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टाना भगत इंडोर स्टेडियम बना ट्रांजिट क्वारेंटाइन सेंटर, परिसर को सैनिटाइज करने की रहेगी चुनौती 

Ranchi: रांची के होटवार स्थित मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का उपयोग अब ट्रांजिट क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में किया जा रहा है. कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई में इसका उपयोग किया जाने लगा है. पूर्व से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में बिरसा मुंडा मुख्य स्टेडियम का उपयोग क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में हो रहा है. 

रांची जिला प्रशासन ने अब टाना भगत इंडोर स्टेडियम को भी ट्रांजिट क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में इस्तेमाल करने का फैसला लिया है. 22 मई को स्टेडियम के अंदर प्लेइंग एरीना को मैट से पाट दिया गया था. इंडोर स्टेडियम में ट्रेन से आनेवाले मज़दूरों को अपने गृह जिले भेजे जाने से पहले एक-दो दिनों के लिए ठहराया जाएगा. उनके लिए भोजन की भी व्यवस्था होगी.

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अभी ट्रांजिट क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में प्रभात तारा मैदान व HEC (एचइसी)-पारस अस्पताल का उपयोग किया जा रहा है. जगह की कमी के चलते यहां पर श्रमिक भरी गर्मी में भी पेड़ों की छांव के भरोसे ही समय काट रहे थे. ज़रूरत पड़ने पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के अन्य इंडोर स्टेडियमों के भी उपयोग में लाए जाने की संभावना है.

ट्रांज़िट क्वारेंटाइन सेंटर है क्या? 

ट्रेन के द्वारा हज़ारों मज़दूर लगातार अन्य राज्यों से झारखंड वापस लौट रहे हैं. गृह जिला भेजे जाने से पूर्व उनकी स्क्रीनिंग व अन्य जानकारियां इकट्ठी की जाती हैं. इस प्रक्रिया के बाद मज़दूरों को उनके गृह जिले के लिए बड़े वाहनों से भेजा जाता है. इस कार्य के दौरान मज़दूरों को जिन सेंटरों में अधिकतम एक-दो दिनों के लिए रोका जाता है, उन सेंटरों को ही ट्रांज़िट क्वारेंटाइन सेंटर कहा जाता है.

प्लेइंग एरीना को नुकसान का खतरा 

टाना भगत इंडोर स्टेडियम का प्लेइंग एरीना वुडेन सरफेस से बना है. ऐसे में जिला प्रशासन को ये सुनिश्चित कर लेना होगा कि ट्रांज़िट क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में यूज़ हो रहे टाना भगत इंडोर स्टेडियम के प्लेइंग एरीना को कोई भी नुकसान न पहुंचे. सरकारी व निजी कार्यक्रमों के दौरान इंडोर स्टेडियम का अनुभव अब तक खराब ही रहा है. उपयोग के बाद स्टेडियम को पूर्व की तरह बनाये रखने के मामले में लापरवाही की शिकायतें आ चुकी हैं.

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सैनिटाइज कराये बिना खेल शुरू कराना कठिन 

कोरोना के खतरे के कारण राज्य सरकार, JSSPS व अन्य खेल संघों के खिलाड़ियों का अभ्यास मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में पूरी तरह से बंद है. कॉम्प्लेक्स क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में प्रयोग किया जा रहा है. ऐसे में जब कॉम्प्लेक्स खिलाड़ियों के लिए खोले जायेंगे तो पूरे परिसर को सैनिटाइज करने की बड़ी चुनौती भी होगी. JSSPS में 8 से लेकर 12 साल तक के लगभग 400 कैडेट प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं. ऐसे में सैनिटाइज किये बिना स्पोर्ट्स ट्रेनिंग शुरू कराना कठिन टास्क होगा.

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