
Anand Rao
Jamshedpur: नाट्य कला को संजोए रखनेवाले जमशेदपुर की एकमात्र सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था जयालक्ष्मी नाट्य कला मंदिरम अपने स्थापना काल से भवन के लिए बाट जोत रहा है. 5 नवंबर 1995 को नाट्य कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसकी स्थापना की गई थी जिसके संस्थापक अध्यक्ष ए बाबूराव और मुख्य संरक्षक समाजसेवी बेली बोधनवाला हैं. एक मुख्य संरक्षक पूर्व उपमुख्यमंत्री सुधीर महतो का निधन हो चुका है. संस्था ने वर्ष 2013 के दिसंबर महीने में टाटा स्टील से पत्राचार कर भवन की मांग की थी. अध्यक्ष ए बाबू राव बताते हैं कि भवन के लिए प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी थी लेकिन 20 जनवरी 2014 को सुधीर महतो की अकस्मात मृत्यु हो जाने पर पूरा मामला खटाई में पड़ गया और आज 27 वर्ष बाद भी संस्था का अपना भवन नहीं है. वैसे टाटा स्टील अर्बन सर्विसेज की ओर से इन्हें शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अवस्थित सामुदायिक भवन में कला सिखाने की अनुमति प्रदान की गई है जिसमें काशीडीह भालूबासा, सोनारी, बारीडीह और रामदास भट्टा सेंटर शामिल है. वर्तमान में इन क्षेत्रों से लगभग 29 बच्चे नाट्य कला की ट्रेनिंग ले रहे हैं.
अध्यक्ष के अनुसार इस कला संस्था से मोहम्मद हबीब हिंदी सिनेमा जगत में और जीत राय हांसदा आदिवासी फिल्म में अपना जलवा दिखा चुके हैं. इसके अलावा भी कई कलाकार विभिन्न भाषाओं की फिल्मों में अपने अभिनय की प्रस्तुति दे रहे हैं. लेकिन अपना भवन नहीं होने से सेंट्रल कार्यालय और कला से संबंधित कई सुविधाओं से वंचित है जिस वजह से नाट्य कला के अलावा गीत, संगीत, नृत्य एवं बच्चों की इच्छा के अनुसार उनकी कला को निखारने से वंचित हो जा रहे हैं. संस्था का मानना है कि अपना भवन होने से ज्यादा से ज्यादा जमशेदपुर के अलावा दूसरे जिले के बच्चों को भी कला सिखाने का मौका मिलेगा. संस्था जल्द ही जिले के उपायुक्त सहित राज्य और केंद्र सरकार से भवन के लिए सहयोग करने की मांग करेगी. फिलहाल संस्था भारत के अलावे विभिन्न देशों में भारतीय साहित्य को नाट्य कला के माध्यम से संजोए रखने के लिए प्रयासरत है.


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