
New Delhi : स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने भारतीय खेल के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है. नीरज ने ओलंपिक खेलों में एथलेटिक्स में पहला गोल्ड मेडल जीता है. वहीं, ओलंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत को 13 साल बाद दूसरा गोल्ड मिला. बीजिंग ओलंपिक 2008 में पहली बार स्वर्ण पदक जीतने का कारनामा दिग्गज शूटर अभिनव बिंद्रा ने किया था.
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नीरज चोपड़ा की इस शानदार प्रदर्शन पर 6 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है. संभवत भारत के खेल इतिहास में किसी खिलाड़ी को दी गयी अब तक की सबसे बड़ी राशि है. इसके साथ ही नीरज को हरियाणा सरकार में क्लास वन की नौकरी देने की भी बात कही है.

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खेल का सफर
नीरज चोपड़ा एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज के बाद किसी विश्व चैम्पियनशिप स्तर पर एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक को जीतने वाले वह दूसरे भारतीय हैं. पोलैंड में आयोजित 2016 आइएएएफ U20 विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की थी. इस पदक के साथ साथ उन्होंने एक विश्व जूनियर रिकॉर्ड भी स्थापित किया है.
2016 के दक्षिण एशियाई खेलों में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए 82.23 मीटर तक भाला फेंक कर स्वर्ण पदक जीता था. 2016 में ही दक्षिण एशियाई खेल में भी नीरज को गोल्ड मेडल मिला था. इसके साथ ही 2018 में गोल्डकोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी नीरज ने स्वर्ण पदक हासिल किया था.
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जीवन का सफर
नीरज चोपड़ा का जन्म 24 दिसंबर, 1997 को हरियाणा के पानीपत के खंडरा में जाट किसान परिवार में हुआ था. नीरज के पिता सतीश कुमार किसान हैं. उनकी मां सरोज देवी गृहिणी हैं और उनकी दो बहनें हैं.
जयवीर से प्रेरित होकर भाला फेंकने लगे
पानीपत स्टेडियम में अभ्यास करने वाले जयवीर (जय चौधरी) को देखने के बाद नीरज की 11 साल की उम्र में भाला फेंकने में रुचि विकसित हुई.
2014 में, नीरज ने अपना पहला भाला 7000 रुपये का खरीदा. बाद में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, उन्होंने राष्ट्रीय शिविर में 1 लाख रुपये का भाला खरीदा.
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