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#INXMediaCase: सुप्रीम कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में ED से मांगे दस्तावेज

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिया कि आइएनएक्स मीडिया धन शोधन मामले से संबंधित दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में पेश किये जायें ताकि उनका अवलोकन किया जा सके. कोर्ट ने इसके साथ ही चिदंबरम की जमानत के लिये याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली.

न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय की पीठ ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को यह निर्देश दिया. पीठ ने इस अपील पर सुनवाई पूरी करते हुए कहा कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जायेगा.

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चिदंबरम अपराध की रकम को हड़प गये: ईडी

इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष दावा किया कि पूर्व वित्त मंत्री हिरासत में होने के बावजूद महत्वपूर्ण गवाहों पर अपना ‘प्रभाव’ रखते हैं.

उन्होंने कहा कि जांच के दौरान निदेशालय ने 12 बैंक खातों की पहचान की है जिनमें इस अपराध से मिली रकम जमा की गयी और एजेंसी के पास ऐसी 12 संपत्तियों का भी ब्योरा है जिन्हें कई दूसरे देशों में खरीदा गया है.

प्रवर्तन निदेशालय ने चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दावा किया था कि उन्होंने ‘निजी लाभ’ के लिये वित्त मंत्री के ‘प्रभावशाली कार्यालय’ का इस्तेमाल किया और इस अपराध की रकम को हड़प गये.

निदेशालय ने यह भी दावा किया था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री होने की वजह से चिदंबरम बहुत ही चतुर और प्रभावशाली व्यक्ति हैं और इस समय उनकी उपस्थिति ही गवाहों को भयभीत करने के लिये काफी है.

सुप्रीम कोर्ट इस समय चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज करने के दिल्ली हाइकोर्ट के 15 नवंबर के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता 74 वर्षीय पी चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत में दलील दी है कि उन्हें ‘अनुचित तरीके’ से पिछले 99 दिन से सिर्फ इसलिए जेल में रखा गया है क्योंकि वह आइएनएक्स मीडिया धन शोधन मामले में मुख्य आरोपी कार्ति चिदंबरम के पिता हैं और इस मामले से उन्हें जोड़ने के लिये उनके खिलाफ ‘एक भी साक्ष्य’ नहीं है.

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21 अगस्त को चिदंबरम हुए थे गिरफ्तार

चिदंबरम को पहली बार आइएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में सीबीआइ ने 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था. इस मामले में उन्हें शीर्ष अदालत ने 22 अक्टूबर को जमानत दे दी थी.

इसी दौरान 16 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय ने आइएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले से मिली रकम से संबंधित धन शोधन के मामले में चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया. पूर्व वित्त मंत्री इस समय 11 दिसंबर तक के लिये न्यायिक हिरासत में हैं.

सिब्बल ने चिदंबरम को जमानत देने से इंकार करने संबंधी दिल्ली हाइकोर्ट के फैसले का हवाला दिया और कहा कि इसमें यह माना गया है कि पूर्व मंत्री के न तो भागने का खतरा है और न ही वह साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने के किसी प्रयास में संलिप्त रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इस निष्कर्ष पर पहुंचने के बाद भी अदालत ने चिदंबरम की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि अपराध गंभीर है और जमानत दिये जाने से देश में गलत संदेश जायेगा.

सीबीआइ ने 15 मई, 2017 को एक मामला दर्ज किया था जिसमें आरोप था कि 2007 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड द्वारा आइएनएक्स मीडिया समूह को 305 करोड़ रूपये का विदेशी निवेश प्राप्त करने की मंजूरी देने में अनियमित्तायें हुईं. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी धन शोधन का मामला दर्ज किया.

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