से कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ संगठन में विरोध देखा जा रहा है, उससे प्रदेश नेतृत्व हलकान है. पहले पार्टी की चार महिला विधायकों का सरकार और संगठन के खिलाफ बगावती तेवर और उसके बाद जिला अध्यक्षों और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों का खुला विरोध, प्रदेश नेतृत्व को बैचैन किये हुए है. यही वजह है कि अचानक प्रदेश अध्यक्ष को जिला अध्यक्षों सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक बुलानी पड़ी.

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सरकार और संगठन से नाराज महिला विधायकों को विधायक दल के नेता ने अपने कार्यालय में बुला कर समझाया. उनकी मांगों को सरकार के समक्ष रखने का भरोसा दिया. प्रदेश अध्यक्ष को संगठन के लोगों को समझाने में नाकों चने चबाने पड़े. संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस्तीफा तक देने की धमकी दे डाली है. अभी यह मामला चल ही रहा था कि पार्टी के छह विधायकों का अचानक दिल्ली जाना प्रदेश नेतृत्व के लिए परेशानी का सबब गया.

हालांकि पार्टी की तरफ से यह जरूर कहा जा रहा है कि सभी विधायक निजी कार्य से दिल्ली गये थे. लेकिन राजनितिक गलियारे में कांग्रेस विधायकों का दिल्ली दौरा चर्चा का विषय बना हुआ है. विधायक इरफ़ान अंसारी का कहना है कि वह अपने पिता का इलाज कराने दिल्ली गये थे. विधायक दीपिका पाण्डेय सिंह का कहना है कि उन्हें उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया है और वहां विधानसभा का चुनाव होना है इसलिए वह दिल्ली गयी थीं. विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह का कहना है कि वह पारिवारिक कार्यों से दिल्ली प्रवास पर थीं.

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दिल्ली जाने से पहले किसी बड़े नेता से नहीं लिया है समय

कांग्रेस पार्टी में मचे कोहराम की चर्चा के पीछे मूल वजह यह बतायी जा रही है कि कांग्रेस पार्टी के विधायकों ने दिल्ली जाने से पहले पार्टी के किसी बड़े नेता से समय नहीं लिया था. इससे पहले भी कई विधायक दिल्ली गये थे लेकिन बड़े नेता से समय नहीं लिया था. प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव से मिल कर लौट आये थे. चर्चा तो यह है कि कांग्रेस विधायकों पर पिछले दो महीने से डोरे डाले जा रहे हैं. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि दिल्ली में किसी गुप्त एजेंडे पर भी काम चल रहा है.

नाराजगी की वजह, सरकार में नहीं हो रही कांग्रेस विधायकों की पूछ

पिछले डेढ़ महीने से कांग्रेस के विधायक और वरिष्ठ पदाधिकारी सरकार और संगठन के कार्यों से नाराज चल रहे हैं. इसकी मूल वजह सरकार में कांग्रेस को महत्व नहीं दिया जाना बताया जा रहा है. विधायकों को उनके क्षेत्र में अधिकारी महत्व नहीं दे रहे हैं. बोर्ड-निगमों का गठन और 20 सूत्री कार्यान्वयन समिति का गठन नहीं होना भी नाराजगी की मुख्य वजह है. कुछ दिन पहले धुमकुड़िया भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्य के वित्त मंत्री को नहीं बुलाया जाना भी कांग्रेस नेताओं को पच नहीं रहा है. जबकि यह कार्यक्रम मुख्य रूप से उरांव जनजाति के लिए था.

क्यों सीएलपी नेता को कहना पड़ा कांग्रेस विधायक एकजुट हैं?

इस बीच कांग्रेस विधायकों के दिल्ली जाने पर कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम को यह कहना पड़ा कि पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली गये सभी विधायक निजी कार्य से गये थे. उन्होंने कहा कि विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह पारिवारिक कार्यों से दिल्ली गयी थीं. इरफ़ान अंसारी अपने पिता का इलाज करवा रहे थे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सभी विधायकों ने दिल्ली जाने से पहले उन्हें सूचना दी थी. सवाल यह उठ रहा है कि जब सभी विधायक निजी कार्यों से ही दिल्ली गये हैं तो आखिर विधायक दल के नेता को यह क्यों कहना पड़ रहा है कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं.

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