Ranchi

#TerrorFunding के आरोपित महेश अग्रवाल और अमित अग्रवाल की अंतरिम राहत 30 मई तक बढ़ी

Ranchi: टेरर फंडिंग मामले में आरोपित आधुनिक पावर के एमडी महेश अग्रवाल और ट्रांसपोर्टर अमित अग्रवाल उर्फ सोनू अग्रवाल पर उत्पीड़क कार्रवाई पर लगायी गयी रोक को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन की अदालत ने सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद अंतरिम राहत को 30 मई तक बढ़ाने का आदेश दिया.

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पूर्व में अदालत उनके खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक लगा चुकी है. बता दें कि चतरा के आम्रपाली कोल परियोजना में काम के बदले नक्सलियों को लेवी दी जाती थी, इसकी जांच एनआइए कर रही है. इसके अलावा अदालत ने जिन मामलों में अंतरिम आदेश पारित है, उन सभी मामलों की अंतरिम आदेश को 30 मई तक बढ़ाने का आदेश दिया है. बता दें कि पूर्व में हाईकोर्ट ने इन दोनों पर निचली अदालत की उत्पीड़क कार्रवाई पर रोक लगायी थी.

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हाइकोर्ट ने महेश अग्रवाल और अमित अग्रवाल पर उत्पीड़क कार्रवाई पर लगायी थी रोक

झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस एके गुप्ता व जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में 10 फरवरी को टेरर फंडिंग मामले में आरोपित आधुनिक पावर के एमडी महेश अग्रवाल और ट्रांसपोर्टर अमित अग्रवाल उर्फ सोनू अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई हुई थी. सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों को अंतरिम राहत प्रदान की थी.

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नक्सलियों को आर्थिक मदद करने का आरोप

एनआइए की ओर से इन दोनों के खिलाफ दर्ज किये गये मामले में इनपर नक्सलियों को आर्थिक मदद करने का आरोप लगाया गया है. एनआइए का कहना है कि दोनों शांति कमेटी के माध्यम से नक्सलियों को पैसे देते हैं.

नक्सली इन पैसों से हथियार खरीद पुलिस के खिलाफ इस्तेमाल करते हैं. यह बात जांच में भी सामने आयी है. एनआइए ने दोनों के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया है. इस पर संज्ञान लेते हुए एनआइए की विशेष कोर्ट ने दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था.

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सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि एनआइए की एक चार्जशीट में यह कहा गया है कि आधुनिक पावर कंपनी के एमडी और ट्रांसपोर्टर ने कहा है कि नक्सल प्रभावित इलाके में काम करने देने के नाम पर नक्सली डरा-धमका कर उनसे लेवी वसूलते हैं. वहीं अब एनआइए का कहना है कि ये लोग टेरर फंडिंग करते थे.

कोर्ट ने कहा कि एनआइए ने बिना किसी साक्ष्य के दोनों व्यवसायियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिसे निरस्त किया जाना चाहिए.इसके बाद अदालत ने दोनों के खिलाफ पीड़क कार्रवाई नहीं करते हुए एनआइए से जवाब मांगा था.

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