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Jharkhand Panchayat Election : वार्ड मेंबर बनने में इस बार भी खास द‍िलचस्‍पी नहीं, पिछली बार जमशेदपुर सदर प्रखंड में 161 पद रह गये थे खाली

Raj kishor
Jamshedpur : पंचायत चुनाव को लेकर जमशेदपुर सदर प्रखंड क्षेत्र में चुनावी माहौल बनना शुरू हो गया है. बावजूद इसके जिस पद को लेकर अब तक कोई खास सरगर्मी बनती नहीं दिख रही है, वह है वार्ड मेंबर का पद. इस पद को लेकर कम ही लोग अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. माहौल ठीक उसी तरह का है जैसा पिछले चुनाव के दौरान इस पद को लेकर था. वैसे तो जमशेदपुर सदर प्रखंड अंतर्गत अंतर्गत कुल 711 वार्ड मेंबर होने हैं, लेकिन पिछले चुनाव भी भी इस पद को लेकर लोगों ने कम ही दिलचस्पी ली थी. नतीजन वार्ड मेंबर के 161 पद खाली रह गये थे.

इस बार भी स्थिति उससे ज्यादा बेहतर नहीं दिख रहा है. यह अलग बात है कि प्रखंड क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी तेज होने के साथ हो सकता है कि इस पद के लिए भी विभिन्न क्षेत्रों से कई दावेदार सामने आएं. क्षेत्र के चुनावी माहौल से वाकिफ लोगों की मानें तो इस बार भी स्थिति में कुछ ज्यादा सुधार नहीं होनेवाली है. आशंका तो यहां तक जतायी जा रही है कि कहीं स्थिति पहले से भी खराब न हो जाये. खासकर जमशेदपुर प्रखंड के उन 35 पंचायतों में, जो अर्द्धशहरी क्षेत्र में आते हैं.
यह है वजह
ऐसे में सवाल यही उठता है कि आखिर क्या वजह है कि इन क्षेत्रों में वार्ड मेंबर के पद को लेकर लोगों की दिलचस्पी कम है. इस सवाल का जानकार सीधा जवाब देते हैं वार्ड सदस्य का सरकार की ओर से कोई मानदेय तय नहीं होना. इतना ही नहीं, वार्ड मेंबरों के अधिकार भी काफी हद तक सीमित ही है. रही बात जमशेदपुर सदर प्रखंड के 55 पंचायतों में शामिल उन 35 अर्ध शहरी पंचायतों की तो मनरेगा की तरह कोई योजना भी नहीं है, जिसमें वार्ड मेंबर की कुछ चल भी सके. यहां तक कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने में भी वार्ड मेंबर की अनुशंसा होना या नहीं होना कोई खास मायने नहीं रखता है. ऐसे में क्षेत्र की जनता भी वार्ड मेंबर के पास कम ही जाती है. किसी भी समस्या के समाधान के लिए क्षेत्र के लोग सीधे मुखिया से संपर्क साधते हैं. हां, वार्ड मेंबर की तब जरूरत पड़ती है जब किसी खास योजना को लेकर कार्यकारिणी की बैठक हो. उस तरह की बैठक में दो तिहाई वार्ड परिषद के सदस्य की उपस्थिति जरूरी रहती है. हालांकि, दूसरी ओर स्थिति यह भी है कि किसी मीटिंग में शिरकत करने को ट्रैवलिंग के लिए भी वार्ड मेंबर के लिए कोई फंड नहीं होता है, जबकि मुखिया आसानी से अपना वाउचर बना लेते हैं. कई मामलों में कार्यकारिणी की बैठक में यह बात भी सामने आयी है कि वार्ड मेंबर ने उसमें भी शिरकत नहीं की हो, जबकि उपस्थिति पंजी में वार्ड मेंबर के घर जाकर हस्ताक्षर करा लिया गया हो.
जोरशोर से उठ चुकी है सरकार से मानदेय देने की मांग
इन्हीं सारे कारणों को लेकर पिछले बार भी कई ऐसे वार्ड थे, जहां चुनावी मैदान में इक्के-दुक्के वार्ड मेंबर ही खड़े थे. इस कारण कई वार्ड में मेंबर निर्विरोध भी चुने गये थे. उसके बाद उन्होंने सरकार से मानदेय देने का मुद्दा जोरशोर से उठाया था. फिर भी इन क्षेत्रों के वार्ड मेंबर का मानदेय अब तक तय नहीं हो पाया है. यह अलग बात है कि सात वार्ड में एक उप मुखिया का चयन किया जाता है. जिनका उप मुखिया के रुप में चयन कर लिया गया, उनके कुछ मानदेय मिलने का रास्ता जरूर साफ हो गया. उसके बाद वार्ड मेंबरों को मानदेय देने का मुद्दा भी धीरे-धीरे शांत हो गया.

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