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पंचायत सचिव नियुक्ति परीक्षा : भिक्षाटन की, मृत्यदंड मांगे तब भी नहीं पिघली सरकार, अभी भी है नियुक्ति का इंतज़ार

Rahul Guru
Ranchi : 21 साल के झारखंड में मुख्यमंत्री कोई भी हो. सरकार किसी भी पार्टी की रही हो. अगर कोई ठगा गया तो वो यहां के युवा. युवा ठगे गए हैं रोजगार के नाम पर. इस बात को समझने का बेहतरीन उदाहरण है पंचायत सचिव नियुक्ति परीक्षा.

पांच लाख युवाओं को रोजगार देने और नियुक्ति वर्ष की घोषणा करने वाली सरकार ने भी पंचायत सचिव के सफल उम्मीदवारों को नियुक्त नहीं किया. सफल उम्मीदवारों ने बीते तीन साल में कई बार आंदोलन किया. पुलिस की लाठियां खायीं. भिक्षाटन किया. यहां तक की राष्ट्रपति से नियुक्ति न दे पाने की स्थिति में मृत्युदंड तक मांगा. ये उम्मीदवार साल 2017 में निकले विज्ञापन का एप्लीकेशन देने के बाद बीते तीन साल से फाइनल मेरिट लिस्ट का इंतजार कर रहे हैं.

जानिए विज्ञापन के बारे

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने वर्ष 2017 में विज्ञापन निकाला था. इसमें छह तरह के पोस्ट थे. इसमें दो तरह के पोस्ट जिला स्तर के थे. पंचायत सचिव पद के लिए लिखित परीक्षा 21, 28 जनवरी और चार फरवरी 2018 को हुई.

सफल अभ्यर्थियों की स्किल और टाइपिंग टेस्ट एक से आठ जुलाई 2019 तक हुआ. उसके बाद इसमें सफल अभ्यर्थियों का डाक्यूमेंट्स वेरीफिकेशन 27 से 31 अगस्त और तीन से सात सितंबर 2019 तक दो पालियों में किया गया. तब से लेकर अब तक उम्मीदवार रिजल्ट का ही इंतज़ार कर रहे हैं.

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हाईकोर्ट भी दे चुका है आदेश

हाईकोर्ट ने पंचायत सचिव नियुक्ति के अंतिम परिणाम जारी करने को लेकर 03 दिसंबर 2020 को आदेश किया था. झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने जेएसएससी के सचिव को इस मामले में आठ सप्ताह में परिणाम जारी करने पर निर्णय लेने का आदेश दिया था. इसके बाद अदालत ने उक्त याचिका को निष्पादित कर दिया. इस संबंध में ओम कपूर सहित सहित अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी.

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नौकरी दी जाये अन्यथा दें मृत्यु दंड

पंचायत सचिव उम्मीदवारों ने तीन मई 2021 को ‘राष्ट्रपति हमें बचा लीजिए’ कार्यक्रम चलाया. इस कार्यक्रम के तहत अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर मार्मिक गुहार लगायी. अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति से ये निवेदन किया कि पंचायत सचिव परीक्षा का परिणाम जारी कर उन्हें शीघ्र नौकरी दी जाये. अन्यथा उन्हें मृत्यु दंड दिया जाये. अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में राज्य में चरम पर फैली बेरोजगारी का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे 5000 पंचायत सचिव अभ्यर्थी कानून, कोर्ट और सरकार के बीच पिस कर रह गये हैं. सिर्फ 5000 पंचायत सचिव अभ्यर्थी ही नहीं बल्कि अन्य बहाली के हजारों अभ्यर्थियों का जीवन काल के गर्त में समाया हुआ है.

मोरहाबादी में किया आंदोलन

अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए पंचायत सचिव की परीक्षा में सफल उम्मीदवारों के 11 अक्टूबर 2020 से लेकर लगभग एक महीने का अनशन भी किया. इस दौरान उम्मीदवारों ने न केवल नारे लगाये बल्कि भिक्षाटन किया. इसके बाद मुख्यमंत्री आवास घेरने को लेकर पुलिस की लाठियां भी खायी. मोरहाबादी में पंचायत सचिव अभ्यर्थियों का आन्दोलन को समाप्त हुए नौ महीने हो चुके हैं पर नतीजा शून्य है.

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