Opinion

क्या किसी राज्यपाल को हत्याओं के लिए प्रेरित करने का हक है?

Faisal  Anurag

‘‘ ये लड़के जो बंदूक लिए फिजूल में अपने लोगों को और पुलिस के जवानों को मार रहे हैं. क्यों मारते हो इन्हें. उन्हें मारो जिन्होंने तुम्हारा मुल्क लूटा है. कश्मीर की दौलत लूटी है.” हत्या को न्यायसंगत ठहराने का यह बयान किसी सामान्य व्यक्ति का नहीं है. यह बात जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल सतपाल मल्लिक ने कही है.

उनके इस बयान पर पूरी घाटी में राजनीतिक विवाद गहरा हो गया है. सतपाल मल्लिक ने राज्यपाल के पद पर रहते हुए इस तरह का गैर जिम्मेदाराना बात कर आंतकियों का हौसला ही बढ़ाया है, क्योंकि घाटी में अनेक ऐसे राजनीतिकर्मियों और नेताओं के साथ पत्रकारों की निर्मम हत्या पहले भी हो चुकी है.

इसमें हुर्रियत के कई नेता भी शामिल हैं. राज्यपाल के इस बात का उमर अब्दुल्ला सहित अनेक नेताओं ने कड़ा विरोध किया है. अब्दुल्ला ने सतपाल मल्लिक के बयान पर केंद्र सरकार की राय मांगी है. उन्होंने कहा है कि क्या केंद्र की भी यही सोच है. हिंसा के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे इस राज्य में किसी भी संवैधानिक पद पर बड़े व्यक्ति ने इस तरह से हिंसा की वकालत नहीं की है.

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राज्य का दायित्व प्रत्येक नागरिक की जान और माल की हिफाजत करना है. भारत एक कानून से संचालित देश है. कानून को हाथ में लेने या इसके लिए प्रेरित करने का अधिकार किसी को भी नहीं है. इस तरह की बातों से हिंसा करनेवालों का मनोबल ही मजबूत होता है.

क्या राज्यपाल को यह संज्ञान नहीं है. वे एक पुराने नेता हैं और समाजवाद से भाजपा के हिंदुत्व तक की यात्रा कर चुके हैं. जम्मू और कश्मीर के पहले वे बिहार के राज्यपाल भी रह चुके हैं.

मल्लिक के बयान के बाद घाटी में राजनीतिक रोष और गहरा गया है. हिंसा में उबल रहे एक राज्य में शांति के लिए इस तरह की बातें न केवल आत्मघाती कदम है, बल्कि कमजोर हो रहे आतंक की घटनाओं को बढ़ा भी सकते हैं.

यह विदित हो कि घाटी में शांति की बात करने वालों ने हिंसा की राह चल रहे समूह बेहद नाराज हैं. इस राज्य में अनेक नेताओं का सुरक्षा प्रबंध वापस लिया जा चुका है. जबकि यह इतिहास समाने है कि जब कभी आतंकी कमजोर होते हैं तो किसी ना किसी  नेता की हत्य कर दी जाती है. इसमें हुर्रियत के नेताओं को भी अतीत में बख्शा नहीं गया है.

ईमानदार और भारत की वकालत करने वाले अनेक नेताओं को मौत के घाट उतारा जा चुका है. पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या का मामला अब भी रहस्य बना हुआ है. आखिर जांच एजंसियों ने इस हत्या के गंभीर तहकीकात को नजरअंदाज क्यों किया है, अनेक बार यह सवाल उठाया गया है. सतपाल मल्लिक उस आग से खेल रहे हैं जो बेहद खतरनाक है.

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गृहमंत्री और रक्षामंत्री हाल ही में राज्य का दौरा कर चुके हैं. रक्षा मंत्री ने तो यहां तक कहा है कि उनकी सरकार हर तरह की बातचीत के लिए तैयार है. सतपाल मल्लिक को लेकर राज्य के अनेक राजनेता मुखर रहे हैं. उन्हें केंद्र के एजेंट के तौर पर पेश करने वाले नेताओं के लिए यह बयान न केवल राज्यपाल बल्कि केंद्र की नीति को असंगत बताने का सिलसिला तेज हो रहा है.

कह तक केंद्र सरकार ने इस बयान पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दिया है. उमर अब्दुल्ला जैसे नेता पूछ रहे हैं, केंद्र को मल्लिक के बयान पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए. क्या इसमें केंद्र की भी सहमति है, अब्दुल्ला ने ट्वीट किया है:  यह शख्स जो जिम्मेदार व्यक्ति हैं, एक संवैधानिक पद पर हैं. कह रहे हैं कि जो भ्रष्ट नेता हैं उन्हें मार डालो. ऐसे शख्स को गैर कानूनी हत्याओं और कंगारू कोर्ट के बारे में बात करने के पहले पता करना चाहिए कि इसपर दिल्ली की क्या राय है..

भाजपा पीडीपी सरकार टूटने के बाद यह राज्यपाल बनकर आये हैं. 2018 से ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है. इस दौरान विधानसभा भंग जिन हालातों में किया गया था, उसे लेकर सतपाल मल्लिक विवादो में घिरे हैं. इस दौरान भी उनपर घाटी के अनेक नेताओं और समूहों ने राजनीतिक भेदभाव का आरोप लगाया है.

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