न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

भारत सरकार ने 827 पॉर्न वेबसाइट्स बैन कर दी, नेट न्यूट्रैलिटी के पैरोकारों को रास नहीं आया

भारत सरकार द्वारा 827 पॉर्न वेबसाइट्स बैन कर दिया गया है, लेकिन सरकार का यह फैसला इनके यूजर्स और नेट न्यूट्रैलिटी के पैरोकारों को खटक रहा है

512

NewDelhi : भारत सरकार द्वारा 827 पॉर्न वेबसाइट्स बैन कर दी गयी है, लेकिन सरकार का यह फैसला इनके यूजर्स और नेट न्यूट्रैलिटी के पैरोकारों को खटक रहा है.  जिन्होंने इन वेबसाइट्स की ऐनुअल सब्सिक्रिप्शन ले रखी है, वे परेशान हैं. लेकिन खबरों के अनुसार पॉर्न साइट्स के दिग्गजों द्वारा अपने ग्राहकों के लिए कुछ खास इंतजाम भी किये गये हैं.  जानकारी के अनुसार अमेरिका और ब्रिटेन के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा बाजार है.  यह देखते हुए पॉर्न हब जैसी दिग्गज वेबसाइट ने एक नयी मिरर साइट बनाई है.  इस क्रम में एक वेबसाइट अब अपने यूजर्स को मोबाइल ऐप डाउनलोड करने की सलाह दे रही है.  बता दें कि मोबाइल इंटरनेट प्रोवाइडर जियो ने भी अपने नेटवर्क पर इन सभी वेबसाइट्स को बैन कर दिया है.  लोग ट्विटर पर हैशटैग #pornban का सहारा लेकर अपनी बात रख रहे हैं.  यूजर्स कह रहे हैं कि भारत में उठाया गया कदम नेट न्यूट्रैलिटी के खिलाफ जाता है जो किसी भी कंटेंट प्रोवाइडर को किसी तरह के भेदभाव से बचाता है.

इसे भी पढ़ें  सुप्रीम कोर्ट को राफेल की कीमत से जुड़ी जानकारी नहीं देगी सरकार, ऐफिडेविट दाखिल कर सकती है

Aqua Spa Salon 5/02/2020

ऐसी पॉर्न साइट्स के खिलाफ ऐक्शन नहीं लेना चाहिए जो बेहतर कंटेंट के लिए जानी जाती हैं

यूजर्स के अनुसार सरकार को चाइल्ड पॉर्न, रेप पॉर्न और बॉन्डेज, डिसिप्लीन, सैडिज्म और मासोकिज्म जैसी चीजों के खिलाफ ऐक्शन लेना चाहिए.  उनका कहना है कि ऐसी पॉर्न साइट्स के खिलाफ ऐक्शन नहीं लेना चाहिए जो बेहतर कंटेंट के लिए जानी जाती हैं.  इस मामले में पॉर्नहब के वाइस प्रेजिडेंट कोरी प्राइस का बयान भी सबके सामने आया है. उनके अनुसार केवल पॉर्नहब जैसी बड़ी साइट्स बैन की गयी हैं जबकि हजारों रिस्की साइट्स जिनपर अवैध कंटेंट भी हो सकते हैं, उन्हें ब्लॉक नहीं किया गया.  कोरी प्राइस ने कहा कि भारत में पॉर्नग्रफी और निजी तौर पर अडल्ट कंटेंट देखने के खिलाफ कोई कानून नहीं है.  उन्होंने आरोप लगाया कि साफ है कि भारत सरकार हमारी साइट्स को बलि का बकरा बना रही है. इस संबंध में मद्रास हाई कोर्ट के वकील पीके राजगोपाल ने कहा कि एक परिपक्व लोकतंत्र में यह फैसला दर्शकों पर छोड़ देना चाहिए कि उन्हें क्या देखना है.  कहा कि चाइल्ड पॉर्न या हिंसक कंटेंट को बैन करना समझ में आता है लेकिन न्यूडिटी या पॉर्न पर बैन मोरल पुलिसिंग है.   संविधान का हवाला देते हुए कहा कि हमारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राइट टू कंजम्शन अनुच्छेद 19 के तहत सुरक्षित है.

पॉर्न साइट्स पर बैन लगने का समर्थक भी किया जा रहा है. समर्थक उन स्टडीज का हवाला दे रहे हैं जिनके आधार पर पॉर्न और महिलाओं के खिलाफ अपराध में एक संबंध स्थापित किया जाता है.  इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट क वकील ए सिराजुद्दीन का कहना है कि ऐसी कई स्टडीज हैं जो दिखाती हैं कि पॉर्न की लत महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के लिए प्रेरित कर सकती है. कहा कि सरकार ने यह कदम लोगों के हित में उठाया होगा.  उन्होंने नेट न्यूट्रैलिटी लॉ को स्वीकार करते हुए कहा कि पूर्ण तटस्थता और पूर्ण गैर हस्तक्षेप संभव नहीं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like