
Jamtara : मनरेगा में वेंडरों द्वारा फर्जीबाड़ा किया जा रहा है. वेंडर की मार्फत पदाधिकारी मनरेगा में लूट मचाये हुए हैं. इसका खुलासा मनरेगा के लोकपाल ने किया है. लोकपाल प्रवीण ठाकुर ने कुंडहित प्रखंड के एक वेंडर को 86 लाख 60 हजार भुगतान मामले में पकड़ा है. वेंडर को रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन लोकपाल को रॉयल्टी जमा का कोई आवश्यक कागजात नहीं दिखा पाया. लोकपाल ने कहा कि आखिर वेंडर के द्वारा जो भुगतान लिया गया है, उसकी रॉयल्टी जमा होगी, उसका कोई कागजात होना चाहिए. लेकिन वेंडर कुछ नहीं दिखा पाया.
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वेंडर ने इनके विरुद्ध लिया भुगतान
राजमिस्त्री के एवज में 11 लाख 53 हजार 431 रुपये, अन्य मटेरियल में 3 लाख 86 हजार 656, फिर राजमिस्त्री में 2 लाख 98 हजार 701 और 39 हजार 171 रुपये का भुगतान लिया है.
लोकपाल ने कहा कि यह वर्ष 2017-18 का मामला है. मामाल वेंडर परिमल घोष (टिन नंबर 20 AZYPG315581ZQ) से जुड़ा है. लोकपाल ने आगे बताया कि जब वह जांच में गए तो वेंडर ने कोई रॉयल्टी जमा का कागजात नहीं दिखा पाया. उसे कागजात दिखाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया. लेकिन 15 दिन के बाद भी कोई कागजात नहीं दिखाया.
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डीडीसी को 29 जून को लिखित दी गई जानकारी
लोकपाल ने कहा कि इसकी लिखित जानकारी डीडीसी को 29 जून 2020 को दी गई. लेकिन कोई करवाई नहीं हुई. कहा कि अब मनरेगा आयुक्त को लिखा जाएगा. रॉयल्टी जमा नहीं करने व सरकार के राजस्व की चोरी को लेकर मनरेगा आयुक्त को लिखा जाएगा.
तत्कालीन डीसी गणेश कुमार ने भी मनरेगा में कुशल मजदूरों की राशि वेंडर के खाते में हस्तांतरित होने के मामले में गड़बड़ी को पकड़ा. उन्होंने सभी बीडीओ को पत्र लिखा. जिसका ज्ञापाक 529 व दिनांक 4 जुलाई 2020 है. लिखा कि एक कुशल मजदूरों का मास्टर रोल जेनरेट नहीं कर राजमिस्त्री की राशि को सीधे वेंडर के खाते में हस्तानतरित किया गया. जो गबन का मामला प्रतीत हो रहा है. जिसकी वसूली करने का निर्देश दिया गया. इस प्रकार सिर्फ कुंडहित प्रखंड में कुल एक करोड़ 51 लाख 649 रुपये की वसूली का निर्देश दिया है.
मनरेगा वेंडर का सिर्फ बिल होता है पास
सभी बीडीओ मनरेगा के वेंडरों के बिल पास कर लाखों की कमाई करते हैं. कहीं भी वेंडरों की कोई दुकान नहीं है. एक दो वेंडरों ने ही कुछ-कुछ मटेरियल रखा है. असल मे लाभुक बाजार की दुकानों से मटेरियल खरीदते हैं. और बिल वेंडरों से लेते है. इसके एवज में वेंडर 5 प्रतिशत की दर से राशि की वसूली करते हैं.
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