
Surjit Singh
विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने 25 जुलाई को विधानसभा में एक ई-मेल सार्वजनिक किया. ई-मेल राज्य के मुख्य सचिव को भेजा गया है. हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रघुवर दास के संरक्षण में उनके विभाग में जेबीवीएनएल के एमडी राहुल पुरवार भ्रष्टाचार कर रहे हैं.
राहुल पुरवार के कथित रिश्तेदार सुमित पुरवार ठेकेदारों से पैसे मांगते हैं. 26 जुलाई को विधायक अरुप चटर्जी ने भी विधानसभा में जोरदार तरीके से इस मामले को उठाया. 26 जुलाई को सत्ता पक्ष-विपक्ष के इन आरापों पर आक्रामक रहा.
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सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया और मांग की कि विपक्ष आरोपों को वापस ले. हालांकि विपक्ष जांच की मांग को लेकर अडिग रहा. सत्ता पक्ष से विधायक राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा में कहा कि मीडिया ने पत्र की वैधता पर सवाल उठाया है. दुर्भावना से प्रेरित होकर आरोप लगाया जा रहा है.
इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री रघुवर दास की चुप्पी भी चौंकाने वाली है. खबर है कि उनकी तबियत ठीक नहीं है. फिर भी वह विधानसभा में उपस्थित रह रहे हैं.
भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप मुख्यमंत्री रघुवर दास पर लगा है. पीठ पीछे नहीं. सामने से. वह भी विधानसभा में. कम-से-कम मुख्यमंत्री को जरुर स्पष्ट करना चाहिये था कि आरोप कैसे निराधार है. ऐसा ना करके वह एक बड़े मौके से चूक गये. इससे विपक्ष के आऱोपों को बल ही मिलेगा.
वैसे किसी भी सरकार या राजनेता के लिये बेहतर स्थिति यही होती है कि उस पर जो आरोप लगे, उसकी जांच कराये. ताकि दुध-का-दुध और पानी-का-पानी हो जाये.
सत्ता में रहने का फायदा भी तभी मिलता है. अगर एक बार सत्ता हाथ से गई तब जांच एजेंसियां कैसे और किस तरह जांच करती है, यह किसी से छिपा नहीं है.
सैंकड़ों उदाहरण हैं, जिसमें राजनेता व अफसरों का बुढ़ापा खराब हो गया. उदाहरण के लिये लालू प्रसाद को भी ले सकते हैं.
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संभव है, किसी ने मुख्यमंत्री रघुवर दास, जेबीवीएनएल और इसके एमडी राहुल पुरवार के खिलाफ गलत आरोप लगाये हो. पर, जो ई-मेल मुख्य सचिव को मिला है, उसमें कम-से-कम आधा दर्जन तथ्य ऐसे हैं, जो सवाल खड़े करते हैं. उसकी जांच होनी जरुरी है.
तभी सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों को खारिज करने की स्थिति में होगी. अन्यथा जेबीवीएनल के जो हालात हैं, उसमें लोग तो यही मानेंगे कि वहां भ्रष्टाचार हो रहा है और उस विभाग के मंत्री की हैसियत से मुख्यमंत्री रघुवर दास चुप हैं.
जिन तथ्यों की जांच होनी ही चाहिए, उनमें मुख्य ये है-
– क्या यह बात सच है कि जेबीवीएनएल के एमडी राहुल पुरवार के टेबल पर पिछले तीन माह से 19 करोड़ रुपये के भुगतान का काम लंबित है.
– सुमित कुमार पुरवार कौन है. ई-मेल में उसका जो मोबाइल नंबर 9709036921 दर्ज किया गया है, वह नंबर किसका है. क्या सुमित पुरवार नामक व्यक्ति सच में जेबीवीएनएल में सक्रिय है. वह सरकारी आदमी है या निजी हैसियत से काम कर रहा है.
– क्या यह सच है कि राहुल पुरवार ने अपने दिल्ली दौरे के वक्त जेबीवीएनएल के ठेकेदारों को बुलाकर उनसे बात की थी.
– ई-मेल करने वाले ने दावा किया है कि सितंबर 2018 में भी कंपनी की तरफ से एक शिकायत मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से की गयी. आखिर उस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई. जांच हुई या नहीं. जांच हुई तो क्या निष्कर्ष निकला. और जांच नहीं हुई, तो क्यों. किसने रोकी.
– अविनाश कुमार नामक व्यक्ति ने सात जुलाई 2019 को ई-मेल मुख्य सचिव को भेजा. मुख्य सचिव कार्यालय ने शिकायत को विभाग के पास भेज दिया. यह जानना दिलचस्प होगा कि 07 जून से लेकर 25 जुलाई तक विभाग ने उस शिकायत पत्र पर क्या कार्रवाई की.
– टाटा कंपनी की तरफ से एक शिकायत झारखंड सरकार के एंडी करप्शन विंग, सीबीआई , पीएमओ, सीवीसी से की गयी. इन संस्थानों के स्तर से भी पत्राचार किया गया होगा, उसमें भी जांच हुई या नहीं.




