Ranchi

संशोधित बिजली विधेयक के लिये JBVNL ने तैयार किया ड्राफ्ट, सब्सिडी जारी रखने का सुझाव

अन्य तीन कंपनियों की ओर से अब तक ड्राफ्ट तैयार नहीं

ऊर्जा विकास निगम की ओर से ऊर्जा विभाग को भेजी जायेगी एकत्रित फाइल

केंद्र सरकार ने दिया था पांच जून तक का समय

Ranchi: केंद्र सरकार की ओर से संशोधित बिजली विधेयक मसौदा जारी किया गया. इस मसौदा में राज्य सरकारों और बिजली कंपनियों से सुझाव या आपत्ति मांगी गयी थी. राज्य में चार बिजली कंपनियां है. लेकिन इस मसौदा में सुझाव या आपत्ति सिर्फ जेबीवीएनएल की ओर से तैयार की गयी.

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अन्य तीन बिजली कंपनियों की ओर से इस पर काम जारी है. जेबीवीएनएल की ओर से यह सुझाव और आपत्ति संबंधी ड्राफ्ट झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड को सौंप दिया गया है. जबकि अन्य कंपनियों की ओर से रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है. अन्य तीन निगमों की ओर से झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड को ड्राफ्ट मिलने के बाद, इसे विभाग भेजा जायेगा. जिसके बाद विभाग की ओर से ड्राफ्ट तैयार कर केंद्र को भेजा जायेगा. इस विधेयक के लिये आखिरी तारीख पांच जून है. जिसमें सभी राज्यों से सुझाव या आपत्ति संबधी ड्राफ्ट केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को सौंपना है.

 

सब्सिडी कॉस्ट और डीबीटी जारी रखने की मांग

जेबीवीएनएल की ओर से तैयार ड्राफ्ट में सब्सिडी और डीबीटी जारी रखने का सुझाव दिया गया है. जीएम कमर्शियल ऋषिनंदन ने बताया कि ड्राफ्ट में सब्सिडी कॉस्ट जारी रखने का सुझाव दिया गया है. ताकि लोगों को सब्सिडी का लाभ मिलते रहे. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में डीबीटी के जरिये दिये जाने वाले सब्सिडी लाभ को भी बनाये रखने का सुझाव दिया गया है.

राज्य में बिजली वितरण की स्थिति अलग-अलग है. ऐसे विधेयक लागू होने से, सभी अधिकार केंद्र को चले जायेंगे. और केंद्रीय एजेंसियां बिजली वितरण करेंगी. राज्य में अधिकांश लोग सब्सिडी के कारण बिजली ले पा रहे है. ऐसे में इससे उपभोक्ताओं में कमी आयेगी. सब्सिडी नहीं मिलने से बिजली वितरण में कमी आयेगी. अधिकारियों की मानें तो बिजली वितरण निजी हाथों में जाने से सबसे अधिक परेशानी किसानों को होगी. क्योंकि सब्सिडी का सबसे अधिक लाभ किसानों को ही मिलता है. ऊर्जा संचरण निगम की ओर से ड्राफ्ट तैयार है पर विकास निगम को यह नहीं दिया गया है.

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मिलाकर मसौदा तैयार करेगा विकास निगम

ऊर्जा विकास निगम के डीजीएम अशोक सिन्हा ने जानकारी दी कि तीन कंपनियों की ओर से ड्राफ्ट नहीं मिला है. जेबीवीएनएल की ओर से ड्राफ्ट दिया गया है. जिस पर ऊर्जा विकास निगम काम रहा है. लेकिन अन्य तीन कंपनियों से ड्राफ्ट मिलने के बाद, मिलाकर रिपोर्ट तैयार कर ऊर्जा विभाग को भेजा जायेगा.

यह काम उच्च स्तर पर किया जा रहा है. फिलहाल राज्य की ओर से रिपोर्ट जाने में समय लगेगा. राज्य में बिजली की चार कंपनियों में झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड, झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड, झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड और झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड है.

महंगी हो सकती है बिजली

राज्य की बिजली व्यवस्था अगर केंद्र के हाथों में जाती है. तो बिजली महंगी हो सकती है. राज्य के सात जिलों में डीवीसी बिजली सप्लाई करती है. जिनमें कोडरमा, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, गिरिडीह, चतरा और हजारीबाग है. निजीकरण होने से अन्य जिलों में बिजली आपूर्ति में सुधार तो होगा. लेकिन सब्सिडी में कटौती की जायेगी. जिससे बिजली महंगी होगी. वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू बिजली दर 5.75 रुपये है. जिसमें सब्सिडी 4.24 है. वहीं घरेलू शहरी में बिजली दर 6.25 रुपये है. जिसमें 2.75 रुपये सब्सिडी है. कमर्शियल बिजली की दर 6.25 है.

17 अप्रैल को जारी किया गया विधेयक

17 अप्रैल को केंद्र सरकार ने यह मसौदा लागू किया. विद्युत अधिनियम 2003 में सामान्य परिवर्तनों के साथ इस मसौदा को लागू किया गया. संभावनाएं व्यक्त की जा रही है कि विधेयक के कानून बनते ही बिजली का निजीकरण हो जायेगा. सारे अधिकार केंद्र सरकार को मिल जायेगा.

पूर्व में 21 दिनों में राज्यों से इस मसौदा पर सुझाव मांगा गया था. लेकिन कोरोना लाॅकडाउन के बाद इसे 5 जून तक बढ़ाया गया. लेकिन अभी तक राज्य की अन्य तीन कंपनियों की ओर से ड्राफ्ट तैयार नहीं किया गया है.

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