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पत्रकारों के लिए असुरक्षित देश की सूची में भारत का 14वां नंबर

कुछ भारतीय मीडिया संस्थानों को छोड़कर पत्रकारों पर हमले या उनकी हत्या का मुद्दा वैसे नहीं उठाया जाता, जैसा होना चाहिए.  

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NewDelhi :  पत्रकारों के लिए असुरक्षित देश की सूची में भारत का 14वां नंबर है.  पत्रकार संगठन कमेटी टु प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने ग्लोबल इम्प्यूनिटी इंडेक्स जारी किया है, जिसमें उन देशों को शामिल किया जाता है,  जहां पत्रकारों की हमलों के लिए अपराधियों को सजा नहीं मिलती. इस सूची में भारत 14वें नंबर पर है. बता दें कि यह सूची ऐसे समय में आयी है जब सऊदी अरब के काउंसुलेट में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या पर बवाल मचा हुआ है. खबरों के अनुसार सीपीजे ने सितंबर 2008 से अगस्त 2018 के बीच दुनिया भर में पत्रकारों की हत्या के मामलों का अध्ययन किया. पाया कि भारत में पत्रकारों की हत्या के 18 मामले ऐसे हैं, जो सुलझ नहीं पाये. आंकड़ों के अनुसार सबसे बुरी हालत सोमालिया में है. इसके बाद कतार में  सीरिया, इराक, पाकिस्तान और बांग्लादेश आते हैं. सीपीजे के अनुसार अध्ययन बताता है कि पत्रकारों के काम की वजह से उन पर जानबूझकर हमले किये गये. सीपीजे की यह 11वीं रिपोर्ट है, इसके अनुसार पिछले एक दशक में दुनिया भर के कम से कम 324 पत्रकारों की आवाज दबाने के लिए उन्हें मार दिया गया. इनमें से लगभग 85 प्रतिशत मामलों में अपराधियों को सजा नहीं मिली. बता दें कि सीपीजे की सूची में भारत 11 बार आ चुका है.

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90 के शुरुआती दशक से भारत में 27 पत्रकारों को जान से हाथ धोना पड़ा

सीपीजे की सूची में  2017 में भारत का 12वां स्थान था. सीपीजे की 2017 की रिपोर्ट में दर्ज है कि 90 के शुरुआती दशक से भारत में 27 पत्रकारों को जान से हाथ धोना पड़ा.  तत्कालीन रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने यूनेस्को के जवाबदेही तंत्र में हिस्सा लेने से भी इनकार कर दिया, था जो मारे गये पत्रकारों के मामलों की जांच की स्थिति पर जानकारी मांगता है.  बता दें कि पिछले दो वर्षों में भारत उन देशों में शुमार हो गया है, जहां पत्रकारों की सबसे ज्यादा हत्या हुई है. जान लें कि 2016 में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट ने पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देशों में भारत को आठवें नंबर पर रखा था. 2018 में भारत में कई पत्रकारों की हत्या हुई जिसमें राइजिंग कश्मीर अखबार के संपादक और डॉयचे वेले से लंबे समय तक जुड़े रहे शुजात बुखारी का नाम शामिल है. जून 2018 में जब बुखारी अपने श्रीनगर स्थित दफ्तर से निकले तो उन पर अज्ञात लोगों ने हमला किया.  मार्च में   मध्य प्रदेश के संदीप शर्मा, बिहार में नवीन निश्चल और विजय सिंह की भी हत्या कर दी गयी.

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गौरी लंकेश को उनके घर के बाहर ही गोलियां मारी गयीं

2017 में कन्नड़ अखबार की संपादक और हिंदू चरमपंथियों के खिलाफ मुखर गौरी लंकेश को उनके घर के बाहर ही गोलियां मारी गयीं.  आजतक ऑनलाइन के संपादक  पाणिनी आनंद के अनुसार अखबारों में पत्रकारों की स्थिति दयनीय है. वे अगर चरमपंथियों या प्रभावशाली लोगों के खिलाफ रिपोर्टिंग करें तो उन्हें यातना दी जाती है और कई बार तो मार दिया जाता है. ऐसे में पत्रकार तो हमेशा डरा रहेगा. पत्रकारों की हत्या पर चुप्पी खतरनाक है. भारत के संदर्भ में पाणिनी आनंद कहते हैं, कुछ भारतीय मीडिया संस्थानों को छोड़कर पत्रकारों पर हमले या उनकी हत्या का मुद्दा वैसे नहीं उठाया जाता, जैसा होना चाहिए. कई बार अखबार इसे सिंगल कॉलम में समेटकर रख देते हैं और बात आयी-गयी  हो जाती है. भारत में पत्रकारों को खुद जागरूक होने की जरूरत है.

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